राहुल पंड्या | डूंगरपुर जिले में मनरेगा की पारदर्शिता अब तकनीक के नाम पर मज़ाक बनती दिख रही है। रेटिना आधारित हाजिरी जैसी सख्त व्यवस्था भी जमीनी स्तर पर फेल हो चुकी है। भास्कर पड़ताल में खुलासा हुआ है कि नियमों को दरकिनार कर मोबाइल में सेव पुराने वीडियो और तस्वीरों के जरिए मजदूरों की फर्जी उपस्थिति दर्ज कर भुगतान निकाला जा रहा है। लाइव रेटिना स्कैन के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है। कई कार्यस्थलों पर मजदूरों को बुलाया ही नहीं जा रहा। मेट और संबंधित कार्मिक वीडियो कॉलिंग या पहले से रिकॉर्डेड फोटो-वीडियो के जरिए उपस्थिति दर्ज कर एमएनएस पोर्टल पर एडिटेड फोटो अपलोड करके भुगतान निकालने की प्रक्रिया पूरी कर रहे हैं। पड़ताल में यह भी सामने आया कि कई योजनाओं में कागजों में दर्जनों मजदूर कार्यरत दिखाए गए। जबकि, पोर्टल पर अपलोड तस्वीरों में केवल एक-दो लोग ही नजर आते हैं। सबसे चौंकाने वाली बात यह है कि कई महिला मजदूरों की हाजिरी घर बैठे ही दर्ज कर दी गई। जबकि, मस्टररोल में उन्हें कार्यस्थल पर काम करते दिखाया गया है। केस 4: इंदोड़ा के ग्रामीणों ने बताया कि पंचायत जिम्मेदारों के चहेतों और परिवार के खातों में नरेगा राशि का घर बैठे ही भुगतान किया जा रहा है। इसमें बताया कि 85 वर्ष की बुजुर्ग महिला व सरपंच के रिश्तेदार जो कि राजकीय सेवारत हैं, फिर भी उनके परिवार के खाते भुगतान जा रहा है। पड़ताल में सामने आया कि सुबह केवल औपचारिक उपस्थिति दर्ज कर ली जाती है, जबकि शाम को मजदूरों को बिना काम के सिर्फ हाजिरी के लिए बुलाया जाता है। इससे न तो काम की गुणवत्ता सुधर रही है और न ही मजदूरों को कौशल विकास का लाभ मिल रहा है। इस पूरे मामले में पंचायत स्तर से लेकर जिला स्तर तक निगरानी तंत्र की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है। हालांकि, भास्कर पड़ताल में सामने आए इन मामलों में अभी तक भुगतान जारी नहीं हुआ है, लेकिन जिस तरह से डिजिटल सिस्टम में छेड़छाड़ हो रही है, उसने योजना की विश्वसनीयता पर बड़ा सवाल खड़ा कर दिया है। ^एमएमएस पोर्टल से जांच करवाई जाएगी। इस तरह कार्य करना गलत है। इसकी तथ्यात्मक रिपोर्ट लेकर संबंधित ग्राम पंचायत की जांच कराई जाएगी। हुकुमचंद बैरवा, विकास अधिकारी, पंचायत समिति आसपुर। केस-1: आसपुर पंचायत समिति की पूंजपुर में श्मशान घाट से नलवा तक सड़क कार्य (वर्क कोड 2727002123/आरसी/जीआई एस/107415, मस्टरोल-2984) में 22 अप्रैल को 9 महिलाओं की उपस्थिति दर्ज की गई। इसमें एक महिला का फोटो वीडियो कॉल से दर्ज किया। केस-2: आसपुर क्षेत्र में भास्कर टीम को कार्यस्थल पर केवल 3 मजदूर मिले, जबकि मस्टरोल में 6 मजदूर दर्ज थे। मौके पर मेट भी अनुपस्थित मिला। , सुबह के समय ऑनलाइन हाजरी नहीं भरी गई। केस-3: पूंजपुर में ऐसे मजदूरों की उपस्थिति दर्ज मिली, जो रोज़गार के लिए बाहर पलायन कर चुके हैं। इसके बावजूद उनकी फोटो के आधार पर नरेगा में हाजिरी लगाई जा रही है और भुगतान सीधा उनके खाते में किया जा रहा है। इसमें मेट से मुनाफे की आधी रेट पर वसूली की जा रही है।