सामाजिक सुरक्षा पेंशन योजना के तहत वार्षिक सत्यापन (Annual Verification) की प्रक्रिया अंतिम चरणों में है, लेकिन जिले के करीब 29 हजार पेंशनर्स का अब तक वार्षिर्ष सत्यापन ही नहीं हो सका है। सत्यापन प्रक्रिया पूरी न करने पर इन पेंशनर्स की पेंशन रोकी जा सकती है। विभाग कर रहा है निरंतर प्रयास सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता विभाग के उपनिदेशक डॉ. पवन पूनिया का कहना है कि विभाग सौ फीसदी सत्यापन का लक्ष्य हासिल करने के लिए अपनी ओर से भरसक प्रयास कर रहा है। 5–6 दिन में सत्यापन की प्रक्रिया पूरी कर ली जाएगी। सत्यापन प्रक्रिया तेज करने के लिए जिला कलेक्टर, सीईओ, ग्राम सेवकों और पटवारियों को पत्र लिखकर अवगत करवाया गया है और लगातार फॉलोअप किया जा रहा है। पूनिया के मुताबिक हमने कलेक्टर, सीईओ, ग्राम सेवकों और पटवारियों सबको चिट्ठियां भेजी हैं, मैसेज किए हैं और उन्हें स्थिति की गंभीरता बताई है। हमारी कोशिश है कि ज्यादा से ज्यादा लोगों का सत्यापन समय रहते पूरा हो सके। 89.78 प्रतिशत ने करवाया सत्यापन जिले में कुल पेंशनर्स की संख्या 2,82,954 है। इनमें से 2,54,049 (89.78%) पेंशनर्स का सत्यापन हो चुका है। लेकिन अब भी 28,905 पेंशनर्स का सत्यापन लंबित है | आयु के अनुसार पेंडिंग डेटा शहर के मुकाबले ग्रामीण क्षेत्र आगे पेंशन योजना में ग्रामीण क्षेत्रों में सत्यापन की दर शहरी क्षेत्रों की तुलना में बेहतर है। यहां 90 फीसदी से ज्यादा सत्यापित पेंशन लाभार्थी हैं। ग्रामीण क्षेत्र : खेतड़ी सबसे पिछड़ा, उदयपुरवाटी भी पीछे उपनिदेशक डॉ. पूनिया ने बताया कि जिले के खेतड़ी और उदयपुरवाटी ब्लॉक में सत्यापन की दर सबसे कम है। ऐसे ही शहरी क्षेत्रों में झुंझुनू नगर परिषद और नवलगढ़ नगरपालिका में भी पेंडेंसी सबसे अधिक है, जिसे कम करने के प्रयास किए जा रहे हैं। शहरी क्षेत्र