जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी के तीन दिवसीय ओरिएंटेशन प्रोग्राम 'ओरिएंट 2026' के दूसरे दिन उदयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य निवृत्ति कुमारी मेवाड़ स्टूडेंट्स से रूबरू हुई। निवृत्ति कुमारी ने स्टूडेंट्स से कहा कि दुनिया की कोई भी भाषा सीखने में संकोच नहीं होना चाहिए लेकिन अपनी मातृभाषा और संस्कृति को कभी नहीं छोड़ना चाहिए। उन्होंने राजस्थानी में कहा कि 'विदेसी भाषा सीखजो, पण मायड़ भासा कदे मत छोड़जो।' उन्होंने कहा- भाषा केवल संवाद का माध्यम नहीं, बल्कि हमारी पहचान, संस्कृति और विरासत का आधार होती है। वैश्विक बनने के साथ-साथ अपनी जड़ों से जुड़े रहना ही वास्तविक सफलता है। निवृत्ति कुमारी मेवाड़ से जेईसीआरसी यूनिवर्सिटी की डायरेक्टर–पीपल एंड कल्चर ध्रुवी अग्रवाल ने संवाद किया। दोनों ने स्टूडेंट्स से नेतृत्व, चरित्र निर्माण, शिक्षा, महिला सशक्तिकरण, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भारतीय संस्कृति जैसे विषयों पर खुलकर बातचीत की। निवृत्ति कुमारी मेवाड़ उदयपुर के पूर्व राजपरिवार की सदस्य, डॉ. लक्ष्यराज सिंह मेवाड़ की पत्नी और ओडिशा के बलांगीर राजपरिवार की राजकुमारी हैं। संस्कार और चरित्र ही सबसे बड़ी पूंजी निवृत्ति कुमारी ने मेवाड़ की सेवा, त्याग और साहस की परंपरा का उल्लेख करते हुए कहा कि कॉलेज जीवन केवल स्वतंत्रता का नहीं, बल्कि जिम्मेदारी का भी समय होता है। यहां लिए गए निर्णय ही भविष्य का निर्माण करते हैं। उन्होंने स्टूडेंट्स से परिवार से मिले संस्कार, नैतिक मूल्यों और अनुशासन को जीवनभर साथ रखने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि सच्चा नेतृत्व पद या शक्ति से नहीं, बल्कि सेल्फलेस सर्विस और सैक्रिफाइस से बनता है। एआई कभी इंसानी संवेदनाओं की जगह नहीं ले सकता स्विट्जरलैंड में शिक्षा और अपने उद्यमिता अनुभव साझा करते हुए उन्होंने कहा कि तकनीक तेजी से बदल रही है और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जीवन का हिस्सा बन चुका है, लेकिन कोई भी तकनीक इंसानी भावनाओं, संवेदनाओं और सहानुभूति का स्थान नहीं ले सकती। उन्होंने विद्यार्थियों से मानसिक स्वास्थ्य का ध्यान रखने, अच्छे मित्र चुनने और लगातार सीखते रहने की सलाह दी। ध्रुवी अग्रवाल ने कहा कि विश्वविद्यालय का उद्देश्य केवल डिग्री देना नहीं, बल्कि ऐसे जिम्मेदार नागरिक तैयार करना है जो समाज में सकारात्मक बदलाव ला सकें। उन्होंने कहा किडिग्री आपको नौकरी दिला सकती है, लेकिन मजबूत व्यक्तित्व ही आपकी स्थायी पहचान और लेगेसी बनाता है। जयंत मुंधड़ा ने दिया करियर सक्सेस का मंत्र फाइनेंशियल एजुकेटर और कंटेंट क्रिएटर जयंत मुंधड़ा ने युवाओं को बदलती प्रोफेशनल दुनिया के लिए तैयार रहने की सलाह देते हुए कहा कि करियर की शुरुआत में किसी एक विकल्प तक सीमित नहीं रहना चाहिए। उन्होंने कहा कि एक्सपेरिमेंट, नई स्किल्स सीखना और पेशेंस ही सफल करियर की सबसे बड़ी कुंजी है। स्टूडेंट्स लगातार नई चीजें सीखें, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस का सकारात्मक उपयोग करें, असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सीखें और धैर्य के साथ अपने लक्ष्य की ओर बढ़ते रहें। लिंक्डइन स्ट्रैटेजिस्ट एवं पर्सनल ब्रांडिंग एक्सपर्ट मीती शाह और एआई कंटेंट क्रिएटर यशिका साधवानी ने विद्यार्थियों को डिजिटल युग में उभरते अवसरों से परिचित कराया। उन्होंने बताया कि आज केवल सोशल मीडिया पर मौजूद रहना पर्याप्त नहीं है। मजबूत पहचान मौलिक सोच, निरंतर सीखने और सार्थक कंटेंट के माध्यम से बनती है। उन्होंने युवाओं को अपनी रचनात्मकता और कौशल को आत्मविश्वास के साथ दुनिया के सामने प्रस्तुत करने का संदेश दिया। एलुमनाई ने साझा किए संघर्ष और सफलता के अनुभव कार्यक्रम के एलुमनाई इंटरैक्शन सत्र में विश्वविद्यालय के पूर्व विद्यार्थियों ने कैंपस जीवन से लेकर कॉर्पोरेट और प्रोफेशनल दुनिया तक की अपनी यात्रा साझा की। उन्होंने विद्यार्थियों को बताया कि कॉलेज का हर अनुभव भविष्य की दिशा तय करता है और सीखने का कोई भी अवसर छोटा नहीं होता। पूर्व विद्यार्थियों ने करियर विकल्प, उच्च शिक्षा, इंडस्ट्री की चुनौतियों और बदलते रोजगार बाजार पर भी विस्तार से चर्चा की।