ज्येष्ठ मास की शुरुआत शनिवार से हो चुकी है। इस पवित्र मास में भगवान विष्णु की आराधना के साथ जल का दान करना विशेष फलदायी माना जाता है। पुराणों के अनुसार, ज्येष्ठ ग्रीष्म ऋतु का पहला मास है, जो भगवान विष्णु को समर्पित है। इस दौरान स्नान, दान, जप और व्रत से पाप नाश होता है और मोक्ष की प्राप्ति होती है। गर्मी में जल दान से पितरों को तृप्ति मिलती है, जिससे घर में सुख-समृद्धि आती है। इस मास में नदी स्नान, दान-पुण्य, व्रत और जप का विशेष महत्व है। इसी को लेकर हमने पंडित वेदव्यास से विशेष बातचीत की। उन्होंने बताया कि ज्येष्ठ मास में विष्णु भक्ति से जीवन के सभी कष्ट दूर होते हैं। जल दान अमृत तुल्य है, जो परिवार में सुख और समृद्धि लाता है। नौकरी-पैसे के लिए अपनाएं ये खास उपाय विष्णु की कृपा का मास पंडित वेदव्यास ने बताया कि ज्येष्ठ मास विष्णु की कृपा का द्वार है। जल दान से पितर प्रसन्न होते हैं, जो वंश वृद्धि करते हैं। नौकरीपेशा लोगों को रोज विष्णु चालीसा पढ़ना चाहिए। इसके अलावा गर्मी में प्यासे को पानी पिलाने से भगवान की कृपा बनी रहती है। ज्येष्ठ मास का गहरा महत्व बता दें कि स्कंद पुराण और विष्णु पुराण के अनुसार, ज्येष्ठ मास भगवान विष्णु के क्षीरसागर शयन काल से जुड़ा है। इस दौरान पाप नाश, मोक्ष प्राप्ति और परिवारिक सुख की कामना पूरी होती है। गर्मी में प्यासे जीवों को जल दान करने से पुण्य फल मिलता है, जो 1000 गाय दान के बराबर माना जाता है।