गांधी ग्राउंड के बाहर लवकुश स्टेडियम के पास 2 से 8 नवंबर तक लगने वाले पटाखा बाजार के लिए गुरुवार को नगर निगम सभागार में अस्थायी दुकानों की खुली नीलामी हुई। व्यापारियों के विरोध और हंगामे के बीच साढ़े 5 घंटे चली प्रक्रिया में कुल 42 में से केवल 24 दुकानें (57.14%) ही नीलाम हो सकीं, जिनसे निगम को 38 लाख रुपए की राजस्व आय हुई। एकल आवेदन आने और कम बोली लगने के कारण 18 दुकानें नीलाम नहीं हो सकीं। अब इनके आवंटन पर अंतिम निर्णय महापौर पारस सिंघवी और निगम आयुक्त अभिषेक खन्ना करेंगे। नगर निगम पिछले साल तक लॉटरी के जरिए पटाखा दुकानों का आवंटन करता था। पर्ची सिस्टम के तहत प्रति दुकान 6 से 8 हजार रुपए दर तय थी। इससे निगम को महज 10 लाख रुपए तक का राजस्व मिलता था। पहली बार अपनाई खुली नीलामी व्यवस्था से महज 24 दुकानें बिकने से ही निगम की आय 3.7 गुना बढ़कर 38 लाख रुपए तक पहुंच गई। दुकान नंबर 2 सबसे महंगी (3 लाख रुपए) और दुकान नंबर 5 सबसे सस्ती (41 हजार रुपए) में छूटी। 18 दुकानों पर फंसा पेंच निगम सभागार में दोपहर 1 बजे नीलामी प्रक्रिया शुरू हुई। कुल 42 दुकानों के लिए 104 आवेदन मिले थे, लेकिन 17 दुकानों के लिए केवल एक-एक आवेदन ही आया। नियमानुसार प्रतिस्पर्धा (दूसरा बोलीदाता) न होने पर निगम ने इन्हें नीलाम करने से इनकार कर दिया। एक-एक आवेदन वाले बोलीदाताओं ने इस फैसले को गलत बताते हुए हंगामा किया। व्यापारियों का तर्क था कि आवेदन के बाद दुकान न देना अनुचित है, जबकि निगम अधिकारियों का कहना था कि उचित कीमत और प्रतिस्पर्धा के बिना आवंटन नहीं हो सकता। हंगामे के चलते शाम 6:30 बजे प्रक्रिया रोक दी गई। दुकान नंबर 20 पर दो आवेदक थे, लेकिन बोली 7 हजार से शुरू होकर 10.5 हजार रुपए तक ही पहुंची, जिसे अधिकारियों ने कम माना। नीलामी के दौरान उपायुक्त हरिसिंह देवल, राजस्व अधिकारी अनिता पहाड़िया, राजस्व निरीक्षक मोहित अग्निहोत्री, विजय जैन, राहुल मीणा, अकाउंट ऑफिसर्स बाबूलाल बंजारा आदि मौजूद रहे।