मरुधरा में पारा 45 डिग्री के पास पहुंच गया है, लेकिन संभाग के सबसे बड़े पीबीएम अस्पताल का प्रबंधन गहरी नींद में है। अस्पताल का ट्रॉमा सेंटर इन दिनों किसी भट्ठी से कम नहीं है। हालात यह हैं कि जिस मरीज को मरहम की जरूरत है, उसे भीषण गर्मी का टॉर्चर झेलना पड़ रहा है। ट्रॉमा के इमरजेंसी, ग्रीन और येलो एरिया से पंखे तक गायब हैं, छत पर सिर्फ खाली पाइप लटक रहे हैं। अस्पताल की सुरक्षा और प्रबंधन पर बड़ा सवाल यह है कि पिछले दो महीनों में ए-ब्लॉक ओटी, नर्सरी और ट्रॉमा सहित विभिन्न विभागों से करीब 50 एसी के कॉपर वायर चोरी हो गए। ईएमडी शाखा ने अधीक्षक को रिपोर्ट सौंप दी, लेकिन अब तक पुलिस में एफआईआर दर्ज नहीं कराई गई। हैरानी की बात यह है कि कैंपस में करीब 1500 एसी होने के बावजूद मेंटेनेंस के नाम पर ठेकेदार और श्रमिक नदारद हैं। पीबीएम में संवेदनहीनता का आलम यह है कि मेडिकल कॉलेज प्रिंसिपल, अधीक्षक और सभी एचओडी के कमरों में एसी फुल स्पीड पर चल रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर ऑपरेशन थिएटर में डॉक्टरों के पसीने छूट रहे हैं। पोस्ट ऑपरेटिव वार्ड में एसी बंद हैं। भास्कर इनसाइट - 2 साल से एएमसी ही नहीं, अब भामाशाहों का इंतजार ट्रॉमा का कूलिंग प्लांट 10 साल पुराना है। 2 साल से इसका एनुअल मेंटेनेंस कॉन्ट्रैक्ट (एएमसी) ही नहीं हुआ। पहले भामाशाह इसका खर्च उठा रहे थे, लेकिन पिछले साल जब से पीबीएम ने इसे संभाला, मेंटेनेंस अटक गई। कैजुअल्टी ब्लॉक के प्लांट को ठीक करने के लिए महज 2 लाख रुपए की जरूरत है, लेकिन प्रशासन इसके लिए भी किसी भामाशाह की राह देख रहा है। हार्ट हॉस्पिटल की इमरजेंसी भी तप रही हल्दीराम मूलचंद हार्ट हॉस्पिटल की इमरजेंसी के भी एसी खराब पड़े हैं। फॉल्स सीलिंग तक उखड़ी हुई है। हृदय रोगियों को इस भीषण गर्मी में भारी परेशानी होती है। दरअसल हार्ट हॉस्पिटल में चीलिंग प्लांट लगा हुआ है, लेकिन उसकी सप्लाई इमरजेंसी में नहीं है। वहां लगे ज्यादातर एसी खराब हैं। पीड़ा: क्या ट्रॉमा सेंटर ऐसा होता है? हादसे में घायल रोहित के भाई हिमांशु टाक ने बताया कि सेंटर में इतनी गर्मी थी कि घाव पर पसीने की बूंद गिरते ही भाई तड़प उठता था। इमरजेंसी में एसी तो दूर, पंखे तक नहीं थे। "गर्मी को देखते हुए ईएमडी को निर्देश दे दिए हैं। ठेकेदार को पाबंद किया जाएगा। ट्रॉमा कूलिंग प्लांट के लिए टेंडर प्रक्रिया जारी है।” -डॉ. बीसी घीया, अधीक्षक, पीबीएम "प्लांट 10 साल पुराना है। गारंटी खत्म होने के बाद भामाशाह मेंटेनेंस देख रहे थे। अब इसे ठीक कराने के लिए अधीक्षक को लिखा है।” -डॉ. बीएल खजोटिया, प्रभारी, ट्रॉमा सेंटर