राजस्थान में देश की आधुनिक और हाईटेक बालोतरा की पचपदरा रिफाइनरी में आगजनी की घटना पर बयानबाजी का दौर शुरू हो गया। मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी, पूर्व मंत्री बायतु विधायक हरीश चौधरी ने जांच और कारणों को सार्वजिनक करने पर सवाल खड़े कर दिए। चौधरी ने कहा इस मामले की जांच देश की शीर्ष एजेंसी नेशनल इंवेस्टिगेशन एजेंसी (NIA) की ओर से की जा रही है। तब जांच पूरी होने से पहले ही कारणों का सार्वजनिक करना कई सवाल खड़े करता है। हरीश चौधरी ने X पर ट्वीट करते हुए सवाल उठाते हुए लिखा कि जब जांच एक केंद्रीय एजेंसी के पास है, तो राज्य सरकार आखिर किस आधार पर इस अग्निकांड के कारणों को सार्वजनिक कर रही है? उन्होंने कहा कि इस प्रकार की जल्दबाज़ी न केवल जांच की दिशा को प्रभावित कर सकती है। बल्कि सच्चाई सामने आने में भी बाधा बन सकती है। उन्होंने कहा कि ऐसे संवेदनशील मामलों में यदि किसी संस्था या व्यक्ति के पास कोई ठोस साक्ष्य है, तो उसे सार्वजनिक मंचों पर साझा करने के बजाय सीधे NIA को सौंपना अधिक जिम्मेदार और उचित कदम होगा। इससे जांच निष्पक्ष रूप से आगे बढ़ेगी और तथ्यों का वास्तविक खुलासा हो सकेगा। विधायक ने कहा-जांच से जुड़े तथ्यों को सार्वजनिक करने का अधिकार केवल जांच एजेंसी के पास होता है। ऐसे में यह स्पष्ट होना चाहिए कि National Investigation Agency के अलावा एचपीसीएल, पेट्रोलियम मंत्रालय या राज्य सरकार किस अधिकार से इस प्रकार की जानकारी साझा कर रहे हैं। यह स्थिति सरकार की मंशा पर भी सवाल खड़े करती है। 13 सालों के इंतजार के बाद परियोजना पूरी हुई चौधरी ने कहा- यह परियोजना करीब 13 वर्षों के लंबे इंतजार के बाद साकार हुई थी, जिससे प्रदेश को हर वर्ष करोड़ों रुपए का राजस्व और युवाओं को बड़े पैमाने पर रोजगार मिलने की उम्मीद थी। ऐसे में इस तरह की घटना प्रदेश के औद्योगिक विकास और निवेशकों के विश्वास को प्रभावित कर सकती है। सच्चाई सामने लाने की जरूरत- चौधरी विधायक हरीश चौधरी ने कहा कि इस पूरे प्रकरण में पारदर्शिता, जवाबदेही और संवैधानिक प्रक्रियाओं का पालन सुनिश्चित किया जाना चाहिए। ताकि सच्चाई बिना किसी दबाव के सामने आ सके और दोषियों की पहचान कर भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकी जा सके। इससे जुड़ी खबर पढ़ें… 'रिफाइनरी आगजनी की निष्पक्ष जांच से बचने की कोशिश':सांसद बोले- IIT को अनुमति नहीं दी, मामला लीपापोती का शिकार बन जाएगा