दुनिया के खेल मंच पर तिरंगा लहराकर देश का मान बढ़ाने वाले राजस्थान के पांच दिग्गज पैरा खिलाड़ी आज अपने ही सिस्टम के सामने न्याय की गुहार लगा रहे हैं। छह साल से वन विभाग में एसीएफ पद पर नौकरी कर रहे इन खिलाड़ियों की सेवा स्थायी नहीं हुई है। बार-बार विभाग और सरकार के चक्कर लगाने के बावजूद समाधान नहीं मिलने से आहत खिलाड़ियों ने अब अपने पद्मश्री, मेजर ध्यानचंद खेल रत्न, अर्जुन अवॉर्ड के साथ पैरालंपिक, एशियन गेम्स और विश्व कप के पदक भी सरकार को लौटाएंगे। यह चेतावनी शुक्रवार को सुंदर गुर्जर, कृष्णा नागर, संदीप मान, दिव्यांश, अवनी लेखरा व निशा कंवर ने साझा बयान में दी। अपने ही सिस्टम से न्याय नहीं मिल रहा खिला​ड़ियों ने कहा तीन साल से मुख्यमंत्री से मिलने का समय मांग रहे हैं। उन्होंने अंतरराष्ट्रीय स्तर पर देश को पदक दिलाए, लेकिन अपने हक के लिए संघर्ष करना पड़ रहा है। अवनी और कृष्णा नागर ने हाल ही में जापान में पैरा एशियन गेम्स में भी पदक जीता है। खिलाड़ियों ने सरकार से 10 दिन में समाधान की मांग की है। उनका कहना है कि वन विभाग में सेवा स्थायी नहीं की जा सकती तो उन्हें आरएएस या एसडीएम जैसी सेवाओं में समायोजित करें। वे एसीएफ जैसे प्रशासनिक पद पर जिम्मेदारी निभाने में सक्षम हैं। समाधान नहीं होने पर उन्होंने धरने पर बैठने और सभी सम्मान व पदक लौटाने की भी बात कही। गौरतलब है कि शनिवार को मुख्यमंत्री आवास पर ‘सपनों की उड़ान, असंभव कुछ नहीं’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री विशेष योग्यजनों से संवाद करेंगे। ऐसे में इन खिलाड़ियों का दर्द एक सवाल बनकर खड़ा है।