आयुर्वेद की पंचकर्म चिकित्सा जहां तेजी से लोकप्रिय और कारगर साबित हो रही है, वहीं इसके लिए जरूरी औषधीय तेल और दवाओं की सप्लाई विभाग नहीं कर पा रहा है। जिले के सबसे बड़े आयुर्वेद चिकित्सालय में पिछले एक साल में आई सप्लाई का स्टॉक लगभग खत्म हो चुका है, जिससे पंचकर्म चिकित्सा पर संकट के हालात बन गए हैं। मरीजों का दबाव लगातार बढ़ रहा है और उन्हें मजबूरन औषधीय तेल व दवाएं बाजार से खरीदनी पड़ रही हैं। दूसरी ओर, अस्पताल प्रशासन भी वैकल्पिक व्यवस्थाओं में जुटा है। दूसरे संस्थानों, आयुर्वेद कॉलेज और भामाशाहों के सहयोग से दवाएं जुटाकर मरीजों का उपचार जारी रखा जा रहा है। विभागीय सप्लाई नहीं होने से औषधीय तेल का संकट गहरा गया है। चिकित्सालय की पिछले एक साल की ओपीडी 41 हजार से अधिक रही, जिसमें 14 हजार से ज्यादा मरीजों को पंचकर्म चिकित्सा दी गई। दूसरे संस्थानों से दवाएं जुटा मरीजों का उपचार कर रहे केस - 1. तेल व दवा बाजार से 2093 रुपए की खरीदी “कमर में तेज दर्द था, उठना भी मुश्किल हो गया था। चिकित्सालय में इलाज के लिए आया, लेकिन औषधीय तेल व दवा नहीं मिली। मजबूरी में बाजार से 2093 रुपए की दवाएं खरीदनी पड़ीं। पंचकर्म चिकित्सा से राहत जरूर मिल रही है।” - थान सिंह, बहताना (डीग) केस- 2. दो दिन तक दवा नहीं मिली, स्टॉक में नहीं है “मैं ड्राइवर हूं। कंधे में दर्द के कारण हाथ नहीं उठ पा रहा था। 22 अप्रैल से पंचकर्म चिकित्सा ले रहा हूं। लेप तो लगाया गया, लेकिन दो दिन तक दवा नहीं दी गई। कहा गया कि दवा उपलब्ध नहीं है, बाद में अब दी है।” - मनोज कुमार, भोंट “वार्षिक ओपीडी 41 हजार से अधिक है, जिसमें 14 हजार से ज्यादा मरीज पंचकर्म चिकित्सा के हैं। विभागीय सप्लाई नहीं आने पर दूसरे संस्थानों, आयुर्वेद कॉलेज और योग एवं प्राकृतिक चिकित्सा के बजट से औषधीय तेल व अन्य दवाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। आरजीएचएस या बिल के माध्यम से भुगतान लेने वाले कार्मिक बाजार से दवाएं ला रहे हैं, जबकि अन्य मरीजों को चिकित्सालय स्तर पर ही उपलब्ध कराई जा रही हैं।” - डॉ. चंद्रप्रकाश दीक्षित प्रभारी, आयुर्वेद चिकित्सालय, भरतपुर