झालावाड़ में परवन वृहद सिंचाई परियोजना अपने अंतिम चरण में है। विभागीय कार्ययोजना के अनुसार, वर्ष 2026 में बांध में जल संग्रहण किया जाना प्रस्तावित है। यह खबर क्षेत्र के किसानों के लिए राहत लेकर आई है, जो करीब आठ वर्षों से इस महत्वाकांक्षी परियोजना का इंतजार कर रहे थे। परियोजना स्थल पर निर्माण कार्य तीव्र गति से जारी है। बांध पर सभी 15 रेडियल गेट स्थापित किए जा चुके हैं, जो जल रोकने की दिशा में एक महत्वपूर्ण तकनीकी चरण है। इसके साथ ही नहर निर्माण कार्य में भी तेजी लाई गई है। प्रशासन के सहयोग से नहर खुदाई में आ रही बाधाओं को दूर किया जा रहा है, जिससे परियोजना की प्रगति में निरंतर सुधार हो रहा है। विभागीय योजना के अनुसार, इस परियोजना से झालावाड़, बारां और कोटा जिलों के किसानों को व्यापक लाभ मिलेगा। प्रारंभिक चरण में लगभग 70,000 हेक्टेयर भूमि में सिंचाई के लिए पानी उपलब्ध कराने का लक्ष्य निर्धारित किया गया है। इससे क्षेत्र में कृषि उत्पादन बढ़ने और जल संकट कम होने की उम्मीद है, जिससे किसानों की आर्थिक स्थिति में सुधार होगा। एडिशनल चीफ इंजीनियर ने किया दौरा इसी क्रम में 3 अप्रैल 2026 को अतिरिक्त मुख्य अभियंता डी.एन. शर्मा ने परियोजना का निरीक्षण किया। इस दौरान अधीक्षण अभियंता अजीत कुमार जैन, विभागीय अभियंता एवं संवेदक प्रतिनिधि उपस्थित रहे। निरीक्षण के दौरान उन्होंने निर्माण कार्यों की प्रगति की समीक्षा करते हुए आवश्यक दिशा-निर्देश दिए।अतिरिक्त मुख्य अभियंता ने बांध कार्य में गर्डर लॉन्चिंग कार्य शीघ्र पूर्ण करने, ब्लॉक संख्या 1 से 3 एवं 21 के कंक्रीट कार्य को समयबद्ध तरीके से पूरा करने तथा सभी 15 रेडियल गेटों की मानसून पूर्व टेस्टिंग सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि जल संग्रहण से पूर्व सभी तकनीकी मानकों और सुरक्षा प्रक्रियाओं का पालन अनिवार्य रूप से किया जाए।नहर निर्माण की प्रगति की समीक्षा करते हुए अधिकारियों ने दांयी मुख्य नहर में आरडी 0 से 1.30 किमी तक चल रहे ब्लास्टिंग एवं खुदाई कार्य को तेज करने, आरडी 1.30 से 2.80 किमी तक ब्लास्टिंग कार्य प्रारंभ करने तथा आरडी 0 से 10 किमी तक स्थित महत्वपूर्ण संरचनाओं को आगामी तीन माह में पूर्ण करने के निर्देश दिए। वहीं बांयी मुख्य नहर में आरडी 0.00 से 52.00 किमी तक कार्य शीघ्र पूर्ण करने के निर्देश भी संवेदक को दिए गए। परियोजना की विशेषताएं परियोजना की प्रमुख विशेषताओं की बात करें तो परवन बांध का उद्देश्य क्षेत्र के 1821 गांवों को पेयजल एवं सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराना है। परियोजना के तहत 8.708 किलोमीटर लंबी देश की सबसे बड़ी जल सुरंग का निर्माण अकावद (झालावाड़) से गुदलई (बारां) तक किया गया है। बांध की भराव क्षमता 490 मिलियन क्यूबिक मीटर है, जबकि दीर्घकालीन लक्ष्य के रूप में यह परियोजना 2.01 लाख हेक्टेयर भूमि की सिंचाई करने में सक्षम होगी। करीब 3500 करोड़ रुपये की लागत से बन रही इस परियोजना में 17 गांवों के पुनर्वास की योजना भी शामिल है। प्रशासन का फोकस अब जल संग्रहण प्रक्रिया को चरणबद्ध, सुरक्षित और वैज्ञानिक तरीके से लागू करने पर है। जल भराव से प्रभावित क्षेत्रों की निगरानी, पुनर्वास कार्यों की प्रगति और सुरक्षा मानकों का पालन सुनिश्चित किया जा रहा है। समग्र रूप से देखा जाए तो परवन बांध परियोजना अब अपने निर्णायक चरण में पहुंच चुकी है। यदि इस वर्ष जल संग्रहण प्रारंभ होता है, तो यह परियोजना न केवल क्षेत्र के किसानों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी, बल्कि हाड़ौती अंचल की कृषि और जल प्रबंधन व्यवस्था में भी बड़ा बदलाव लाने वाली साबित होगी।