मानवता और सेवा की भावना के साथ नागौर निवासी सुशीला देवी ललवानी के निधन के बाद उनके परिजनों ने उनका पार्थिव शरीर मेडिकल एजुकेशन और रिसर्च के लिए गर्वनमेंट मेडिकल कॉलेज नागौर को समर्पित किया। मेडिकल कॉलेज में यह दूसरा देहदान है। कॉलेज के प्रिंसिपल एवं कंट्रोलर ऑफिस के अनुसार, सुशीला देवी ललवानी पत्नी स्वर्गीय चंचलमल ललवानी के देहदान से मेडिकल स्टूडेंट्स को मानव शरीर की बनावट और संरचना को समझने में मदद मिलेगी। इससे स्टूडेंट्स को प्रेक्टिकल नॉलेज मिलेगी। साथ ही मेडिकल ट्रेनिंग और रिसर्च में भी फायदा होगा। देहदान के लिए अब तक 13 आवेदन सुशीला देवी के परिवार में उनके बेटे सुभाष ललवानी, बहू विजया ललवानी, पौत्र शुभम, पौत्रवधू पमिता, पौत्र सौरभ ललवानी, बेटी चंद्रकला और दामाद दिलीप मुनोत शामिल हैं। परिजनों का कहना है कि मृत्यु के बाद भी देहदान के जरिए दूसरों के जीवन और मेडिकल एजुकेशन में योगदान दिया जा सकता है। गवर्नमेंट मेडिकल कॉलेज नागौर में अब तक देहदान के लिए 13 आवेदन प्राप्त हो चुके हैं। कॉलेज प्रशासन के अनुसार, देहदान मेडिकल एजुकेशन का महत्वपूर्ण हिस्सा है। इससे मेडिकल स्टूडेंट्स को मानव शरीर की संरचना को करीब से समझने का मौका मिलता है। प्रिंसिपल का कहना है कि सुशीला देवी ललवानी का देहदान चिकित्सा शिक्षा और अनुसंधान के लिए उपयोगी साबित होगा। साथ ही, यह पहल समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाने और दूसरे लोगों को भी इस कार्य के लिए प्रेरित करने में मदद करेगी।