प्रदेश में प्रदूषण कम करने और इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने की दिशा में राजस्थान सरकार ने बड़ा कदम उठाया है। अब पुरानी पेट्रोल और डीजल गाड़ियों में इलेक्ट्रिक रेट्रोफिटमेंट किट लगवाकर उन्हें ई-व्हीकल में बदला जा सकेगा। परिवहन एवं सड़क सुरक्षा विभाग ने इसके लिए विस्तृत दिशा-निर्देश जारी कर दिए हैं, जिसके तहत अब गाड़ी की बॉडी वही रहेगी, लेकिन इंजन की जगह बैटरी और इलेक्ट्रिक मोटर ले लेगी। परिवहन विभाग के आदेशानुसार, वाहन में किसी भी तरह का ईंधन परिवर्तन कराने से पहले वाहन स्वामी को मोटर वाहन अधिनियम की धारा 52 के तहत पंजीयन प्राधिकारी से पूर्व अनुमति लेना अनिवार्य होगा। किट लगवाने के बाद 14 दिनों के भीतर वाहन के आरसी में इस बदलाव का इंद्राज कराना होगा। बिना अनुमति के किया गया कोई भी बदलाव अवैध माना जाएगा।वहीं, परिवहन विभाग के अफसरों का कहना है कि इसके लागू होने के बाद 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को डी-रजिस्टर्ड नहीं किया जाएगा, बल्कि उनमें इलेक्ट्रिक किट लगवाकर उनकी उम्र बढ़ाई जा सकेगी। दो साल में 24 हजार वाहन हुए डी-रजिस्टर्ड केवल मान्यता प्राप्त किट का ही होगा इस्तेमाल जिला परिवहन अधिकारी अभय मुदगल ने बताया कि राज्य सरकार ने सुरक्षा मानकों को प्राथमिकता देते हुए स्पष्ट किया है कि केवल उन्हीं किट का उपयोग किया जा सकेगा, जिन्हें केंद्रीय जांच एजेंसियों (जैसे ARAI/ICAT) से ''टाइप अप्रूवल'' मिला हुआ हो। साथ ही, यह फिटमेंट केवल उन्हीं केंद्रों पर कराया जा सकेगा, जिन्हें जिला परिवहन अधिकारी द्वारा अधिकृत किया गया हो। वर्कशॉप के लिए भी मानक तय रेट्रोफिटमेंट सेंटर खोलने के लिए सरकार ने कड़े नियम बनाए हैं। कार्यशाला का क्षेत्रफल कम से कम 450 वर्ग फुट होना चाहिए और वहां अग्नि सुरक्षा के पुख्ता इंतजाम होने चाहिए। तकनीकी स्टाफ के लिए भी योग्यता तय की गई है, जिसके तहत वर्कशॉप पर कम से कम एक आईटीआई प्रशिक्षित होना जरूरी होगा। वर्ष 2025 में 19,824 और 2026 के तीन महीनों में 4,103 वाहन डी-रजिस्टर्ड एनसीआर के नियमों के तहत भरतपुर में पुराने वाहनों पर सख्ती लगातार जारी है। तय अवधि पूरी होने पर 10 साल पुराने डीजल और 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों को डी-रजिस्टर्ड किया जा रहा है, जिससे बड़ी संख्या में वाहन सड़कों से बाहर हो चुके हैं। जानकारी के अनुसार वर्ष 2026 में 10 साल पुराने डीजल वाहनों में जनवरी में 205, फरवरी में 215 और मार्च में 271, कुल 691 वाहन डी-रजिस्टर्ड किए गए। वहीं 15 साल पुराने पेट्रोल वाहनों में जनवरी में 792, फरवरी में 1293 और मार्च में 1327, कुल 3412 वाहन रजिस्ट्रेशन से बाहर किए गए।