जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (NIA) के वाइस चांसलर प्रो. संजीव शर्मा ने कहा- यह समझना जरूरी है कि आजकल बीमारियां क्यों बढ़ रही हैं। इसका बड़ा कारण हमारी बिगड़ी हुई लाइफस्टाइल है। हमारा खान-पान सही नहीं है। सोने और उठने का समय तय नहीं है। क्या खाना है, कब खाना है और कितना खाना है। इसका भी ध्यान नहीं रखा जाता। देर रात तक जागना, देर से खाना और फास्ट फूड का ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत, पाचन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। NIA के वाइस चांसलर प्रो. संजीव शर्मा ने दैनिक भास्कर से खास बातचीत में यह कहा। प्रो. संजीव शर्मा ने 23 सितंबर को आयुर्वेद दिवस के मौके पर कहा- मोटापा, डायबिटीज और दूसरी लाइफस्टाइल से जुड़ी बीमारियां बढ़ रही हैं। आयुर्वेद में खान-पान, नींद, दिनचर्या और मौसम के अनुसार जीवनशैली को लेकर पहले से सिद्धांत दिए गए हैं। इनका पालन करके ऐसी कई बीमारियों से बचाव किया जा सकता है। इस साल 11वें आयुर्वेद डे की थीम ‘Ayurveda for Healthier Tomorrow’ है। NIA आधुनिक टेक्नोलॉजी और डायग्नोस्टिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रहा है। संस्थान में एडवांस सिमुलेशन लैब, वर्चुअल रियलिटी लैब, ड्रग डिस्कवरी यूनिट और क्लिनिकल लैब जैसी सुविधाएं हैं। इनका इस्तेमाल मरीजों के इलाज के साथ स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग और रिसर्च में भी किया जा रहा है। सवाल: इस बार आयुर्वेद दिवस की थीम ‘Ayurveda for Healthier Tomorrow’ है। आने वाले समय में आयुर्वेद की क्या भूमिका रहेगी? प्रो. संजीव शर्मा: विश्व में बीमारियां बढ़ रही हैं। इसका असर व्यक्ति, परिवार और समाज सभी पर पड़ता है। आयुर्वेद में ऐसे सिद्धांत हैं, जिनका पालन करके हम खुद को स्वस्थ रख सकते हैं। हमारा स्वस्थ रहना भी जरूरी है, क्योंकि अगर हम स्वस्थ रहेंगे तो परिवार की देखभाल कर पाएंगे। अपना काम बेहतर तरीके से कर पाएंगे। आने वाली पीढ़ी स्वस्थ रहे, इसके लिए आयुर्वेद की पद्धति को अपनाना जरूरी है। सवाल: आज टेक्नोलॉजी और आधुनिक जांच का इस्तेमाल बढ़ रहा है। इससे NIA में आयुर्वेद को कैसे जोड़ा जा रहा है? प्रो. संजीव शर्मा: आयुर्वेद के सिद्धांत बहुत अच्छे हैं। जरूरत इसकी है कि इन्हें आज के समय के हिसाब से इस्तेमाल किया जाए। इसके लिए हम आधुनिक टेक्नोलॉजी और डायग्नोस्टिक सिस्टम का इस्तेमाल कर रहे हैं। मरीजों के इलाज के साथ स्टूडेंट्स की ट्रेनिंग में भी नई टेक्नोलॉजी का उपयोग हो रहा है। NIA में एडवांस सिमुलेशन लैब, वर्चुअल रियलिटी लैब, ड्रग डिस्कवरी यूनिट और क्लिनिकल लैब जैसी सुविधाएं हैं। इससे इलाज, रिसर्च और पढ़ाई में काफी मदद मिल रही है। टेक्नोलॉजी को अपनाते हैं, लेकिन आयुर्वेद के मूल सिद्धांतों से समझौता नहीं करते। सवाल: मोटापा और डायबिटीज जैसी बीमारियां तेजी से बढ़ रही हैं। आयुर्वेद इसमें किस तरह मदद कर सकता है? प्रो. संजीव शर्मा: आयुर्वेद में डाइट और लाइफस्टाइल को लेकर स्पष्ट सिद्धांत दिए गए हैं। अगर हम उनका पालन करें तो मोटापा, डायबिटीज जैसी लाइफस्टाइल से जुड़ी कई बीमारियों को काफी हद तक रोका जा सकता है। सवाल: आम व्यक्ति अपनी जिंदगी में आयुर्वेद को अपनाना चाहे तो उसे किन बातों का ध्यान रखना चाहिए? प्रो. संजीव शर्मा: खान-पान पर सबसे ज्यादा ध्यान देना चाहिए। सिर्फ यह जरूरी नहीं है कि हम क्या खा रहे हैं, बल्कि कब, कितना और किस तरह खा रहे हैं, यह भी महत्वपूर्ण है। अच्छा और पौष्टिक खाना भी अगर सही समय पर नहीं खाया जाए तो नुकसान कर सकता है। देर रात तक जागना, देर से खाना और फास्ट फूड का ज्यादा इस्तेमाल हमारी सेहत, पाचन और मेटाबॉलिज्म को प्रभावित करता है। इसका असर लीवर पर भी पड़ सकता है। आगे चलकर मोटापा, डायबिटीज और महिलाओं में हार्मोनल बीमारी (PCOD) जैसी समस्याएं हो सकती हैं। हमें नींद, खाने का समय, मौसम के हिसाब से खान-पान और रोज की फिजिकल एक्टिविटी का भी ध्यान रखना चाहिए। सवाल: NIA में होने वाली रिसर्च का फायदा आम मरीजों तक कैसे पहुंच रहा है? प्रो. संजीव शर्मा: हमारा उद्देश्य रिसर्च करने के साथ उसका फायदा मरीजों तक पहुंचाना भी है। NIA में कई बीमारियों पर रिसर्च की गई है। इसका लोग फायदा उठा रहे हैं। उदाहरण के तौर पर हमारे संस्थान में डायबिटीज पर इस्तेमाल होने वाली एक औषधि तैयार की गई है। हालांकि किसी भी औषधि का इस्तेमाल डॉक्टर की सलाह से ही करना चाहिए। इसके अलावा कई औषधियों और इलाज पर रिसर्च हुई है, जिनका फायदा सीधे मरीजों को मिल रहा है। सवाल: आप NIA से करीब 10 साल से जुड़े हैं। इस दौरान कौन-सा बदलाव रहा, जिसे सबसे बड़ी उपलब्धि मानते हैं? प्रो. संजीव शर्मा: ये 10 साल की यात्रा सुखद रही। मेरे लिए सबसे बड़ी उपलब्धियों में से एक राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान को विश्वविद्यालय का दर्जा मिलना है। इसका लोकार्पण प्रधानमंत्री ने किया। इसके अलावा हरियाणा के पंचकूला में इसी तरह के संस्थान की स्थापना भी महत्वपूर्ण उपलब्धि रही। ये दोनों उपलब्धियां मेरे लिए खास हैं। सवाल: विदेशों में भी आयुर्वेद को लेकर रुचि बढ़ रही है। NIA इसे दूसरे देशों तक पहुंचाने के लिए क्या कर रहा है? प्रो. संजीव शर्मा: दुनिया में अब आयुर्वेद की पहचान बढ़ रही है। लोग इसे अपनाने में रुचि दिखा रहे हैं। NIA में विदेशी छात्रों के लिए शिक्षा और ट्रेनिंग की व्यवस्था है। इस समय करीब 15 देशों के 80 छात्र यहां आयुर्वेद की शिक्षा ले रहे हैं। ये छात्र आगे अपने-अपने देशों में आयुर्वेद को बढ़ावा देने में भूमिका निभा रहे हैं। इसके अलावा भारत सरकार और आयुष मंत्रालय के माध्यम से कई देशों के साथ समझौते किए गए हैं। ट्रेनिंग प्रोग्राम और दूसरी गतिविधियों के जरिए भी आयुर्वेद को विदेशों तक पहुंचाने का काम किया जा रहा है। आयुर्वेद सिर्फ भारतीय परंपरा नहीं है, बल्कि आज की वैश्विक जरूरत भी बन सकता है।