राजस्थान में प्रतियोगी परीक्षाओं में पारदर्शिता के दावों के बीच जैसलमेर से एक बार फिर सिस्टम को शर्मसार करने वाला मामला सामने आया है। जैसलमेर में परीक्षा का पेपर लीक होने की गंभीर आशंका के बावजूद प्रशासन और पुलिस पूरे मामले पर पर्दा डालने और लीपापोती करने में जुट गए हैं। पुलिस द्वारा 5 आरोपियों के खिलाफ नामजद मुकदमा दर्ज किए जाने के बाद भी, अब तक महज 2 आरोपियों को ही गिरफ्तार किया गया है। हैरानी की बात यह है कि परीक्षा कक्ष से करीब 10 मिनट तक पेपर बाहर रहने के पुख्ता सबूत मिलने के बावजूद पुलिस ने इस मामले में पेपर लीक के बजाय केवल नकल की हल्की धाराएं लगाई हैं। 5 आरोपी नामजद, लेकिन वीक्षक और केंद्राधीक्षक पुलिस की पकड़ से दूर : एसडीएम की जांच रिपोर्ट में स्पष्ट लिखा है कि वीक्षकों की मौजूदगी में ही रिलीवर पेपर बाहर लेकर गया था। पुलिस ने परीक्षार्थी, रिलीवर, दो वीक्षकों और केंद्राधीक्षक सहित कुल 5 लोगों पर मामला दर्ज किया है। लेकिन पुलिस ने सिर्फ परीक्षार्थी और रिलीवर को पकड़कर इतिश्री कर ली। जांच में सबसे चौंकाने वाला खुलासा परीक्षा केंद्र के सीसीटीवी कैमरों को लेकर हुआ है। दोपहर 3:38 बजे एक रिलीवर पदमसिंह वीक्षकों इन्विजिलेटर की मौजूदगी में पेपर को हाजिरी रजिस्टर की आड़ में छिपाकर परीक्षा कक्ष से बाहर ले गया। इसके बाद 3:48 बजे तक यानी पूरे 10 मिनट का सीसीटीवी फुटेज गायब है। प्रशासन का तर्क है कि दोपहर 3:40 से 3:45 बजे तक बिजली गुल थी। लेकिन सवाल यह उठता है कि अगर लाइट 5 मिनट के लिए गई थी, तो पूरे 10 मिनट का फुटेज क्यों गायब है? 3:48 बजे जब सीसीटीवी शुरू हुआ तो परीक्षार्थी मनु कंवर की टेबल पर प्रश्न-पत्र रखा हुआ दिखा।