राजस्थान में राजस्व विभाग की नई ई-साइन और नामांतरण लॉक व्यवस्था से किसानों के जमीन संबंधी काम प्रभावित हो रहे हैं। आधार नंबर और ओटीपी अनिवार्य होने से नामांतरण, रहन और विरासत के कामों में देरी हो रही है। पहले एक तहसील में रोजाना औसतन 20 नामांतरण होते थे, लेकिन अब संख्या 5 तक भी नहीं पहुंच रही है। यानी कामकाज में करीब 75% या उससे ज्यादा गिरावट आई है। नागौर जिले में करीब 1150 मामले लंबित हैं, जबकि प्रदेश के अन्य जिलों में भी 800 से 1000 आवेदन पेंडिंग बताए जा रहे हैं। नई व्यवस्था के विरोध में पिछले 20 दिनों से राजस्थानभर में नामांतरण कार्य का बहिष्कार चल रहा है। राजस्व मंडल अजमेर के 7 अगस्त के आदेश के बाद 11 अगस्त से लागू व्यवस्था में तकनीकी खामियों और जटिल प्रक्रिया के कारण किसानों को तहसीलों और पटवार घरों के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं। राजस्व अधिकारियों और कर्मचारियों का कहना है कि पर्याप्त तैयारी और फील्ड ट्रायल के बिना सिस्टम लागू किया गया। त्योहारों से पहले जमीन संबंधी कामों में देरी से किसानों की परेशानी बढ़ गई है। 5 मिनट का काम अब 30 मिनट से ज्यादा में पहले पोर्टल पर नामांतरण की प्रक्रिया करीब 5 मिनट में पूरी हो जाती थी। अब आधार नंबर दर्ज करने, ओटीपी लेने और तय समय में भरने के कारण एक नामांतरण में 30 मिनट से ज्यादा लग रहे हैं। एक प्रकरण में कई खातेदार होने पर हर खातेदार के लिए प्रक्रिया दोहरानी पड़ती है। पोर्टल की धीमी गति और सर्वर की समस्याओं से भी काम प्रभावित हो रहा है। किसानों को अपनी बारी के लिए घंटों इंतजार करना पड़ता है। 15 सेकंड में ओटीपी, फिर 20 मिनट तक ‘Please Wait’ राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद के प्रदेश अध्यक्ष पुष्पेंद्र देशवाल के अनुसार, ओटीपी दर्ज करने के लिए केवल 15 सेकंड मिलते हैं। इसके बाद पोर्टल करीब 20 मिनट तक ‘Please Wait’ दिखाता है और फिर अचानक बंद हो जाता है। कई बार एक गांव के नामांतरण के दौरान सॉफ्टवेयर दूसरे गांव के खातों को पेंडिंग दिखाने लगता है। इससे कर्मचारियों को एक ही काम के लिए बार-बार प्रयास करना पड़ता है। 5 दिन बाद ऑटो फॉरवर्ड तकनीकी दिक्कतों के कारण पटवारी स्तर पर नामांतरण की कार्रवाई समय पर पूरी नहीं हो पा रही है। वहीं, पांच दिन की तय अवधि पूरी होने पर सिस्टम प्रकरण को ऑटो फॉरवर्ड कर देता है। इससे किसानों को लग सकता है कि अधिकारी जानबूझकर फाइलें अटका रहे हैं, जबकि देरी की वजह तकनीकी समस्या भी हो सकती है। ऐसे में तहसील कार्यालयों में अधिकारियों और किसानों के बीच विवाद व शिकायतों की आशंका बढ़ रही है। तहसीलदार सेवा परिषद ने राजस्व मंडल अध्यक्ष को लिखा पत्र नई ई-साइन व्यवस्था और सॉफ्टवेयर में लगातार बदलावों को लेकर राजस्थान तहसीलदार सेवा परिषद ने राजस्व मंडल अध्यक्ष को पत्र लिखकर आपत्तियां दर्ज कराई हैं। परिषद ने तकनीकी और व्यावहारिक समस्याएं बताते हुए कहा कि व्यवस्था लागू करने से पहले फील्ड ट्रायल होना चाहिए था, ताकि वास्तविक परिस्थितियों में सामने आने वाली खामियों को दूर किया जा सके।