शास्त्रीनगर स्थित सूर्यमहल में शुक्रवार को अंतिम चातुर्मासिक प्रवचन श्रृंखला ‘जीवन जीने की कला’ के तहत मंगल दिव्य देशना के 10वें दिन राष्ट्र संत मनोज्ञाचार्य पुलकसागर महाराज ने कहा कि व्यक्ति का आचरण और व्यवहार ही उसकी परिस्थितियां तय करता है। उन्होंने कहा कि क्रोध में ऊंची आवाज में बोलने से हालात बिगड़ते हैं। ग्रह-दशा सुधारने के लिए पहले व्यवहार सुधारना जरूरी है। उन्होंने श्रोताओं से मधुर वाणी और शुद्ध भाव अपनाने पर जोर दिया। प्रवचन में उन्होंने कहा कि गुस्से में बोले शब्द व्यक्ति के स्वभाव को सामने लाते हैं। उन्होंने भोजन में जूठा न छोड़ने और अन्न का अपमान न करने की बात कही। परिवारों को सलाह दी कि सप्ताह में कम से कम एक बार सभी सदस्य साथ बैठकर समस्या पर चर्चा करें और आरोप-प्रत्यारोप की जगह समाधान तलाशें। पुलकसागर चातुर्मास समिति के अध्यक्ष प्रवीण चौधरी ने कार्यक्रमों की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 1 से 3 नवंबर तक बापूनगर दिगंबर जैन मंदिर में प्रवास रहेगा। धनतेरस से अमावस्या तक मंत्र-साधना प्रस्तावित है। 15 नवंबर को चातुर्मास संपन्न होने के बाद विहार होगा। 31 अक्टूबर तक प्रतिदिन सुबह दिव्य देशना और शाम को प्रश्न मंच जारी रहेगा।