पाली कलेक्ट्रेट के बाहर गुरुवार सुबह जिलेभर से बड़ी संख्या में आंगनबाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं अपनी मांगों को लेकर धरने पर बैठ गईं। उन्होंने जमकर नारेबाजी की और मुख्यमंत्री के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा। प्रदर्शनकारियों ने साफ कहा कि जब तक उनकी मांगों का समाधान नहीं होगा, तब तक धरना जारी रहेगा। धूप में बिना टेंट और दरी के धरना अखिल राजस्थान महिला एवं बाल विकास संयुक्त कर्मचारी संघ की जिलाध्यक्ष सुषमा शर्मा के नेतृत्व में कार्यकर्ता और सहायिकाएं कलेक्ट्रेट पहुंचीं। वे तेज धूप में बिना टेंट और दरी के ही धरने पर बैठी रहीं। उनका कहना था कि उनके पास टेंट और माइक की व्यवस्था के लिए पर्याप्त बजट नहीं है। जिलाध्यक्ष सुषमा शर्मा ने बताया कि यह धरना अनिश्चितकालीन है और मांगों के निस्तारण तक जारी रहेगा। ये हैं प्रमुख मांगें प्रदर्शनकारियों ने आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को स्थायी करने, सेवानिवृत्ति पर ग्रेच्युटी व 10 लाख रुपए की एकमुश्त राशि तथा पेंशन सुविधा देने, मानदेय बढ़ाने और न्यूनतम मजदूरी के अनुसार 20 से 25 हजार रुपए मासिक भुगतान की नीति बनाने की मांग की। उन्होंने गैर-आईसीडीएस कार्यों पर रोक, ठेका प्रथा समाप्त करने, सरकारी सीडीपीओ, लेखाकार व महिला पर्यवेक्षकों की नियुक्ति, 9 माह के बकाया मानदेय, सीबीई व प्रोत्साहन राशि का भुगतान तथा भवन किराया बढ़ाकर लंबित राशि जारी करने की भी मांग उठाई। इसके अलावा महिला पर्यवेक्षकों के आरक्षित पदों को आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं से भरने, 1 हजार नए पद सृजित करने और 3 से 6 वर्ष के बच्चों के लिए ग्रीष्मकालीन अवकाश 30 जून तक करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल की गई।