भास्कर न्यूज | भीलवाड़ा मेडिसिटी ग्राउंड में हो रही श्री शिव महापुराण कथा ने शहरवासियों को अपनों की मेहमानवाजी का भी मौका दिया है। कथा सुनने के लिए देश के विभिन्न प्रदेशों के साथ ही राजस्थान के विभिन्न जिलों में रहने वाले भी कथा सुनने पहुंचे। बाहर से आए श्रोता कोई किसी का नाना-नानी है तो कोई मामा-मामी, किसी के घर बुआ-फूफा तो किसी के यहां ससुराल वाले पहुंचे है। कई घरों में दूर के रिश्तेदार भी पहुंचे, जिनकी इन दिनों परिवार वाले मेहमानवाजी कर रहे हैं। दोपहर से शाम तक मेहमान कथा सुनते हैं और शाम से देर रात तक और सुबह दो बजे से पहले रिश्तेदारों व उनके परिवार वालों से पारिवारिक वार्तालाप कर हालचाल जान रहे हैं। शहरवासियों के घरों के अलावा सामाजिक भवनों व अन्य सार्वजनिक स्थानों पर भी दूसरे प्रदेशों से लोग शिव महापुराण कथा सुनने भीलवाड़ा पहुंचे हैं। बापूनगर निवासी शिवनारायण शर्मा बताते हैं कि उनके घर कर्नाटक के बैंगलोर से दो मामा गोपाललाल शर्मा और जगदीशचंद्र शर्मा, गुजरात के बड़ौदा से बुआ के लड़के यानि भाई कन्हैयालाल शर्मा कथा सुनने भीलवाड़ा आए, जो सात दिन तक यहीं रहेंगे। उनके यहां रहने से हमें आतिथ्य सत्कार का मौका मिल रहा है। उनका कहना है कि इसी तरह बापूनगर के अन्य सेक्टरों के साथ ही आजादनगर में भी हमारे मिलने वालों के कई घरों में कथा सुनने के लिए उनके नजदीकी रिश्तेदार पहुंचे हैं। मेडिसिटी ग्राउंड में हो रही शिव महापुराण कथा सुनने वालों की संख्या रोज बढ़ रही है। गुरुवार को दूसरे दिन तीनों वाटरप्रुफ पांडालों के साथ ही पाइप पांडाल श्रोताओं से पूरे भर गए। कई श्रोता पांडाल से बाहर बैठे दिखे, जो धूप से अपने आप को बचाने के लिए छतरी तान कर बैठे थे। गुरुवार को कथा स्थल पर एक लाख से भी अधिक श्रोताओं के पहुंचने की संभावना जताई गई। इनमें से 85 प्रतिशत श्रोता महिलाएं थी। पुरुष श्रोताओं की संख्या हर पांडाल में केवल नाम मात्र की थी। कई महिला श्रोता अपने साथ घर से आसन लेकर पहुंची तथा पंडाल में हो रखी बिछायत पर बिछाकर बैठी। इस संबंध में पूछे जाने पर उनका कहना था कि पंडाल में लोग जूते पहनकर घूमते हैं। भोले बाबा की कथा श्रवण स्वच्छता को ध्यान में रखते हुए करेंगे तभी फलदायी है। पंडित प्रदीप मिश्रा द्वारा की जा रही शिव महापुराण कथा सुनने के लिए जिले के हर गांव व कस्बे से भी श्रोता पहुंच रहे हैं। ऐसे में कस्बों व ग्रामीण क्षेत्रों से भीलवाड़ा पहुंचने वाली बसें यात्रिंयों से फूल भरकर आ रही है। यही स्थिति रोडवेज व ट्रेन की भी है। ये श्रोता कथा सुनकर वापस इन्हीं बसों से अपने घर पहुंच रहे हैं। इसके चलते इन दिनों हर बस संचालक की कमाई बढ़ गई है। कई कस्बों और गांवों से श्रोता अपनी निजी बस लेकर भी कथा सुनने पहुंच रहे हैं। जिले से शहर की ओर आने वाली हर बस फुल