शहर के झूलेलाल मंदिर सिंधी कॉलोनी में श्रीमद्भागवत कथा चल रही है। कथावाचिका बीके निकिता दीदी ने गीता के षष्ठ अध्याय ध्यान योग का विवेचन करते हुए कर्मयोग, आत्मसंयम, मन की स्थिरता और परमात्म स्मृति का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि मनुष्य जैसा कर्म करता है, वैसा ही फल प्राप्त करता है। इसलिए परिस्थितियां कैसी भी हों, कर्म श्रेष्ठ रखने चाहिए। परमात्मा पर अटूट विश्वास से कठिन परिस्थितियों का सामना सहजता से किया जा सकता है। उन्होंने कहा कि सच्चा योगी वही है जो कर्म करते हुए भी फल की अपेक्षा और आसक्ति से मुक्त रहे। मन पर विजय पाने वाला सुख-दुख, मान-अपमान और लाभ-हानि में स्थिर रहता है। परमात्मा का स्मरण आंखें बंद करके ही नहीं, आंखें खोलकर भी किया जा सकता है। सभापति भरत शर्मा, उप सभापति संजय भूटानी, पार्षद सुरेश अग्रवाल, पार्षद संगीता एवरग्रीन, प्रेमप्रकाश एवरग्रीन, सिंधी समाज जिलाध्यक्ष मांगूमल टेकवानी और ब्रह्माकुमारी सेवा केंद्र प्रभारी रजनी दीदी ने श्रीमद्भागवत पर माल्यार्पण कर कथा का शुभारंभ किया। मन की स्थिरता के लिए संयम, आत्मचिंतन और परमात्म स्मृति पर जोर गीता के षष्ठ अध्याय में ध्यान योग और मन को संयमित करने की शिक्षा दी गई है। इसमें मनुष्य को अपने मन, बुद्धि और इंद्रियों पर नियंत्रण रखने का संदेश मिलता है। इच्छा, भय और क्रोध से मुक्त होकर आत्मिक स्थिति में स्थिर रहने का अभ्यास बताया गया है। संतुलित आहार, नियमित दिनचर्या, पर्याप्त विश्राम और ध्यान को जीवन में शांति के लिए उपयोगी माना गया है। राजयोग में स्वयं को शांत आत्मा समझकर परमात्मा शिव का स्मरण करने पर जोर दिया जाता है।