जयपुर में एक साल तक रहने वाला आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश यहां की हवामहल विधानसभा का वोटर भी बन चुका था। उसने अपना नाम बदलकर सज्जाद अहमद रख लिया था। भास्कर के पास वो Exclusive वोटर आईडी कार्ड और आधार कार्ड है, जिसकी बदौलत उसने पासपोर्ट तक बनवा लिए। AC मैकेनिक बनकर उसने न केवल जयपुर के मॉल-मंदिरों की रेकी की, बल्कि बड़ी आसानी से विदेश भी भाग गया। चौंकाने वाली बात ये है कि उसका पासपोर्ट बनाने में 2 राज्यों की पुलिस भी गच्चा खा गई। अब पुलिस उसकी मदद करने वाले चार दोस्तों के मोबाइल का डिलीट डेटा रिकवर करने में जुटी है, ताकि लश्कर-ए-तैयबा आतंकी उमर हारिस की कड़ी से कड़ी जोड़ सके। संडे बिग स्टोरी में पढ़िए एक आतंकी ने कैसे इतनी आसानी से डॉक्यूमेंट बनवाए, कहां लापरवाही बरती गई और कौन इसके जिम्मेदार हैं? आधार कार्ड : लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी बना जयपुर का निवासी पाकिस्तान से घुसपैठ कर आया खूंखार आतंकी उमर हारिस फर्जी डॉक्यूमेंट के दम पर जयपुर का मूल निवासी बन गया था। उसका आधार कार्ड और वोटर आईडी कार्ड पुलिस को उसकी पासपोर्ट के लिए लगाई गई फाइल में से मिले हैं। इनके आधार पर ही उसने पासपोर्ट के लिए आवेदन किया। जयपुर पुलिस के बाद हरियाणा की नूंह पुलिस ने उसका सत्यापन किया। कुछ ही दिन में एक आतंकी का पासपोर्ट जारी हो गया। उसका आधार कार्ड नंबर- 3367-5268-8609 है, जिसमें उसने खुद का नाम सज्जाद अहमद बता रखा है। इस पर दिए पते के अनुसार जयपुर की आमेर तहसील के सेडवा मानपुरा की राशिद विहार कॉलोनी में उसने किराए पर कमरा लिया था। वो यहां महज एक साल से भी कम रहा। सूत्रों के अनुसार उसने 8 साल का किरायानामा बनवा लिया था। मदद करने वालों का अभी पता नहीं चल पाया है। उमर हारिस ने बड़े ही शातिराने तरीके से खेल खेला। सबसे पहले किरायानामा बनवाया। फिर आधार कार्ड में एड्रेस बदलकर जयपुर का किया। उसके बाद जयपुर में ही वोटर आईडी कार्ड तक बनवा लिया। हमारी पड़ताल में सामने आया कि उमर हारिस सितंबर 2023 से लेकर अगस्त 2024 तक राशिद विहार कॉलोनी के मकान नंबर-13 में रहा था। यहां से वो सी-स्कीम स्थित एक इलेक्ट्रिक शॉप में AC रिपेयरिंग की नौकरी करने जाता था। वोटर आईडी कार्ड : जयपुर का वोटर भी बना उमर ने जयपुर में रहते हुए अपना वोटर आईडी कार्ड जैसा मजबूत डॉक्यूमेंट भी बनवा लिया था। कुछ महीने पहले आया उमर हारिस जयपुर के हवा महल विधानसभा क्षेत्र का वोटर सज्जाद अहमद बन गया था। भास्कर को मिला ई-वोटर कार्ड (आईडी नंबर- IVG1486216) निर्वाचक रजिस्ट्रेशन अधिकारी-49, जयपुर की ओर से जारी किया गया था। इसे 22 सितंबर 2023 को डाउनलोड किया गया था। इसका मतलब है कि इसके बाद ही उसने पासपोर्ट के लिए अप्लाई किया होगा। हैरान करने वाली बात ये है कि एक वोटर आईडी कार्ड के लिए बीएलओ स्तर पर आवेदक के कई प्रूफ देखे जाते हैं। वोटर आईडी के लिए आवेदन आने के बाद फॉर्म नंबर-6 भरा जाता है। जिसमें आवेदक की फोटो, एड्रेस प्रूफ, डेट ऑफ बर्थ से जुड़ा वैलिड सर्टिफिकेट (10वीं की मार्क्स शीट/पैन कार्ड/आधार कार्ड या कोई ऐसा दस्तावेज जिस पर जन्म तिथि दर्ज हो) और पुरानी वोटर लिस्ट में परिवार का नाम। यहां भी लापरवाही बरती गई। नूंह में उमर हारिस, जयपुर में बना सज्जाद अहमद डीसीपी नॉर्थ करण शर्मा ने बताया- आतंकी खरगोश का नूंह में उमर हारिस के नाम से आधार कार्ड बना था। उसने जयपुर में नाम बदलवाया। अब उसकी पहचान सज्जाद के रूप में थी। इसके बाद किरायानामा बनवाकर पासपोर्ट के लिए ऑनलाइन आवेदन किया। ऑफलाइन डॉक्यूमेंट सब्मिट कराने के लिए उसे जयपुर पासपोर्ट कार्यालय बुलाया गया। वहां उसने दस्तावेज सहित अपनी पहचान से जुड़ी जानकारी साझा की। इसके बाद उसका पुलिस सत्यापन के लिए लेटर जयसिंहपुरा खोर पुलिस थाने पहुंचा। पुलिस टीम ने वेरिफिकेशन के दौरान पाया कि वह मूल रूप से नूंह (हरियाणा) का रहने वाला है। जयपुर में काम कर रहा है। ऐसे में पुलिस ने पासपोर्ट के लिए किए गए सत्यापन पत्र में टिप्पणी करते हुए लिखा कि... 'सज्जाद पिछले एक साल से जयपुर में रह रहा है। मूलरूप से वह नूंह हरियाणा का है, जिसकी जांच नूंह हरियाणा पुलिस को भेजकर कराई जाए।' डीसीपी करण शर्मा ने बताया कि इसके बाद पासपोर्ट कार्यालय ने नूंह थाना पुलिस को सत्यापन के लिए भेजा। वहां से भी उसका वेरिफिकेशन होकर आ गया। सत्यापन होने पर पासपोर्ट कार्यालाय ने उसका पासपोर्ट जारी किया। आतंकी का पासपोर्ट बनाने में 4 लेवल पर हुई गंभीर लापरवाही जिम्मेदार नंबर-1 : वेरिफिकेशन करने वाला जयसिंहपुरा खोर थाने का बीट कॉन्स्टेबल एक साल पहले जयपुर में रहने आए शख्स की पूरी जानकारी नहीं जुटाई, जबकि पासपोर्ट वेरिफिकेशन के दौरान पुलिस 10 तरह के सवाल-जवाब करती है। हर तरीके से वेरिफिकेशन करती है। आतंकी के केस में मकान मालिक और एक अन्य व्यक्ति द्वारा किए गए मौखिक सत्यापन का फिजिकल वेरिफिकेशन नहीं किया। अगर इसी स्तर पर पूरी जांच की होती तो बड़ा आतंकी पकड़ा जा सकता था। जिम्मेदार नंबर-2 : जयसिंहपुरा थाना सीआई उदयभान यादव वेरिफिकेशन से जुड़ी सभी जानकारियां परफॉर्मा में भरने के बाद थाना इंचार्ज ही उसे फाइनल रिमार्क करता है। इस केस में बीट कॉन्स्टेबल द्वारा की गई जांच को थानाधिकारी को अपने स्तर पर भी वेरिफाई करना चाहिए था। लेकिन जो नीचे से फाइल बनकर आई उस पर साइन कर दूसरे राज्य से जांच की बात लिख कर इतिश्री कर दी गई। तत्कालीन जयसिंहपुरा थाना सीआई उदयभान यादव ने बताया कि हर दिन दो-तीन पासपोर्ट के लिए वेरिफिकेशन आते रहते हैं। उनके वेरिफिकेशन का जिम्मा बीट कॉन्स्टेबल को बांट दिया जाता है। मुझे सज्जाद के बारे में ध्यान नहीं है कि उसके पासपोर्ट के लिए आने वाले दस्तावेजों में क्या लिखा था। उसने जो दस्तावेज दिए, वह थाने में सेफ है। जिम्मेदार नंबर-3 : हरियाणा की नूंह थाना पुलिस जयपुर के थाने से जांच पर टिप्पणी के बाद पासपोर्ट कार्यालय की लाइसेंसिंग विंग ने दूसरे लेवल पर वेरिफिकेशन के लिए फाइल नूंह पुलिस को भिजवाई। वहां भी इसी प्रकार की लापरवाही की गई। इसका फायदा आतंकी को मिला और उसका पासपोर्ट बन गया। जिम्मेदार नंबर-4 : जयपुर का पासपोर्ट अधिकारी जो शख्स एक साल से जयपुर में रह रहा है, उसका वेरिफिकेशन केवल 20 दिन में पूरा होकर पासपोर्ट कार्यालय पहुंच गया। पासपोर्ट अधिकारी ने इस बात की तस्दीक नहीं की कि जिसका परिवार मूल रूप से राजस्थान का नहीं है, उसका भी पासपोर्ट जारी कर दिया गया। एटीएस और जिला पुलिस ने आतंकी से जुड़ी जानकारी पासपोर्ट अधिकारी को दे दी है। इसके बाद भी अभी तक कोई शिकायत पासपोर्ट अधिकारी द्वारा नहीं दी गई है। अब जयपुर के चार युवकों के मोबाइल से खुलेगा राज जम्मू-कश्मीर पुलिस ने जयपुर में उमर हारिस की मदद करने वाले चार युवकों को हिरासत में लिया था। शक था कि वो उसके मददगार थे। पूछताछ के बाद सभी को रिलीज कर दिया है। उनके मोबाइल फोन और कुछ गैजेट्स जांच के लिए एफएसएल भेजे गए हैं। डिलीट हो चुका डेटा रिकवर कर पता लगाया जाएगा कि आतंकी उमर के साथ चारों में किस तरह की बात होती थी। क्या कोई पाकिस्तान से तो इन चारों के संपर्क में नहीं था जिनके आदेश पर हारिस की इन लोगों ने जयपुर में रहने, नौकरी, घूमने और पासपोर्ट बनाने में मदद की थी। हालांकि जयपुर पुलिस को किसी भी प्रकार के कोई सबूत अब तक नहीं मिले हैं। यही कारण है कि एटीएस ने अब तक उमर हारिस की मदद करने वाले किसी भी व्यक्ति के खिलाफ कोई शिकायत दर्ज नहीं की है। आतंकी ने की जयपुर के मंदिरों, मॉल की रेकी आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश, सज्जाद के नाम से पासपोर्ट बना कर भारत से विदेश गया। वह जयपुर में करीब 1 साल तक रहा। दो बार केंद्रीय एजेसिंया जयपुर आकर उमर के ठिकानों को सर्च कर चुकी हैं। उससे जुड़े लोगों से पूछताछ कर चुकी हैं। एटीएस के एसपी ज्ञानचंद यादव ने बताया कि उमर हारिस ने जयपुर की कई संवेदनशील जगहों पर समय बिताया। वह भीड़भाड़ वाली जगह जीटी, डब्ल्यूटीपी के अलावा शहर के प्रमुख मंदिरों में काफी समय तक रुका और रेकी की। जाहिर है वह जयपुर घूमने नहीं आया था। उससे जुड़े जयपुर के कई लोगों से निरंतर पूछताछ की जा रही है। अधिकांश का कहना है कि उन्हें कभी लगा ही नहीं की वह आतंकी हो सकता है। उनके साथ नमाज पढ़ता था। सिटी में घूमता और टूरिस्ट की तरह ही उसकी जानकारी लेता था। एटीएस इस केस में उमर हारिस के मूवमेंट के संबंध में निरंतर फुटेज निकाल रही है। जयपुर टारगेट या सेफ हाउस? इस मामले में अब सुरक्षा एजेंसियां इस सवाल का जवाब तलाशने में लगी हैं कि आखिरकार आतंकी उमर ने जयपुर को ही क्यों चुना। क्या आंतकवादी घटनाओं के लिए जयपुर टारगेट था या फिर सिर्फ ठिकाना। जांच में ये सामने आया है कि आतंकी ने जयपुर के कई प्रमुख स्थलों की रेकी की थी। इनमें जयपुर के परकोटा इलाके के प्रमुख स्थलों के अलावा वर्ल्ड ट्रेड पार्क और गौरव टावर जैसे इलाकों में भी घूमा था। सुरक्षा एजेंसियां इसे डीकोड करने में जुट गई हैं कि क्या आतंकियों की जयपुर को फिर से दहलाने की मंशा थी या फिर कोई और बात। इसके अलावा अब इसका भी जवाब तलाशा जा रहा है कि क्या उमर ने जयपुर में स्लीपर सेल तैयार किए हैं या फिर सुरक्षा एजेंसियों को भनक लगने के शक को देखते हुए जयपुर से फरार हो गया। क्या है पूरा मामला? अप्रैल 2026 में जम्मू-कश्मीर पुलिस ने एक आतंकी मॉड्यूल को पकड़ा था। भारी हथियारों के साथ 5 संदिग्ध आतंकी पकड़े गए थे। पूछताछ में सामने आया कि उनका एक साथी जयपुर में रहा था। जम्मू-कश्मीर पुलिस की सूचना के बाद राजस्थान एटीएस और स्थानीय पुलिस ने जब जांच की तो हड़कंप मच गया। जांच में सामने आया कि लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हारिस उर्फ खरगोश साल 2023 में नूंह-मेवात से जयपुर आया था। अगस्त 2024 तक जयपुर में रहा। इस दौरान खरगोश ने शातिराना तरीके से स्थानीय लोगों से जान-पहचान बढ़ाई। इसी जान-पहचान के आधार पर उसने सी-स्कीम स्थित एक AC रिपेयरिंग कंपनी में नौकरी हासिल कर ली थी। जयसिंहपुराखोर इलाके में किराए के मकान में रहने लगा था। फिर धीरे-धीरे अन्य दस्तावेज बनाकर फर्जी पासपोर्ट भी बनवा लिया। इस मामले में अब तक ये सामने आया है कि आतंकी उमर हारिस ने कुछ साल पहले शादी कर स्थानीय पहचान हासिल की और उसी आधार पर फर्जी दस्तावेज तैयार किए। उसके बाद विदेश भाग गया। जांच एजेंसियों के अनुसार, उमर हारिस साल 2012 के आसपास पाकिस्तान से जम्मू-कश्मीर में घुसपैठ कर सक्रिय हुआ था। --------- यह खबर भी पढ़िए… जयपुर में एक साल रहा था आतंकी 'खरगोश':सी-स्कीम में नौकरी, जयसिंहपुराखोर में रहकर संवेदनशील इलाकों की रेकी की, 4 लोगों ने की मदद लश्कर-ए-तैयबा का आतंकी उमर हारिस उर्फ 'खरगोश' एक या दो दिन नहीं, बल्कि 1 साल साल तक जयपुर में रहा। यही नहीं उसने जयपुर के सी-स्कीम में नौकरी करते हुए कई इलाकों में रेकी की। पढ़ें पूरी खबर...