राजस्थान क्रिकेट संघ के 29 सितंबर को होने वाले चुनाव से पहले पूर्व आरसीए अध्यक्ष और आईपीएल के पहले चेयरमैन ललित मोदी ने राजस्थान क्रिकेट की मौजूदा व्यवस्था, चयन प्रक्रिया, खिलाड़ियों की आर्थिक सुरक्षा और प्रशासनिक विवादों पर खुलकर बात की। उन्होंने कहा कि राजस्थान क्रिकेट को नियंत्रण की राजनीति से निकालकर खिलाड़ियों के विकास पर केंद्रित करने की जरूरत है। मोदी ने स्पष्ट किया कि आरसीए या बीसीसीआई में लौटने की उनकी कोई इच्छा नहीं है, लेकिन राजस्थान क्रिकेट के विकास के लिए सलाह मांगी गई तो वे विचार देने को तैयार हैं। लंदन से भास्कर से विशेष बातचीत में उन्होंने कई मुद्दों पर अपनी बात रखी। राजनीति नहीं, खिलाड़ियों के प्रदर्शन से पहचानी जाए राजस्थान क्रिकेट... 1: क्या पिछले कुछ वर्षों में आरसीए क्रिकेट से ज्यादा सत्ता की राजनीति का अखाड़ा बन गया? दुर्भाग्य है कि आज हर कोई राजस्थान की क्रिकेट पर नियंत्रण करना चाहता है। जब खिलाड़ियों से ज्यादा राजनीति महत्वपूर्ण हो जाती है तो प्रतिभाओं को नुकसान होता है। आरसीए चुनाव क्रिकेटिंग उद्देश्य को स्थापित करने का होना चाहिए। 2: क्या अनुभवी लोगों को राजस्थान क्रिकेट प्रशासन में वापस आना चाहिए? सिर्फ अनुभव किसी पद पर बने रहने का आजीवन अधिकार नहीं है। आरसीए को खिलाड़ियों के लिए काम करने वाले सक्षम लोगों की जरूरत है। पेशेवर अधिकारियों, पूर्व क्रिकेटरों और विशेषज्ञों को होना चाहिए। 3: क्या आप राजस्थान क्रिकेट या बीसीसीआई प्रशासन में वापस आने की इच्छा रखते हैं? नहीं, आरसीए या बीसीसीआई में किसी पद पर लौटने की मेरी कोई इच्छा नहीं है। मेरे जीवन का वह अध्याय पूरा हो चुका है। यदि खेल के विकास के लिए वास्तव में मेरी सलाह मांगी जाती है तो मैं विचार देने में खुशी महसूस करूंगा। 4: आरसीए के नए नेतृत्व को क्या सलाह देंगे? नए नेतृत्व को 5 साल की योजना पर काम करना चाहिए। हर साल प्रगति रिपोर्ट देनी चाहिए। 29 सितंबर के बाद राजस्थान क्रिकेट में सबसे पहला बदलाव क्या होना चाहिए? राजनीति, पक्षपात और गोपनीयता की जगह प्रोफेशनलिज्म, पारदर्शिता और प्रदर्शन को लाना चाहिए। आरसीए अध्यक्ष रहते आपने जिस मॉडल की कल्पना की थी और आज की व्यवस्था में सबसे बड़ा अंतर क्या है? मेरा विजन आरसीए को एक आधुनिक, आर्थिक रूप से मजबूत और पेशेवर तरीके से संचालित संस्था बनाने का था, जो पूरे राजस्थान में प्रतिभाओं की खोज करे और खिलाड़ियों को विश्वस्तरीय सुविधाएं और अवसर दे। क्रिकेट संघ की पहचान उसके द्वारा पैदा किए गए क्रिकेटरों से होनी चाहिए, उसके द्वारा पैदा किए गए मुकदमों से नहीं। आईपीएल के पीछे आपका सबसे बड़ा विचार क्या था, जिसने भारतीय क्रिकेट के आर्थिक मॉडल को बदल दिया? मेरा मुख्य विचार था कि क्रिकेट को सिर्फ मैचों तक सीमित न रखकर उसे एक बड़े मनोरंजन और व्यावसायिक आयोजन के रूप में विकसित किया जाए। इसके लिए हमने दुनिया के बड़े खिलाड़ियों, शहरों की टीमों, प्राइम टाइम टीवी प्रसारण, मीडिया अधिकार और राजस्व साझेदारी को एक साथ जोड़ा।हमने यह समझा कि क्रिकेट को देखने वालों की संख्या बहुत बड़ी है। अगर इस दर्शक वर्ग को सही तरीके से जोड़ा जाए तो इससे पूरे क्रिकेट तंत्र के लिए बड़ी और लगातार आय पैदा की जा सकती है। आईपीएल सिर्फ एक नया टूर्नामेंट शुरू करना नहीं था। इसका उद्देश्य क्रिकेट को खेलने, देखने और उससे जुड़ी व्यावसायिक गतिविधियों के तरीके को बदलना था। राजस्थान में प्रतिभा की कमी नहीं है, लेकिन चयन को लेकर विवाद सामने आते रहे हैं। चयन प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी बनाने के लिए क्या बदलाव जरूरी हैं? चयन को व्यक्तिगत प्रभाव हावी नहीं होना चाहिए। आरसीए को चयन मानदंड लागू करने चाहिए। स्वतंत्र चयनकर्ता निश्चित कार्यकाल के साथ नियुक्त हों और हितों के टकराव की घोषणा करें। जिला स्तर से ऊपर तक खिलाड़ियों के प्रदर्शन का डिजिटल रिकॉर्ड रखा जाए। चयनकर्ताओं को क्रिकेट संबंधी निर्णय लेने की स्वतंत्रता होनी चाहिए, लेकिन हर उम्मीदवार को निष्पक्ष अवसर मिलना चाहिए। किसी युवा खिलाड़ी को कभी यह महसूस नहीं होना चाहिए कि रन और विकेट से ज्यादा महत्वपूर्ण कोई फोन कॉल है। आईपीएल ने खिलाड़ियों के लिए बड़ी आर्थिक संभावनाएं पैदा की हैं। क्या राज्य संघों को भी राज्य स्तर के खिलाड़ियों के लिए आर्थिक अवसर और सुरक्षा बढ़ाने का मॉडल बनाना चाहिए? बिल्कुल। आईपीएल शीर्ष स्तर के खिलाड़ियों को आर्थिक रूप से पुरस्कृत करता है, लेकिन राज्य संघों को इसके नीचे मौजूद व्यापक ढांचे को मजबूत करना चाहिए। आरसीए को सीनियर पुरुष और महिला खिलाड़ियों के लिए बेहतर रिटेनर, मैच फीस में सुधार, चोट और चिकित्सा बीमा, पेंशन सहायता, प्रदर्शन बोनस और जिला अकादमियों के लिए पर्याप्त वित्तीय व्यवस्था करनी चाहिए। आरसीए की वार्षिक आय का एक हिस्सा अलग से खिलाड़ी विकास और कल्याण कोष में रखा जाना चाहिए। राजस्थान की क्रिकेट मैदान पर कम कोर्ट में ज्यादा चलती है। क्या क्रिकेट प्रशासन के विवादों का समाधान क्रिकेट व्यवस्था के भीतर स्वतंत्र तंत्र के माध्यम से होना चाहिए? हां। जहां कानूनी या संवैधानिक अधिकारों का मामला हो, वहां अदालतों का रास्ता हमेशा खुला रहना चाहिए। लेकिन सामान्य क्रिकेट प्रशासन से जुड़े विवाद वर्षों तक अदालतों में नहीं रहने चाहिए। आरसीए को एक स्वतंत्र विवाद समाधान और मध्यस्थता पैनल बनाना चाहिए। जब हर निर्णय अदालत की लड़ाई बन जाए तो क्रिकेट का प्रभावी प्रशासन नहीं हो सकता। वैभव गहलोत के समय RCA के स्टेडियम का काम शुरू हुआ, 3 साल से काम रूका हुआ है, क्या कहेंगे? बड़ी परियोजनाएं आम तौर पर नेतृत्व में बदलाव, राजनीतिक हस्तक्षेप, अस्पष्ट वित्तीय व्यवस्था, अनुबंध संबंधी विवाद से रुकती हैं। स्टेडियम को किसी एक पदाधिकारी की निजी परियोजना नहीं माना जा सकता। यह राजस्थान क्रिकेट की संपत्ति है। नए नेतृत्व को तुरंत स्वतंत्र तकनीकी और वित्तीय ऑडिट कराना चाहिए, जो भी अड़चन हैं उन्हें दूर करना चाहिए। लागत, निर्माण की प्रगति और पूर्णता की तारीख को लेकर हर तिमाही सार्वजनिक रिपोर्ट जारी होनी चाहिए।