जिले में युवा पीढ़ी को तंबाकू उत्पादों के दुष्प्रभावों से बचाने और तंबाकू नियंत्रण कानूनों के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए शुक्रवार को पुलिस अधिकारियों की एक कार्यशाला आयोजित की गई। यह कार्यशाला पुलिस विभाग, चिकित्सा एवं स्वास्थ्य विभाग और एसआरकेपीएस राजस्थान के संयुक्त तत्वावधान में हुई। कार्यशाला में जिले के सभी पुलिस अधिकारियों को सिगरेट एवं अन्य तंबाकू उत्पाद अधिनियम, 2003 (कोटपा) के प्रावधानों की विस्तृत जानकारी दी गई। इस दौरान अवैध हुक्का बारों और ई-सिगरेट के विरुद्ध प्रभावी कार्रवाई सुनिश्चित करने पर विशेष जोर दिया गया। शिक्षित रोजगार केंद्र प्रबंधक समिति राजस्थान के राज्य समन्वयक हिरेंद्र सेवदा ने कोटपा अधिनियम की विभिन्न धाराओं की जानकारी दी। उन्होंने बताया कि सार्वजनिक स्थानों पर धूम्रपान, तंबाकू उत्पादों का विज्ञापन एवं प्रचार, नाबालिगों को तंबाकू उत्पादों की बिक्री और शिक्षण संस्थानों के 100 गज के दायरे में तंबाकू उत्पादों की बिक्री कानूनन प्रतिबंधित है। सेवदा ने हुक्का बार और ई-सिगरेट से संबंधित कानूनी प्रावधानों और उल्लंघन की स्थिति में की जाने वाली कार्रवाई के बारे में भी विस्तार से बताया। कार्यशाला को संबोधित करते हुए पुलिस अधीक्षक रतन सिंह राठौड़ ने सभी पुलिस अधिकारियों को कोटपा अधिनियम के प्रभावी क्रियान्वयन सुनिश्चित करने के निर्देश दिए। उन्होंने कहा कि युवाओं को नशे की लत से बचाने के लिए तंबाकू नियंत्रण कानूनों की सख्ती से पालना आवश्यक है और उल्लंघन करने वालों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जानी चाहिए। कार्यशाला के अंत में तंबाकू उपचार एवं मुक्ति केंद्र, ब्यावर की डॉ. कंचन ने तंबाकू सेवन करने वाले लोगों से उपचार एवं परामर्श प्राप्त करने की अपील की। उन्होंने बताया कि जिला अस्पताल स्थित तंबाकू उपचार एवं मुक्ति केंद्र पर निःशुल्क परामर्श एवं सहायता उपलब्ध है, जहां तंबाकू की लत छोड़ने के इच्छुक व्यक्ति संपर्क कर सकते हैं।