उच्च शिक्षा के लिए छात्रों को विदेश भेजने के उद्देश्य से शुरू की गई राज्य सरकार की स्कॉलरशिप योजना अब लगातार भारतीय संस्थानों की ओर शिफ्ट हो रही है। 2021 में कांग्रेस सरकार ने विदेश के प्रतिष्ठित संस्थानों में पढ़ाई के लिए राजीव गांधी स्कॉलरशिप योजना शुरू की थी। तब 200 सीटें थीं। 2023 में 500 की गई। बाद में सरकार बदली और योजना का नाम स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप कर दिया। इसके साथ ही 500 ​सीटों में से 200 सीटें स्वदेशी संस्थानों और 300 विदेशी संस्थानों की कर दी गई। इसके बाद से योजना में सीटों की संख्या तो बढ़ी, लेकिन विदेशी संस्थानों की सीटें लगातार घट रही हैं। इस बार विदेशी संस्थानों की सीटें घटाकर 100 और भारतीय संस्थानों की बढ़ाकर 600 कर दी गई हैं। अब तक उच्च शिक्षा विभाग इस योजना पर 430 करोड़ रुपए से अधिक खर्च कर चुका है। सरकार ने दायरे का भी विस्तार किया है। अब मेडिकल, एग्रीकल्चर, आर्किटेक्चर, लॉ और मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थी भी इस योजना का लाभ ले सकेंगे। आय के आधार पर 3 श्रेणियां; योजना में प्रवेश के लिए 8 लाख तक, 8 से 25 लाख और 25 लाख रुपए से अधिक वार्षिक आय वाले परिवारों की तीन श्रेणियां हैं। वर्तमान सरकार 8 लाख से अधिक आय वर्ग के लिए ट्यूशन फीस सहायता में कटौती कर चुकी है। 8 से 25 लाख रुपए आय वर्ग के लिए 15% और 25 लाख से अधिक आय वर्ग के लिए 30% तक ट्यूशन फीस सहायता कम की थी। 2021 में कांग्रेस सरकार ने राजीव गांधी के नाम से शुरू की थी योजना पिछली कांग्रेस सरकार ने 2021 में राजीव गांधी स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस के नाम से योजना शुरू की थी। विदेश में अध्ययन के लिए 200 सीटें थीं। 2023 में सीटें 500 की गईं। 2024 में 300 सीटें विदेश और 200 भारतीय संस्थानों के लिए निर्धारित की। 2025 में भारती में 350 और विदेशी संस्थानों की 150 सीटें कर दी। अब योजना का नाम स्वामी विवेकानंद स्कॉलरशिप फॉर एकेडमिक एक्सीलेंस है और 600 सीटें भारतीय तथा 100 सीटें विदेशी संस्थानों के लिए निर्धारित की हैं।