प्रदेश के दूर-दराज और अभावग्रस्त जिलों में डॉक्टरों व पैरामेडिकल स्टाफ की कमी दूर करने के लिए राज्य सरकार नई ट्रांसफर पॉलिसी लागू करने की तैयारी में है। 16 अप्रैल को चिकित्सा मंत्री स्तर पर मंथन के बाद यह पॉलिसी अंतिम चरण में पहुंच चुकी है और अब मुख्यमंत्री की मंजूरी शेष है। पॉलिसी लागू होने पर टीएसपी और मरुस्थलीय क्षेत्रों में कार्यरत कार्मिकों को बड़ा आर्थिक प्रोत्साहन मिलेगा। इन क्षेत्रों के 19 जिलों को अभावग्रस्त श्रेणी में रखा गया है, जहां दो साल सेवा पूरी करने पर बेसिक वेतन पर 5 से 15% तक अतिरिक्त इंसेंटिव दिया जाएगा। इस पहल का उद्देश्य ग्रामीण क्षेत्रों में लंबे समय से बनी स्टाफ की कमी को दूर करना है, जिससे मरीजों को समय पर उपचार मिल सके। वर्तमान में प्रदेश में 18 हजार स्वीकृत पदों के मुकाबले करीब 15,500 डॉक्टर कार्यरत हैं, जबकि 930 डॉक्टर एपीओ चल रहे हैं। इंसेंटिव का गणित - टीएसपी-मरुस्थलीय क्षेत्रों को ज्यादा प्रोत्साहन इंसेंटिव का गणित भी क्षेत्र के अनुसार तय किया गया है। टीएसपी जोन में बांसवाड़ा, डूंगरपुर, प्रतापगढ़, उदयपुर, सलूंबर, चित्तौड़गढ़, पाली, सिरोही और राजसमंद जिलों के डॉक्टरों व स्टाफ को अधिक प्रोत्साहन मिलेगा, जहां एमबीबीएस डॉक्टर और पैरामेडिकल स्टाफ को 10% तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों को 15% इंसेंटिव दिया जाएगा। इसी तरह मरुस्थलीय जोन में जैसलमेर, बाड़मेर, बीकानेर, चूरू, नागौर, फलोदी और जालौर जिलों के लिए भी यही दर लागू रहेगी। जबकि अन्य जिलों-बारां, बूंदी और झालावाड़ में एमबीबीएस और पैरामेडिकल स्टाफ को 5% तथा विशेषज्ञ चिकित्सकों को 10% इंसेंटिव दिया जाएगा। रिवॉर्ड का प्रावधान सीएमएचओ डॉ. अशोक आदित्य ने बताया कि कठिन भौगोलिक परिस्थितियों के कारण डॉक्टर आसानी से तैयार नहीं होते हैं। विभाग ने इस बार रिवॉर्ड का प्रावधान किया है। जहां सर्वाधिक पद खाली हैं, वहां के लिए विशेष प्रोत्साहन का प्रावधान भी ट्रांसफर पॉलिसी में जोड़ा गया है। इससे न केवल खाली पद भरेंगे, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता भी सुधारेगी।