सुखाड़िया विश्वविद्यालय (सुविवि) में स्थायी कुलगुरु की तलाश अंतिम चरण में है। दो महीनों से चल रही चयन प्रक्रिया के बाद राज्यपाल हरिभाऊ बागड़े की बनाई 4 सदस्यों वाली सर्च कमेटी ने आवेदनों की छंटनी (स्क्रूटनी) का काम पूरा कर लिया है। आधिकारिक सूत्रों के अनुसार कमेटी ने दो दौर की महत्वपूर्ण बैठकों के बाद देशभर के 70 से अधिक आवेदकों में से 5 वरिष्ठ शिक्षाविदों के नाम शॉर्टलिस्ट किए हैं। घोषणा अप्रैल अंत तक संभव है। इन चयनित नामों का पैनल अब बंद लिफाफे में राजभवन भेजा जाएगा। प्रक्रिया के अनुसार राज्यपाल इन नामों में से एक उपयुक्त नाम मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा के पास भेजेंगे। अंततः मुख्यमंत्री और राज्यपाल की सहमति के बाद ही सुविवि के अगले कैप्टन के नाम की आधिकारिक घोषणा होगी। इस बार चयन की यह कवायद इसलिए भी सुर्खियों में है, क्योंकि दिल्ली के बड़े संस्थानों से लेकर जयपुर के सत्ता गलियारों तक कई दिग्गजों ने लॉबिंग तेज कर दी है। मेवाड़ बनाम बाहरी... क्या इस बार लोकल को मिलेगा मौका? सुविवि के अंदर-बाहर सबसे बड़ी चर्चा स्थानीय बनाम बाहरी चेहरा को लेकर है। पिछले दो कुलगुरु उत्तर प्रदेश से आए थे और दोनों का कार्यकाल विवादों और जांचों के साये में समय से पहले ही समाप्त हो गया। इससे मेवाड़ के शिक्षाविदों में रोष है। स्थानीय दावेदारों ने आवेदन कर मांग की है कि मेवाड़ की प्रतिभा और यहां की भौगोलिक-सांस्कृतिक समझ रखने वाले को कमान दी जाए। हालांकि प्रदेश के दूसरे विश्वविद्यालयों में हाल ही हुई नियुक्तियों पर गौर करें तो सरकार ने मैरिट को प्राथमिकता देते हुए अमूमन दूसरे संभागों या राज्यों के विशेषज्ञों को चुना है। ऐसे में स्थानीय दावेदारों की धड़कनें बढ़ी हुई हैं। प्रो. सारस्वत के नाम की चर्चा कुलगुरु चयन के लिए राज्यपाल ने अनुभवी टीम तैनात की है। गोविंद गुरु जनजातीय विवि के पूर्व कुलपति प्रो. कैलाश सोडाणी को इसका कन्वीनर बनाया गया है। कमेटी में प्रो. अमी उपाध्याय (यूजीसी नॉमिनी), जेएनवीयू के कुलपति प्रो. पवन कुमार शर्मा और वेटरनरी विवि के कुलपति प्रो. त्रिभुवन शर्मा शामिल हैं। कमेटी को अधिकार है कि वह उन नामों पर भी विचार कर सकती है, जिन्होंने आवेदन नहीं किया है, लेकिन वे पद के लिए अति योग्य हैं। इसके चलते वर्तमान कार्यवाहक कुलगुरु प्रो. सारस्वत के नाम की सुगबुगाहट तेज है। हालांकि प्रो. सारस्वत ने आवेदन करने से इनकार किया है।