हाईकोर्ट का हवाला देकर नगर निगम पाली स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर उनका वैक्सीनेशन करने के बाद वापस उन्हीं मोहल्लों में छोड़ रही। जहां से वो पकड़कर लाए थे। ऐसे में निगम के श्वानों के बाड़े खाली है और मोहल्लों में स्ट्रीट डॉग्स की संख्या लगातार बढ़ती जा रहे है। इसके चलते हर रोज डॉग्स लोगों को काट रहे है। हाल ही में डॉग के काटने से एक युवक की रेबिज से मौत हो गई थी, लेकिन जिम्मेदार निगम के अधिकारी हाईकोर्ट की गाइड लाइन का हवाला देकर अपनी जिम्मेदार से मुंह मोड़ रहे है। इस पर पूर्व पार्षद ने कहा- डॉग्स को पकड़ने के लिए निगम अधिकारियों को कई बार कहां गया। इस पर डॉग्स लवर ने उनके खिलाफ कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवा दी। मोहल्लों में डॉग्स की संख्या बढ़ती जा रही पाली शहर के रांगणिया मोहल्ला, डेंडों का बास, गुंदोदिया बास, देरासर गली, गुजराती कटला, नारेलों की पोल, गजानंद मार्ग, जंगीवाड़ा, झूरों का बास, दोपोलिया बास, खौड का बास, बालिया बास, सोजतिया बास, बागड़ मोहल्ला, जनता कॉलोनी, इंद्रा कॉलोनी, सरदार पटेल नगर सहित शहर के ऐसे कई मोहल्लों है। जहां डॉग्स संख्या बढ़ती जा रही है। आए दिन डॉग्स के काटने मामले के CCTV फुटेज भी देखने को मिल रहे है। लेकिन इन सब के बीच हाईकोर्ट की गाइड लाइन का हवाल देकर निगम स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर वैक्सीनेशन के बाद वापस उसकी मोहल्लों में छोड़ रही है जहां से पकड़कर लाती है। रोज लाेगों को काट रहे डॉग्स बांगड़ हॉस्पिटल के ARV क्लिनिक में कार्यरत नर्सिंग ऑफिसर हाजी मोहम्मद ने बताया कि क्लिनिक पर रोजाना औसतन 10 घायल डॉग बाइट के वैक्सीन लगवाने आते है। वही जिले भर से कुल 25-30 लोग डॉग बाइट को लेकर रोजाना वैक्सीन लगाने पहुंच रहे। आवाज उठाने पर डॉग लवर ने थाने में शिकायत दी मामले में पूर्व पार्षद विकास बुबकिया का कहना है कि डेंडों का बास, गुंदोदिया बास, देरासर गली, गुजराती कटला, नारेलों की पोल क्षेत्र में स्ट्रीट डॉग्स बहुत है। कई जनों को काटा भी इनको पकड़ने के लिए निगम अधिकारियों को कई बार कहां। इस पर डॉग्स लवर ने उनके खिलाफ कोतवाली थाने में शिकायत दर्ज करवा दी। हम नहीं चाहते है कि डॉग्स को नुकसान पहुंचाया जाए, लेकिन डॉग्स बाइक की घटनाओं को कम करने के लिए निगम को खतरनाक डॉग्स को तो पकड़ा चाहिए। 1172 डॉग्स का वैक्सीनेशन हुआ मामले में नगर निगम आयुक्त नवीन भारद्वाज ने कहा कि निर्धारित गाइड लाइन के तहत अभी तक 1172 स्ट्रीट डॉग्स को पकड़कर उनका टीकाकरण करवाया है। वही 550 डॉग्स की नसबंदी करवाई है। हाईकोर्ट की गाइड लाइन अनुसार वापस उन डॉग्स को वही छोड़ा है जहां से पकड़कर लाए थे। क्योंकि लेपर्ड की तरह डॉग्स की भी अपनी टेरेटरी होती है। दूसरी जगह छोड़ने पर उस टेरेटरी के डॉग्स उन पर हमला कर देते है। यह भी पढ़े - सुप्रीम कोर्ट बोला- खतरनाक कुत्तों को मौत का इंजेक्शन दें:* लोगों की सुरक्षा जरूरी; जो अफसर निर्देश न माने, उस पर अवमानना का केस चले यह भी पढ़े - *पाली में रेबीज से युवक की मौत:* 2 महीने पहले कुत्ते ने काटा था, इंजेक्शन ही नहीं लगवाए; पानी देखते ही डर रहा था