फलोदी में राजस्थान महिला एवं बाल विकास कर्मचारी संघ शाखा के तत्वाधान में शुक्रवार को आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं ने विरोध प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी विभिन्न मांगों को लेकर जिले के सभी आंगनवाड़ी केंद्र बंद रखे और नगर परिषद से जिला कलेक्ट्रेट तक पैदल मार्च निकाला। जिला कलेक्टर को प्रधानमंत्री और मुख्यमंत्री के नाम एक ज्ञापन भी सौंपा गया। स्थायी कर्मचारी का दर्जा देने की मांग ज्ञापन में बताया गया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ता और सहायिकाएं बच्चों, गर्भवती महिलाओं और धात्री माताओं के स्वास्थ्य, पोषण, टीकाकरण और प्रारंभिक शिक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। वे विभिन्न सरकारी योजनाओं के प्रभावी संचालन में भी सहायक हैं। इसके बावजूद, उन्हें उनके कार्य के अनुरूप पर्याप्त मानदेय और स्थायी कर्मचारी का दर्जा नहीं मिल पाया है। प्रदर्शनकारियों ने मांग की कि प्रदेश की सभी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को नियमित (स्थायी) कर्मचारी का दर्जा दिया जाए। साथ ही, उनका मासिक मानदेय बढ़ाकर 25 से 30 हजार रुपये किया जाए और सेवा पूर्ण होने पर सम्मानजनक पेंशन का लाभ दिया जाए। पदोन्नति देने की मांग ज्ञापन में बताया कि आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं से आईसीडीएस के अतिरिक्त अन्य विभागों के कार्य न कराए जाएं। इसके अलावा, 15 वर्ष या उससे अधिक सेवा पूरी कर चुकी आंगनवाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं को उनकी योग्यता के अनुसार सुपरवाइजर पद पर पदोन्नति दी जाए। ये रहे मौजूद इस प्रदर्शन के दौरान कर्मचारी यूनियन संघ की जिलाध्यक्ष प्रेमलता जीनगर, उपाध्यक्ष सरोज भाटी, कोषाध्यक्ष श्यामा थानवी सहित नखतू, निरमा, रितु शर्मा, सविता मेघवाल, धापू शर्मा, सुशीला, रिंकू, पिंकी, खम्मा और बड़ी संख्या में आंगनवाड़ी कार्यकर्ता एवं सहायिकाएं मौजूद रहीं।