पचपदरा रिफाइनरी परियोजना में हाल ही में हुए अग्निकांड ने न केवल सुरक्षा मानकों पर सवाल खड़े किए हैं, बल्कि राज्य सरकार की पिछले 5 वर्षों से जारी प्रशासनिक अनदेखी को भी उजागर किया है। रिफाइनरी जैसे प्रोजेक्ट की प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए जिम्मेदार डायरेक्टर पेट्रोलियम का पद लंबे समय से रिक्त पड़ा है। इसका सीधा असर परियोजना की सुरक्षा, लागत, समय-सीमा पर पड़ा है। वर्ष 1997 में जयपुर में पृथक पेट्रोलियम निदेशालय की स्थापना इस उद्देश्य से की गई थी कि राज्य में पेट्रोलियम अन्वेषण, उत्पादन, मूल्य संवर्धन की परियोजनाओं को गति दी जा सके। नियम के मुताबिक डायरेक्टर के पद के लिए पेट्रोलियम स्पेशलाइजेशन में डिग्री, 15 वर्ष का अनुभव अनिवार्य है। विडंबना यह है कि पिछले 5 साल से अधिक समय से इस पद का कार्यभार केवल अतिरिक्त चार्ज के भरोसे चल रहा है। वर्तमान में सिविल एविएशन डायरेक्टर अवधेश सिंह के पास इसका अतिरिक्त प्रभार है। तकनीकी विशेषज्ञ के अभाव में सुरक्षा मानकों की निगरानी, आपातकालीन प्रबंधन जैसे महत्वपूर्ण कार्यों में कमी रही है। रिफाइनरी में देरी और बढ़ती लागत की ये बड़ी वजह सूत्रों के अनुसार निदेशालय में विशेषज्ञ निदेशक न होने के कारण रिफाइनरी कमीशनिंग में एचपीसीएल द्वारा लिए गए एकतरफा निर्णयों पर राज्य सरकार प्रभावी हस्तक्षेप नहीं कर पाई। इसका परिणाम यह हुआ कि रिफाइनरी के कमीशन होने में 4 वर्ष का विलंब हुआ। प्रोजेक्ट की कुल लागत लगभग दोगुनी हो गई। प्रशासनिक मॉनिटरिंग के अभाव में सुरक्षा में भी चूक हुई। यह चूक एक बड़े हादसे में बदल गई। पूर्व में जुड़े विशेषज्ञों की सेवाएं लेने की जरूरत पेट्रोलियम विभाग के सेवा नियमों के अनुसार वर्तमान में राज्य सरकार के पास ऐसा कोई नियमित कार्मिक उपलब्ध नहीं है, जो निर्धारित योग्यता, पेट्रोलियम डिग्री + 15 वर्ष अनुभव, पूरी करता हो। ऐसी स्थिति में विशेषज्ञों का सुझाव है कि सरकार को पे माइनस पेंशन के आधार पर किसी सेवानिवृत्त पेट्रोलियम विशेषज्ञ की सेवाएं लेनी चाहिए। हाल ही में खान विभाग में भी इसी तर्ज पर एमपी मीणा की पुनर्नियुक्ति की गई। ऐसे विशेषज्ञों को वरीयता दी जानी चाहिए, जो रिफाइनरी प्रोजेक्ट से पूर्व में जुड़े रहे हों या जिन्हें इसका पूर्ण अनुभव हो। सरकार की अनदेखी, पांच साल से अतिरिक्त चार्ज निदेशालय के इतिहास पर नजर डालें तो पूर्व में भी विशेषज्ञों की सेवाएं ली जाती रही हैं। जीपी माथुर और एसके मित्तल जैसे विशेषज्ञों ने पुनर्नियुक्ति के माध्यम से विभाग को दिशा दी। डॉ. एके ककरू और डॉ. बीएस राठौड़ ने भी इस पद की गरिमा व तकनीकी आवश्यकताओं को बखूबी संभाला था, लेकिन 2021 के बाद से यह पद तकनीकी विशेषज्ञ के बिना सूना पड़ा है। वर्तमान में अवधेश सिंह, के पास डायरेक्टर सिविल एविएशन को डायरेक्टर पेट्रोलियम का अतिरिक्त चार्ज दे रखा है। उन्होंने नियमित तौर पर रिफाइनरी साइट की विजिट नहीं की। एचपीसीएल के साथ बेहतर तालमेल नहीं रहा। अब तक पांच ही फुल टाइम डायरेक्टर > 1997 से 1999 तक जीपी माथुर (राज्य तकनीकी सेवा)। > ⁠1999-2001 तक सेवानिवृत्त जीपी माथुर की पुनर्नियुक्ति। > ⁠2002-2007 तक सेवानिवृत्त एसके मित्तल (ऑयल इंडिया तकनीकी सेवा) की पुनर्नियुक्ति। > 2011-2014 तक सेवानिवृत्त डॉ. एके ककरू (ओएनजीसी तकनीकी सेवा) की पुनर्नियुक्ति। > ⁠2017-2020 तक डॉ. बीएस राठौड़ (राज्य तकनीकी सेवा); 2021-22 में सेवानिवृत्त।