भास्कर न्यूज | बाड़मेर गुजरात के सूरत में कोचिंग सेंटर का अग्निकांड हो, दिल्ली का अस्पताल या फिर राजकोट के गेमिंग जोन की झुलसाने वाली त्रासदी। देश भर में हुए इन भीषण हादसों के बाद भी बाड़मेर का प्रशासन और निजी संस्थानों के संचालक नींद में है। नगर परिषद के अग्निशमन केंद्र द्वारा किए गए हालिया सर्वे ने शहर में चल रहे सेंटरों की सुरक्षा व्यवस्था की पोल खोलकर रख दी है। व्यस्त इलाकों में चल रहे 35 कोचिंग सेंटर, हॉस्टल और लाइब्रेरी ऐसे मिले हैं, जहां फायर सेफ्टी के कोई पुख्ता इंतजाम नहीं हैं। हैरान करने वाली बात यह है कि इनमें से अधिकांश संस्थान संकरी गलियों में और जी प्लस-वन व टू जैसी बहुमंजिला इमारतों में अवैध रूप से संचालित हो रहे हैं। यहां रोजाना सैकड़ों विद्यार्थी आते हैं, जिनकी सुरक्षा पूरी तरह दांव पर है। अल्टीमेटम, कमियां पूरी नहीं की तो होगी सख्त कार्रवाई सिर्फ नोटिस थमाकर इतिश्री कर रहा नगर परिषद प्रशासन, कार्रवाई जीरो इस पूरे मामले में नगर परिषद प्रशासन की भूमिका भी कठघरे में है। अग्निशमन विभाग केवल सर्वे रिपोर्ट तैयार कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ रहा है। नियम स्पष्ट कहते हैं कि बिना फायर एनओसी और बिना आवश्यक उपकरणों के किसी भी व्यावसायिक या शैक्षणिक संस्थान का संचालन पूर्णत गैर-कानूनी है। इसके बावजूद नगर परिषद ने अब तक इन संस्थानों को सील करने या भारी जुर्माना लगाने जैसी कोई कार्रवाई अमल में नहीं लाई है। धरातल पर छात्रों की जान से खिलवाड़ हो रहा है। संकरी सीढ़ियां, वेंटिलेशन की कमी और छतों पर झूलते बिजली के तार किसी भी दिन बाड़मेर में बड़े अग्निकांड का कारण बन सकते हैं। ^ नगरपरिषद द्वारा शहर में सर्वे करवाया गया। जिसमें 35 संस्थाओं, कोचिंग और हॉस्टल सामने आए जिन्होंने एनओसी नहीं ली है। नोटिस दिया गया है । - सावन कुमार, राजस्व निरीक्षक, नगरपरिषद बाड़मेर नेशनल बिल्डिंग कोड और राज्य फायर सेफ्टी अधिनियम के तहत शैक्षणिक संस्थानों के लिए बेहद सख्त मानक तय हैं। इनकी बाड़मेर में खुलेआम अनदेखी की जा रही है। सामान्य कोचिंग या स्कूल के आगे की सड़क कम से कम 9 मीटर और उच्च शिक्षण संस्थानों के लिए 12 मीटर चौड़ी होनी चाहिए। यदि बिल्डिंग 15 मीटर से ऊंची है, तो मुख्य सड़क 12 से 15 मीटर चौड़ी होना अनिवार्य है ताकि फायर ब्रिगेड की बड़ी गाड़ियां और हाइड्रोलिक लिफ्ट आसानी से आ-जा सके। बाड़मेर के अधिकांश संस्थान इस मानक को ताक पर रखकर संकरी गलियों में चला रहे हैं। नियमों के मुताबिक गलियारे और सीढ़ियां 1.5 से 2 मीटर चौड़ी होनी चाहिए ताकि आपातकाल में भगदड़ न मचे। सभी आपातकालीन दरवाजे बाहर की तरफ खुलने वाले होने चाहिए, जो कम से कम 1 से 2 घंटे तक आग रोकने में सक्षम हों। हर संस्थान में पर्याप्त फायर एक्सटिंग्विशर, स्मोक व हीट डिटेक्टर, ऑटोमेटिक अलार्म, आपातकालीन लाइट्स और फर्स्ट एड बॉक्स होना जरूरी है। बहुमंजिला भवनों के लिए परिसर में 50 हजार लीटर या उससे अधिक क्षमता का आरक्षित वाटर टैंक, डाउन-कमर और होज रील सिस्टम अनिवार्य है, इससे हर मंजिल को कवर किया जा सके। बाड़मेर जिला मुख्यालय पर संचालित एक भी संस्थान के पास ये पूरे उपकरण चालू हालत में उपलब्ध नहीं हैं। नगर परिषद के राजस्व निरीक्षक ने बताया कि सर्वे में सुरक्षा मानकों पर फेल पाई गई 35 संस्थाओं में से 10 संस्थाओं को तत्काल नोटिस थमा दिए गए हैं। शेष बची डिफाल्टर संस्थाओं के खिलाफ भी सोमवार को नोटिस की कार्रवाई पूरी कर ली जाएगी। चेतावनी दी है कि संस्थानों ने अपनी कमियों को दूर कर फायर एनओसी के लिए आवेदन नहीं किया, तो सख्त कार्रवाई होगी।