नागौर जिला सड़क सुरक्षा के क्षेत्र में देश का अग्रणी जिला बन गया है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) के सहयोग से तैयार जिला स्तरीय सड़क सुरक्षा एक्शन प्लान को पूरा करने वाला नागौर, देश के चिन्हित 100 सर्वाधिक दुर्घटना वाले जिलों में पहले स्थान पर है। शासन सचिव (परिवहन) के निर्देशानुसार तैयार इस प्लान का मुख्य उद्देश्य सड़क हादसों और उनमें होने वाली मौतों की दर को न्यूनतम करना है। ​सेफ सिस्टम अप्रोच : गलती इंसान करे, पर सिस्टम जान बचाए ​इस एक्शन प्लान में सड़क सुरक्षा को महज विभाग का काम न मानकर 'पब्लिक हेल्थ इमरजेंसी' माना गया है। खास बात यह है कि इसमें ‘सेफ सिस्टम्स अप्रोच’ अपनाई गई है। इसका मतलब है कि यदि सड़क पर चालक से मानवीय त्रुटि हो भी जाए, तो सड़क की इंजीनियरिंग और सुरक्षा ढांचा ऐसा हो कि वह गलती मौत का कारण न बने। ​2026 के लिए 'मिशन मोड' लक्ष्य ​जिला प्रशासन और परिवहन विभाग ने आगामी वर्ष के लिए कड़े माइलस्टोन तय किए हैं: ​सख्ती: ओवरस्पीडिंग पर रोज 200 ई-चालान और ड्रंक एंड ड्राइव पर हर थाने में कम से कम एक चालान रोज। ​सुरक्षा: हेलमेट पहनने की दर को 85% तक पहुंचाना और 11 खतरनाक ब्लैक स्पॉट्स को ठीक करना। ​जांच: सभी बस और स्कूल वैन चालकों का 100% विजन टेस्ट और टोल प्लाजा पर 5000 बड़े वाहन चालकों का हेल्थ चेकअप। ​एजुकेशन: जिले में 50 'सेफ स्कूल जोन' विकसित किए जाएंगे। ​इलाज में देरी नहीं : अपग्रेड होंगे ट्रॉमा सेंटर ​हादसे के बाद 'गोल्डन ऑवर' में जान बचाने के लिए मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर को मजबूत किया जा रहा है: ​रिस्पॉन्स टाइम: शहर में 20 और गांवों में 30 मिनट के भीतर एम्बुलेंस पहुंचेगी। ​अपग्रेडेशन: नागौर के जेएलएन अस्पताल समेत मेड़ता सिटी और खींवसर के ट्रॉमा सेंटर्स को लेवल-2 में उन्नत किया जाएगा, ताकि गंभीर घायलों को तुरंत बेहतर इलाज मिल सके। ​निगरानी के लिए बना ‘साप्ताहिक चक्र’ ​एक्शन प्लान केवल कागजों तक सीमित न रहे, इसके लिए पुलिस थाना स्तर पर हर सप्ताह समीक्षा होगी। इसमें देखा जाएगा कि 24 घंटे के भीतर दुर्घटना का डेटा (e-DAR) पोर्टल पर फीड हुआ या नहीं। जिला स्तर पर हर महीने कलेक्टर और सड़क सुरक्षा समिति इसकी प्रगति की जांच करेंगे।