पिंडवाड़ा के आदर्श विद्या मंदिर उच्च माध्यमिक स्कूल की कक्षा 11 की छात्रा एंजेल कंवर डाबी का दुनिया के पहले ऑल-गर्ल्स अंतरराष्ट्रीय चंद्र उपग्रह मिशन 'शक्तिसैट' (ShakthiSAT) के लिए चयन हुआ है। इसरो और नीति आयोग के अटल इनोवेशन मिशन समर्थित इस कार्यक्रम के तहत एंजेल अक्टूबर 2026 में सैटेलाइट इंजीनियरिंग और स्पेसक्राफ्ट डिजाइन का प्रशिक्षण लेंगी। उनकी इस उपलब्धि पर वनवासी कल्याण परिषद और विश्व हिंदू परिषद ने संयुक्त रूप से उनका सम्मान किया। सम्मान समारोह में किया अभिनंदन पिंडवाड़ा में आयोजित कार्यक्रम में एंजेल को उपरना ओढ़ाकर और स्मृति चिन्ह भेंट कर सम्मानित किया गया। इस अवसर पर स्कूल के प्रिंसिपल सुरेन्द्र सिंह भाटी ने कहा कि एंजेल की उपलब्धि क्षेत्र के विद्यार्थियों के लिए प्रेरणास्रोत है। मार्गदर्शक शिक्षक चेतन कुमार प्रजापत ने बताया कि एंजेल ने अंतरिक्ष विज्ञान से जुड़े 21 मॉड्यूल और 365 पाठ सफलतापूर्वक पूरे किए हैं, जिसके आधार पर उनका चयन इस प्रतिष्ठित कार्यक्रम के लिए हुआ। परिजन और गणमान्य रहे मौजूद सम्मान समारोह में एंजेल के पिता जसवंत सिंह डाबी, अशोक रावल, भंवर राठौड़, रंजीत सिंह डाबी सहित कई गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे। क्या है 'शक्तिसैट' मिशन? 'शक्तिसैट (ShakthiSAT)' चेन्नई स्थित एयरोस्पेस स्टार्टअप स्पेस किड्ज इंडिया द्वारा शुरू किया गया दुनिया का पहला ऑल-गर्ल्स अंतरराष्ट्रीय चंद्र उपग्रह मिशन है। इसे इसरो (ISRO) और IN-SPACe का समर्थन प्राप्त है। मिशन का उद्देश्य STEM (विज्ञान, प्रौद्योगिकी, इंजीनियरिंग और गणित) शिक्षा को बढ़ावा देना और 108 देशों की 12,000 बालिकाओं को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी में प्रशिक्षित करना है। 108 देशों की छात्राओं को मिलेगा अवसर इस वैश्विक कार्यक्रम के तहत प्रत्येक भाग लेने वाले देश से एक छात्रा का चयन किया जाता है। चयनित छात्राएं भारत आकर उपग्रह निर्माण, पेलोड विकास और अंतरिक्ष यान प्रणालियों का व्यावहारिक प्रशिक्षण प्राप्त करती हैं। इनके सहयोग से विकसित उपग्रह को भविष्य के चंद्र अभियानों के साथ चंद्रमा की कक्षा में भेजने की योजना है।