राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने मंगलवार को कहा कि 2000 साल तक शासन, धर्म और विज्ञान के अलग-अलग प्रयोगों के बाद अब दुनिया भटक गई है और भारत के ज्ञान की ओर देख रही है। उन्होंने यह बात त्रिपुरा के मोहनपुर में धार्मिक कार्यक्रम में कही। उन्होंने कहा कि कुछ ‘दुष्ट शक्तियां’ इस बात से चिंतित हैं कि अगर भारत अपनी सदियों पुरानी सभ्यतागत ताकत के सहारे आगे बढ़ा, तो उनकी दुकानें बंद हो जाएंगी। भागवत मां सौंदर्य चिन्मयी मंदिर के प्रतिष्ठा और कुंभाभिषेक कार्यक्रम को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने आरोप लगाया कि देश के लोगों के बीच धार्मिक और भाषाई आधार पर फूट डालने की कोशिशें की जा रही हैं। भारत की असली ताकत उसकी विविधता में एकता में निहित है। ज्ञान और शक्ति, दोनों अर्जित करें भागवत ने कहा, जिन देशों का इतिहास 4,000 या 5,000 साल से ज़्यादा पुराना नहीं है, वहां एक धर्म और एक भाषा हो सकती है, लेकिन भारत पूरी तरह से अलग है। इसका इतिहास, परंपरा और संस्कृति बहुत पुरानी और समृद्ध है। उन्होंने लोगों से एकजुट रहने और फूट डालने की कोशिशों को नाकाम करने का आग्रह किया। कहा, हालात चाहे जैसे भी हों, डरने की कोई ज़रूरत नहीं है। मौजूदा विश्व व्यवस्था में, अकसर शक्ति ही सही को दबा देती है। अगर आपके पास शक्ति है, तो आपकी ताकत साबित हो जाएगी; अगर आप सही रास्ते पर भी हैं, लेकिन आपके पास शक्ति नहीं है, तो कोई आपकी बात पर ध्यान नहीं देगा। इसलिए, ज्ञान और शक्ति, दोनों अर्जित करें। भागवत ने कहा कि मंदिर केवल पूजा-पाठ के स्थान नहीं हैं, बल्कि ऐतिहासिक रूप से वे सामाजिक जीवन और ज्ञानोदय के केंद्र रहे हैं। विकास जितना बढ़ रहा है, पर्यावरण उतना ही नष्ट हो रहा भागवत ने कहा कि पहले सत्ता राजा को दी गई, लेकिन बाद में राजा ही जनता का शोषण करने लगा। इसके बाद लोगों ने भगवान को सर्वोच्च मानकर धर्म बनाए, लेकिन इससे भी खून-खराबा नहीं रुका। कार्यक्रम में त्रिपुरा के मुख्यमंत्री माणिक साहा और अन्य गणमान्य लोग भी मौजूद थे। ------------------------------ ये खबर भी पढ़ें: भागवत बोले- संघ कहे तो पद छोड़ दूंगा:कोई भी हिंदू RSS प्रमुख बन सकता है; सावरकर को भारत रत्न देने से पुरस्कार की गरिमा बढ़ेगी राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) प्रमुख मोहन भागवत ने रविवार को कहा कि यदि संघ उनसे पद छोड़ने को कहेगा, तो वे तुरंत ऐसा करेंगे। आमतौर पर 75 साल की उम्र के बाद किसी पद पर नहीं रहने की परंपरा की बात कही जाती है। पढ़ें पूरी खबर…