आमजन की समस्याओं के शीघ्र समाधान के लिए नगर परिषद नागौर की ओर से आयोजित 'शहरी सेवा शिविर' जमीनी स्तर पर दम तोड़ता नजर आया। शिविर स्थल पर बड़े-बड़े बैनर और होर्डिंग्स तो लगे थे, लेकिन लोगों की समस्याएं सुनने के लिए जिम्मेदार अधिकारी नहीं थे। मंच पर लगी कुर्सियां लंबे समय तक खाली पड़ी रहीं और पूरा पंडाल सूना नजर आया। शिविर12 जून से 15 जुलाई 2026 तक संचालित होना है। नगर परिषद के कर्मचारी रहे गायब शिविर नगर परिषद परिसर में ही आयोजित किया गया था, लेकिन नगर परिषद के ही अधिकांश जिम्मेदार कर्मचारी मौके पर मौजूद नहीं मिले। दूसरी ओर मेडिकल, जलदाय, विद्युत, परिवहन, राजस्थान हाउसिंग बोर्ड, जन्म-मृत्यु प्रमाण पत्र शाखा और महिला एवं बाल विकास विभाग के कर्मचारी शिविर में उपस्थित रहकर आमजन की समस्याएं सुनते और आवश्यक कार्य करते नजर आए। इसके कारण कैंप में नगर परिषद की भूमिका पर सवाल खड़े हो रहे हैं। दरअसल, सरकार की मंशा है कि प्रशासन लोगों के बीच पहुंचकर मौके पर ही समस्याओं का समाधान करे, ताकि आमजन को कार्यालयों के चक्कर नहीं लगाने पड़ें। लेकिन नगर परिषद नागौर में आयोजित शिविर की तस्वीरें इस उद्देश्य पर सवाल खड़े करती हैं। शिविर स्थल पर वीआईपी टेबल और कुर्सियां तो सजी थीं, लेकिन उन पर बैठने वाले अधिकारी नहीं पहुंचे। इससे आमजन में नाराजगी भी देखने को मिली। स्थानीय लोगों का कहना है- यदि शिविर में अधिकारी ही मौजूद नहीं रहेंगे तो ऐसे आयोजनों का उद्देश्य कैसे पूरा होगा। सरकारी संसाधनों और प्रचार-प्रसार पर खर्च होने के बावजूद आमजन को राहत नहीं मिल रही है। ऐसे में नगर परिषद की कार्यशैली पर सवाल उठना स्वाभाविक है।