शहर में रूडीप और पीएचईडी के बीच समन्वय की कमी का खामियाजा अब आम जनता को भुगतना पड़ेगा। पुराने शहर की संकरी गलियों में सीवरेज प्रोजेक्ट के तहत बनाए गए मैनहोल के ठीक बीचों-बीच से पीने के पानी की पाइपलाइनें गुजार दी गई हैं। यह लापरवाही इतनी गंभीर है कि यदि कभी भी सीवरेज लाइन चोक हुई या पेयजल पाइपलाइन में लीकेज हुआ, तो लोगों के घरों में सीधे गटर का पानी सप्लाई होगा। शहर के आजाद चौक, खत्रियों का वास, चंचल प्राग मठ, मेघवाल खागली, आचार्यों का वास, जवाहर चौक, गायत्री चौक, पुरानी सब्जी मंडी, ढाणी बाजार, पीपली चौक और जैन न्याति नोहरा जैसे मोहल्लों में स्थिति विकट है। अधिकारियों के पास समाधान नहीं, एक दूसरे पर आरोप लगाने में उलझे इस बड़ी चूक पर सुधार करने के बजाय दोनों विभाग एक-दूसरे को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। पीएचईडी का तर्क है कि हमारी पाइपलाइनें वर्षों पुरानी हैं। रूडीप ने जानबूझकर उनके ऊपर ही मैनहोल बना दिए। रूडीप का दावा ​है कि हमने सीवरेज लाइन और मैनहोल पहले बनाए, पाइप लाइनें इनके अंदर से निकाल दीं। हमने उन्हें लाइन शिफ्ट करने के लिए पत्र लिखा है। भास्कर नॉलेज - सीवरेज की गैस पाइप गला देगी सिविल इंजीनियरिंग व पब्लिक हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार सीवरेज के मैनहोल के भीतर से पेयजल पाइपलाइन का गुजरना किसी भी मानक के अनुरूप नहीं है। इसे 'क्रॉस-कंटामिनेशन रिस्क' कहा जाता है। इसके बड़े खतरे हैं। पानी की सप्लाई बंद होने पर पाइपलाइनों में वैक्यूम बनता है। अगर मैनहोल में गंदा पानी भरा है और पाइप के जोड़ जरा भी ढीले हैं, तो यह वैक्यूम गंदे पानी को खींचकर सीधे पीने के पानी में मिला देगा। सीवरेज की गैसें पाइपों को तेजी से गला देती हैं, जिससे लीकेज की संभावना बढ़ जाती है। सबसे गंभीर खतरा शहर में पीलिया, हैजा और टाइफाइड जैसी बीमारियां फैलने का डर रहेगा। “पीएचईडी ने मैनहोल के अंदर से पाइप लाइन निकाली है। हमने उन्हें पत्र लिखकर लाइनों को शिफ्ट करने या लूप सिस्टम से घुमाने को कहा है।” -अशोक कुमार, एक्सईएन, रूडीप “हमारी लाइनें पहले से बिछी हुई थीं, रूडीप ने उनके ऊपर मैनहोल खड़े कर दिए।” - बिजेंद्र मीणा, एक्सईएन, नगरखंड पीएचईडी