मध्यप्रदेश कांग्रेस प्रभारी और बायतु विधायक हरीश चौधरी ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हालिया बयान पर टिप्पणी की है। उन्होंने कहा कि 12 वर्षों से सत्ता में रहने के बाद यदि प्रधानमंत्री देशवासियों को कम पेट्रोल इस्तेमाल करने, सोना न खरीदने और विदेश यात्राएं कम करने जैसी सलाह देने लगते हैं, तो यह किसी मजबूत अर्थव्यवस्था का संकेत नहीं बल्कि नीतिगत विफलताओं की सार्वजनिक स्वीकारोक्ति है। महंगाई-बेरोजगारी पर सरकार को घेरा हरीश चौधरी ने कहा कि जिस सरकार ने देश की जनता को “अच्छे दिनों” का सपना दिखाया था, आज वही सरकार महंगाई, बेरोजगारी और आर्थिक दबाव से जूझ रही जनता को अपनी आवश्यकताएं कम करने का संदेश दे रही है। उन्होंने कहा कि देश का मध्यम वर्ग लगातार बढ़ती महंगाई से परेशान है, युवा रोजगार के अवसरों के लिए भटक रहे हैं और किसान लागत व बाजार संकट से जूझ रहा है, लेकिन केंद्र सरकार के पास ठोस समाधान के बजाय केवल भाषण और सलाह ही बची है। सरकार की जिम्मेदारी पर सवाल विधायक ने आगे कहा कि किसी भी लोकतांत्रिक सरकार की जिम्मेदारी जनता को राहत देना, अर्थव्यवस्था को मजबूत करना और संसाधनों का बेहतर प्रबंधन करना होता है। यदि हर संकट में सरकार अपनी जवाबदेही से बचते हुए जनता से ही त्याग और समझौते की अपेक्षा करने लगे, तो यह शासन की गंभीर कमजोरी को दर्शाता है। तेल उत्पादन में गिरावट को बताया नीतिगत विफलता हरीश चौधरी ने विशेष रूप से पश्चिमी राजस्थान के तेल उत्पादन का उल्लेख करते हुए केंद्र की नीतियों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि वर्ष 2012 में यूपीए सरकार के दौरान बाड़मेर के तेल क्षेत्रों से लगभग 1.75 लाख बैरल प्रतिदिन उत्पादन क्षमता थी, लेकिन गलत नीतियों, प्रबंधन की कमी और दूरदर्शिता के अभाव के कारण यह उत्पादन घटकर लगभग 84 हजार बैरल प्रतिदिन तक सिमट गया। उन्होंने कहा कि यह गिरावट इस बात का प्रमाण है कि देश के उपलब्ध संसाधनों और ऊर्जा क्षमता का प्रभावी उपयोग करने में केंद्र सरकार विफल रही है।