प्रदेश के 152 नगरीय निकायों में वर्षों से जमा करीब 75 लाख घनमीटर लिगेसी वेस्ट (पुराने कचरे) को हटाने के लिए 310 करोड़ रुपए की परियोजना शुरू करने जा रही है। अब इन स्थानों पर वेस्ट प्रोसेसिंग प्लांट स्थापित किए जाएंगे, ताकि भविष्य में दोबारा कचरे के पहाड़ नहीं बनें। सरकार इसे केंद्र के ‘जीरो डंपसाइट’ लक्ष्य की दिशा में बड़ा कदम मान रही है। परियोजना के तहत अब तक 30 नगरीय निकायों में 24 लाख घनमीटर कचरे के निस्तारण के कार्यादेश जारी किए जा चुके हैं, जबकि 40 निकायों में 35 लाख घनमीटर कार्यों के लिए लेटर ऑफ एक्सेप्टेंस (एलओए) यानी स्वीकृति पत्र जारी हो चुका है। शेष 82 निकायों में लगभग 16 लाख घनमीटर कचरे के निस्तारण के लिए तकनीकी मूल्यांकन चल रहा है। स्वच्छ भारत मिशन-शहरी 2.0 के तहत राजस्थान में नवंबर 2025 से मार्च 2026 के बीच करीब 24 लाख घनमीटर लिगेसी वेस्ट का वैज्ञानिक निस्तारण भी किया जा चुका है। पुराना कचरा ईंधन और सड़क निर्माण में काम आएगा ऐसे खत्म होगा वर्षों पुराना कचरा पुराने कचरे का निस्तारण बायोमाइनिंग तकनीक से किया जाएगा। इसमें कचरे को अलग-अलग श्रेणियों में छांटकर उपयोगी सामग्री निकाली जाएगी। मिट्टी जैसी सामग्री सड़क निर्माण में, प्लास्टिक और धातु रीसाइक्लिंग में तथा ज्वलनशील पदार्थों से आरडीएफ (रिफ्यूज डिराइव्ड फ्यूल) तैयार कर सीमेंट उद्योग और ऊर्जा उत्पादन में इस्तेमाल किया जाएगा। इन राज्यों में अच्छी वर्किंग