दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेस-वे पर जयपुर-दौसा के पास चलती स्लीपर कोच बस में लगी भीषण आग के बाद भी निजी स्लीपर बसों में सुरक्षा व्यवस्था पर सवाल खड़े हैं। हादसे में बस के नीचे बने रैक में रखे ज्वलनशील पदार्थ और सिगरेट के कार्टनों से आग लगने का कारण माना जा रहा है। इसके बावजूद परिवहन विभाग और पुलिस की ओर से प्रभावी कार्रवाई नजर नहीं आ रही है। भास्कर टीम ने बुधवार को सिंधी कैंप, पोलोविक्ट्री और गोपालबाड़ी बस स्टैंड के आसपास पड़ताल की। यहां से मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, गुजरात, दिल्ली, हरियाणा, पंजाब और हिमाचल प्रदेश जाने वाली कई निजी एसी स्लीपर बसों में नीचे बने कैबिनों में बड़ी मात्रा में व्यावसायिक पार्सल लोड मिले। यहां तक कि 6000 रुपए के रूफ पार्सल परमिट की आड़ में क्षमता से अधिक सामान लोड किया जा रहा है, जिससे बसों का संतुलन प्रभावित होने और हादसे का खतरा बढ़ने की आशंका जताई गई है। तस्वीरों में दिखी ये स्थिति सुरक्षा जांच पर भी सवाल पार्सल ट्रांसपोर्टिंग के नाम पर बिना सुरक्षा जांच या स्कैनिंग के बड़ी मात्रा में पार्सल बसों में लोड किए जा रहे हैं। ऐसे में यह भी स्पष्ट नहीं हो पाता कि कार्टनों और कट्टों में किस प्रकार का सामान रखा गया है।