प्रदेश के उदयपुर जिले में परमाणु खनिजों का बड़ा भंडार मिलने की उम्मीद है। इसे देखते हुए राज्य सरकार के खान एवं पेट्रोलियम विभाग ने उदयपुर की भींडर तहसील के 10 वर्ग किलोमीटर (6250 बीघा से अधिक) क्षेत्र को अगले 5 साल के लिए पूरी तरह रिजर्व कर दिया है। अब इस पूरे इलाके में केवल ’परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय’ ही विस्तृत सर्वे और खोज का काम करेगा। परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) देश भर में परमाणु ऊर्जा और बिजली बनाने के लिए जरूरी रेडियोधर्मी खनिजों की खोज करता है। उदयपुर के इस विशेष बेल्ट (जैसे निवानिया क्षेत्र) में कार्बोनेटाइट चट्टानें पाई जाती हैं, जिनमें प्राकृतिक रूप से यूरेनियम, थोरियम और अन्य महत्वपूर्ण रेडियोधर्मी पदार्थों की सांद्रता होने की उच्च संभावना होती है। कहां, कितना एरिया रिजर्व? इस भूमि पर नए आवेदन स्वीकृत नहीं नए आवेदन रद्द होंगे, पुराने विचार योग्य नहीं परमाणु खनिज रियायती नियम, 2016 के तहत सरकार ने इस क्षेत्र के लिए कड़े निर्देश जारी किए हैं:आवेदन निरस्त: इस 10 वर्ग किमी के ब्लॉक में अन्य किसी भी खनिज के लिए पेंडिंग पड़े खनन पट्टा और क्वारी लाइसेंस के आवेदनों को तुरंत निरस्त माना जाएगा। साथ ही नए काम पर रोक रहेगी। यानी अब यहां किसी भी नए प्राइवेट माइनिंग या लीज के आवेदन पर विचार नहीं होगा। हालांकि, जिन कारोबारियों के खनन पट्टे या क्वारी लाइसेंस इस क्षेत्र में पहले से स्वीकृत या चालू हैं, उन पर यह रोक लागू नहीं होगी। इस पूरे प्रोजेक्ट का नक्शा और विस्तृत जानकारी आम जनता के देखने के लिए अधीक्षण भू-वैज्ञानिक (फॉस्फेट) कार्यालय उदयपुर, खनि अभियंता कार्यालय और खान एवं भूविज्ञान निदेशालय उदयपुर में उपलब्ध करवा दी गई है। भास्कर एक्सपर्ट - प्रदीप अग्रवाल, रि. एडि. डायरेक्टर भू विज्ञान परमाणु खनिज अन्वेषण एवं अनुसंधान निदेशालय (एएमडी) इस काम को अंजाम दे रहा है और ये भूमि कब तक रिजर्व रहेगी, ये एएमडी पर ही निर्भर करेगा। वो चाहे तो अपना काम तीन साल में भी पूरा कर सकता है। अब तक एएमडी ने ने करीब 200 जगह इस तरह की वर्किंग प्रदेश में की है। हालांकि सफलता सिर्फ श्री माधोपुर सुहेल में ही मिली है। अब देखते कि यहां पर खुदाई में क्या मिलता है। उम्मीद है सफलता मिलेगी क्योंकि संकेत तो पहले ही मिल चुके थे।