NEET 2026 परीक्षा को नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) द्वारा रद्द किए जाने के बाद राजस्थान सहित देशभर के स्टूडेंट्स में भारी नाराजगी देखने को मिल रही है। जयपुर में भी छात्रों का गुस्सा खुलकर सामने आया। अभ्यर्थियों ने कुछ कोचिंग और इंस्टीट्यूट्स पर मिलीभगत के आरोप लगाते हुए कहा कि पेपरलीक जैसी घटनाओं ने मेहनती छात्रों का भरोसा तोड़ा है। स्टूडेंट्स ने दैनिक भास्कर को अपनी पीड़ा बताते हुए कहा कि परीक्षा रद्द होने से उन पर दोबारा तैयारी का आर्थिक बोझ बढ़ गया है, वहीं लगातार तनाव और अनिश्चितता के कारण मानसिक दबाव भी बढ़ता जा रहा है। उन्होंने दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई और पारदर्शी जांच की मांग की। दरअसल, 3 मई को राजस्थान के 27 जिलों के 611 परीक्षा केंद्रों पर करीब 2 लाख विद्यार्थियों ने NEET 2026 परीक्षा दी थी। परीक्षा रद्द होने के बाद छात्रों और अभिभावकों में निराशा और आक्रोश का माहौल है। दोबारा तैयारी करना मानसिक-आर्थिक रूप से मुश्किल अलवर की छात्रा साक्षी खटाणा ने बताया कि वह जयपुर में किराये का कमरा लेकर तैयारी कर रही थी। कोचिंग, किराया और अन्य खर्चों में हर साल लाखों रुपए खर्च हो रहे हैं। उन्होंने कहा कि अब दोबारा परीक्षा की तैयारी करना मानसिक और आर्थिक दोनों रूप से मुश्किल हो गया है। धौलपुर के छात्र इशांत शर्मा ने कहा कि पेपर लीक पूरी तरह NTA की विफलता है और इससे छात्रों का मनोबल टूट गया है। छात्रा स्वाती शर्मा ने कहा कि मध्यम वर्गीय परिवारों के लिए NEET की तैयारी करना बेहद महंगा और कठिन होता है। लाखों रुपए खर्च करने और कठिन मेहनत के बाद भी यदि पेपर लीक हो जाए तो छात्रों का भविष्य बर्बाद हो जाता है। लगातार पेपर लीक होने से छात्रों का भरोसा टूटा जयपुर की छात्रा भूमिका ने कहा कि लगातार पेपर लीक होने से छात्रों का भरोसा टूट गया है। उन्होंने कहा कि मेहनत करने के बावजूद यह भरोसा नहीं रह गया कि सही तरीके से चयन होगा। दौसा निवासी छात्र अमित मीणा ने कहा कि उन्होंने दो साल मेहनत की थी और इस बार चयन की उम्मीद थी, लेकिन परीक्षा रद्द होने से उनकी सारी मेहनत बेकार हो गई। पेपरलीक में कुछ इंस्टीट्यूट्स की मिलीभगत छात्र रोहित मीणा ने कहा कि पेपर लीक में कुछ इंस्टीट्यूट्स की मिलीभगत होती है। उन्होंने कहा कि 145 सवाल हूबहू आते है। जिन बच्चों ने मेहनत की उन पर बुरा प्रभाव पड़ा है। हालांकि, जिन स्टूडेंट्स ने पेपर लीक के बाद खुशी जताई थी, अब पेपर रद्द होने के बाद उनको भी धक्का लगा होगा। छात्रा सुनेना तंवर ने कहा कि परीक्षा रद्द करने की बजाय पेपर लीक करने वालों पर सख्त कार्रवाई होनी चाहिए थी। उन्होंने कहा कि ईमानदारी से मेहनत करने वाले छात्रों का सबसे ज्यादा नुकसान हुआ है। छात्रों का कहना है कि यदि सरकार और एजेंसियां परीक्षा प्रणाली को सुरक्षित नहीं बना पाती है, तो मेहनत करने वाले विद्यार्थियों का भविष्य लगातार खतरे में रहेगा। खाचरियावास ने की पेपर लीक माफियाओं पर कार्रवाई की मांग वहीं दूसरी तरफ कांग्रेस नेता और पूर्व मंत्री प्रताप सिंह खाचरियावास ने परीक्षा रद्द होने पर भाजपा सरकार और केंद्र की शिक्षा व्यवस्था पर तीखा हमला बोला। उन्होंने कहा कि यह केवल परीक्षा रद्द होने का मामला नहीं, बल्कि करोड़ों युवाओं के सपनों के टूटने जैसा है। उन्होंने आरोप लगाया कि बार-बार होने वाले पेपर लीक से साबित हो गया है कि देश की शिक्षा व्यवस्था पेपर माफियाओं के कब्जे में है। उन्होंने कहा कि लाखों छात्र-छात्राओं ने दिन-रात मेहनत की, माता-पिता ने कर्ज लेकर बच्चों को कोचिंग दिलाई। लेकिन लापरवाही और भ्रष्ट व्यवस्था ने सब बर्बाद कर दिया। खाचरियावास ने पूरे मामले की सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में निष्पक्ष जांच कराने, पेपर लीक माफिया और उनके संरक्षणकर्ताओं की गिरफ्तारी के साथ दोषियों पर सख्त कार्रवाई की मांग की है।