अब दोस्ती भी चाकू की धार पर टिक गई है। बाइक को धक्का लगाने की मामूली कहासुनी में एक दोस्त ने दूसरे की चाकू मारकर निर्मम हत्या कर दी। थानाधिकारी गजवीर सिंह ने बताया कि सवीना खेड़ा निवासी छात्र दिनेश मीणा (23) डाकन कोटड़ा स्थित वागड़ नर्सिंग कॉलेज में सेकंड ईयर का छात्र था। उसकी बाइक का क्लच वायर टूट गया था। वह बुधवार शाम 5 बजे घर से बाइक ठीक कराने के लिए निकला था। फिर दोस्त ललित गमेती व एक अन्य साथी के साथ सेक्टर-14 गया। इस बीच रात 9 बजे मां सूरज देवी ने उसे फोन कर पूछा कि घर कब आओगे। दिनेश ने कुछ देर में आने की बात कही। रात 10 बजे तीनों दोस्त घर लौट रहे थे। रास्ते में बाइक फिर खराब हो गई। सेक्टर-14 स्थित श्रीराम अपार्टमेंट के पास दिनेश ने ललित को बाइक को धक्का लगाने लिए कहा। ललित के मना करने पर दोनों में कहासुनी हो गई। ललित ने गाली-गलौज की तो मामला झगड़े में बदल गया। इस पर ललित ने दिनेश पर चाकू से हमला कर दिया। इससे दिनेश गंभीर घायल हो गया। आरोपी वहां से भाग गया। तीसरे साथी ने दिनेश को एमबी हॉस्पिटल पहुंचाया, जहां डॉक्टर ने उसे मृत घोषित कर दिया। आरोपी पकड़ाया, तब परिजनों ने लिया शव हत्या की सूचना पर दिनेश के पिता दौलाराम और मां सूरज देवी हॉस्पिटल पहुंचे। दोनों का रो-रो कर बुरा हाल हो गया। परिजनों ने आरोपी ललित को तुरंत पकड़ने की मांग की। फिर गुरुवार को मोर्चरी के बाहर धरने पर बैठ गए और शव लेने से मना कर दिया। पुलिस ने तुरंत कार्रवाई कर आरोपी को पकड़ लिया। फिर शव का पोस्टमार्टम करवा कर परिजनों को सौंपा। मां ने कहा कि उन्हें न्याय में सिर्फ बेटा वापस चाहिए और कुछ नहीं। बुधवार रात 9 बजे बेटे ने आखिरी बार कहा था कि कुछ ही देर में घर पहुंच जाएगा। देर रात पता चला कि उसकी मौत हो गई। पिता दौलाराम मीणा ने बताया कि रात को हॉस्पिटल से फोन आया कि बेटा यहां भर्ती है। हॉस्पिटल पहुंचे तो बेटा मृत अवस्था में मिला। बेटे ने बाइक को धक्का लगाने के लिए कहा था। इस पर ललित ने उससे गाली-गलौज की। फिर चाकू मारकर हत्या कर दी। भास्कर एक्सपर्ट राजेश जाजोदिया, वरिष्ठ अधिवक्ता धार लगे तलवार और छुरी की बिक्री पर लगे पाबंदी धारा 4/25 आर्म्स एक्ट के बढ़ते अपराधों पर अंकुश लगाने के लिए पुलिस प्रशासन को चरणबद्ध और नियमित सघन जांच अभियान चलाने की आवश्यकता है। छुरी, तलवार आदि के विक्रेताओं को पाबंद किया जाए कि वे धार लगे हथियारों का विक्रय नहीं करें। ऐसे दुकानदारों का पुलिस रिकॉर्ड तैयार कर समय-समय पर जांच हो। बड़े चाकू बेचते समय खरीदार का नाम, मोबाइल नंबर और पहचान पत्र दर्ज कराया जाए। इससे अपराध होने पर हथियार की ट्रेसिंग आसान होगी।