गुरुवार देर रात मेडिकल प्रवेश परीक्षा नीट-यूजी का रिजल्ट जारी कर दिया गया। रिजल्ट में 10 लाख स्टूडेंट 213 नंबर भी नहीं ला पाए। इस बार कटऑफ में 69 नंबरों की बढ़ोतरी हुई है। रिजल्ट में राजस्थान मूल के दो छात्रों ने टॉप-10 में स्थान हासिल किया है। उपलक्ष्य गोयल ने 714 नंबर के साथ तीसरी रैंक और गौरव सिंह ने 712 नंबर के साथ 9वीं रैंक हासिल की है। वहीं टॉप टेन में 4 स्टूडेंटस ऐसे हैं जिन्होंने कोटा में रहकर या कोटा कोचिंग के अन्य सेंटर पर क्लासरूम कोचिंग ली है। परीक्षा 21 जून को दोपहर 2 बजे से शाम 5 बजे तक ऑफलाइन मोड में आयोजित की गई थी। परीक्षा 13 भाषाओं में हुई, जिसमें देश के सभी 36 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के साथ विदेशों के स्टूडेंट्स ने भी हिस्सा लिया। परीक्षा देश और विदेश के 551 शहरों में बने 5,440 परीक्षा केंद्रों पर कराई गई। राजस्थान के 25 शहरों में इस परीक्षा का आयोजन किया गया था। कटऑफ में 69 नंबरों की बढ़ोतरी एजुकेशन एक्सपर्ट देव शर्मा ने बताया कि इस बार पेपर टफ रहा, लेकिन उसके बाद भी स्टूडेंटस का प्रदर्शन शानदार रहा है। हालांकि इस बार कोई भी स्टूडेंट परफेक्ट स्कोर हासिल नहीं कर सका है। इस बार हाई स्कोर 715 रहा। वहीं क्वालीफाइंग कटऑफ में इस बार 69 नंबरों की बढ़ोत्तरी दर्ज हुई है। साल 2024 कटऑफ 162 नंबर, साल 2025 में 144 नंबर और साल 2026 में 213 नंबर रही है। दस लाख स्टूडेंटस हासिल नहीं कर पाए कटऑफ नंबर री-नीट में स्टूडेंटस की ओर से हासिल किए गए नंबरों का विश्लेषण करने पर सामने आया कि करीब दस लाख स्टूडेंटस कटऑफ नंबर पर भी नहीं पहुंचे। यानी 720 में से 213 नंबर भी हासिल नहीं कर पाए। 700 से ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंटस की संख्या 19 है। 650 से ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंटस की संख्या 1492, 600 से ज्यादा नंबर पर 10160 और 500 से ज्यादा नंबर लाने वाले स्टूडेंटस की संख्या 90780 रही है। कोटा कोचिंग के चार स्टूडेंटस टॉप टेन में शामिल परिणामों में एक बार फिर कोटा कोचिंग ने परचम लहराया है। हालांकि कोटा से पहली रैंक की उम्मीद थी, लेकिन टाई सिस्टम लगने के चलते कोटा कोचिंग से जुडे स्टूडेंट की दूसरी रैंक रही। परिणामों में आर्यन गुप्ता और पंशुल बंसल ने संयुक्त रूप से 720 में से 715 अंक हासिल किए हैं। टाइब्रेकर रूल की प्राथमिकता के आधार पर आर्यन गुप्ता को आल इंडिया रैंक 1 और पंशुल बंसल को ऑल इंडिया रैंक दो मिली है। आर्यन गुप्ता कोटा कोचिंग से डिस्टेंस लर्निंग से जुड़े थे, तो पंशुल बंसल ने कोटा कोचिंग के दिल्ली सेंटर पर रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट के रूप में दो साल पढ़ाई की है। इसके साथ ही कोटा में पढे़ आयुष बालोटिया ने 710 नंबर हासिल कर आल इंडिया रैंक चार हासिल की है। क्लासरूम स्टूडेंट गौरव सिंह ने आल इंडिया रैंक 9 हासिल की है। 2027 से कंप्यूटर आधारित होगी परीक्षा पेपर लीक के बाद सरकार ने नीट परीक्षा में बड़ा बदलाव करने का फैसला लिया है। 2027 से नीट यूजी कंप्यूटर बेस्ड टेस्ट (CBT) यानी ऑनलाइन मोड में आयोजित की जाएगी। फिलहाल परीक्षा ऑफलाइन (पेन-एंड-पेपर) मोड में होती है। नई व्यवस्था में स्टूडेंट्स कंप्यूटर पर सवाल हल करेंगे। हालांकि, सिलेबस, प्रश्नों की संख्या, विषय और मार्किंग स्कीम में कोई बदलाव नहीं होगा। उम्मीदवारों को ऑनलाइन परीक्षा के लिए पहले से मॉक टेस्ट और डेमो की सुविधा भी दी जाएगी, ताकि वे नए सिस्टम के अनुसार तैयारी कर सकें। पंशुल ने कहा- सफलता के लिए पेशन होना जरूरी मूल रूप से फरीदाबाद के रहने वाले पंशुल बंसल ने ऑल इंडिया दो रैंक हासिल की है। उसके पिता संजीव कुमार बंसल व्यापारी हैं और मां मोनिका बंसल एक संस्थान में सीएस हैं। पंशुल का शुरुआत से लक्ष्य निर्धारित था कि नीट क्रेक कर डॉक्टर बनना है। वह जेईई मेन 2026 में भी शामिल हुआ था। जिसमें उसने 99.5 परसेन्टाइल स्कोर किए थे। पंशुल ने बताया कि मैंने यहां तक पहुंचने के लिए काफी मेहनत की है। मेरे पेरेन्ट्स ने कॅरियर के मामले में मुझे कभी प्रेशराइज नहीं किया। 10वीं क्लास के बाद मेरे सामने कई सारे ऑप्शंस थे, लेकिन शुरू से ही बायोलॉजी में रूचि थी। 7वीं में आते-आते डिसीजन ले लिया था कि मुझे साइंस लेनी है और डॉक्टर बनना है। कोचिंग में फैकल्टीज का सपोर्ट काफी मिलता था। हमें एडवांस् लेवल पर पढ़ाया जाता था, ताकि नीट जैसे एग्जाम के लेवल का हम आसानी से सामना कर सकें। उसने बताया कि सामान्यतया स्टूडेंट्स थ्योरी पर ज्यादा फोकस करते हैं, लेकिन मैं थ्योरी पर उतना ज्यादा फोकस नहीं करता था। रीक्रिएशन के लिए म्यूजिक सुनता हूं। रिलेक्स होने के लिए यूटयूब शॉटर्स देखता था आयुष एसआईआर 4 पर रहे आयुष मूल रूप से नवादा बिहार के रहने वाले हैं। आयुष ने कोटा में रहकर नीट की तैयारी की है। पिता सुनील कुमार का बिजनेस है। आयुष अपने परिवार ही नहीं बल्कि अपने गांव का भी पहला डॉक्टर बनने जा रहा है। आयुष ने 10वीं में 96.2 और 12वीं कक्षा में 93.8 प्रतिशत नंबर हासिल किए थे। आयुष की उपलब्धि से उनके परिवार सहित पूरे गांव वरीसालीगंज में खुशी का माहौल है। आयुष ने बताया कि बचपन से ही मेरा सपना डॉक्टर बनकर लोगों की सेवा करने का था। नियमित पढ़ाई, नीट की गहन तैयारी, लगातार रिवीजन और नियमित टेस्ट मेरी सफलता की सबसे बड़ी वजह रहे। मेरा मानना है कि हर टेस्ट के बाद अपनी गलतियों का विश्लेषण करना और उन्हें सुधारना बेहद जरूरी है। आयुष ने बताया कि 6 से 7 घंटे वह सेल्फ स्टडी करते थे। सुबह के समय पढ़ाई को ज्यादा समय दिया है। साथ ही खुद को रिलेक्स करने के लिए मोबाइल भी चलाते थे। मोबाइल पर यूटयूब शॉर्टस देखना पंसद है। आयुष ने बताया कि जब नीट रद्द हुआ, उस समय स्कोर 695 बन रहा था, इस बार नंबर और बढ़ गए। पेपर रद्द हुआ तो टेंशन नहीं थी क्योंकि तैयारी पूरी थी। सिर्फ वो किया जो फैकल्टीज ने कहा मूल रूप से अलवर के रहने वाले गौरव सिंह ने ऑल इंडिया रैंक 9 हासिल की है। गौरव के पिता राजेश कुमार आर्मी में हैं। कोटा में रेगुलर क्लासरूम स्टूडेंट गौरव ने बताया कि मेरी मां सीमा देवी मेरे और मेरी बहन के साथ कोटा में रहकर हमारी पढ़ाई का पूरा ध्यान रखती थीं। उन्होंने हर परिस्थिति में हमारा हौसला बढ़ाया। नीट की तैयारी के दौरान मैंने डेली क्लास अटेंड की, एनसीईआरटी को कई बार पढ़ा। कंटीन्यू रिवीजन किया और टेस्ट को पूरी गंभीरता से दिया। स्मार्ट फोन यूज करता था, लेकिन उसका मिसयूज नहीं करता था। क्लासरूम के अलावा 7-8 घंटे सेल्फ स्टडी करता था। टीचर्स ने जो बताया, जो गाइड किया मैंने वैसे ही किया। पूरी रात पढ़ाई करता था, दोपहर में क्लास लेता था मूल रूप से कोटा के रहने वाले कार्तिक ने ऑल इंडिया 16 रैंक हासिल की है। कार्तिक ने बताया कि वह रात को पढ़ाई को प्राथमिकता देते थे। सेल्फ स्टडी के लिए वह रात को साढे नौ- दस बजे से सुबह चार से पांच बजे पढ़ते थे। दोपहर में कोचिंग के बाद शाम को पावर नेप लेता और फिर रात को पढाई का वही शेडयूल रहता है। उसके पिता इंजीनियर हैं और उन्होंने भी कोटा में ही इंजीनियिरंग की तैयारी और पढाई की थी। खुद को रिलेक्स करने के लिए फुटबॉल खेलते थे।