पंजाब के राज्यपाल और चंडीगढ़ प्रशासक गुलाबचंद कटारिया शुक्रवार को उदयपुर आए हैं। डबोक एयरपोर्ट पहुंचने पर उनका जोरदार स्वागत किया। कटारिया के स्वागत को शक्ति प्रदर्शन के तौर पर देखा जा रहा है। कटारिया दोपहर करीब 12:10 बजे महाराणा प्रताप एयरपोर्ट पहुंचे। जहां पहले से तैयार सैंकड़ों कार्यकर्ताओं ने उन्हें फूलमालाओं से लाद दिया। एयरपोर्ट के एग्जिट गेट से लेकर हाईवे तक जगह-जगह उनका स्वागत किया गया। शहर विधायक ताराचंद जैन के नेतृत्व में किया स्वागत कटारिया के लिए शहर से दर्जनों वाहनों में भरकर कार्यकर्ता उनका स्वागत करते हुए जयकारे लगाते रहे। कार्यकर्ताओं के बीच ढोल-नगाडे़ बजाए गए और वाहन रैली के रूप में सब बाहर निकले। इस स्वागत अभियान का जिम्मा शहर विधायक ताराचंद जैन ने संभाला। शहर विधायक जैन के नेतृत्व में पिछले 2 दिनों से इस स्वागत को ऐतिहासिक बनाने की तैयारियां की जा रही थी। इस स्वागत में सिर्फ शहर से नहीं बल्कि उदयपुर जिले की अलग-अलग विधानसभाओं से भी कार्यकताओं को बुलाया गया था। वाहन रैली के बाद कटारिया कैलाशपुरी गए, जहां वे एक कार्यक्रम में शामिल हुए। शहर कार्यकारिणी से जुडे़ बडे़ पदाधिकारी नहीं पहुंचे हालांकि स्वागत में कार्यकारिणी से जुडे़ बडे़ पदाधिकारी नहीं पहुंचे। वरिष्ठ नेता प्रमोद सामर, शहर जिलाध्यक्ष गजपाल सिंह, पारस सिंघवी समेत कई बडे़ पदाधिकारी इसमें शामिल नहीं हुए। हालांकि जिला कार्यकारिणी के कुछ छोटे पदों के पदाधिकारी जरूर शामिल हुए। एयरपोर्ट पर गोगुंदा विधायक प्रताप गमेती, वल्लभनगर विधायक उदयलाल डांगी, ग्रामीण विधायक फूलसिंह मीणा, पूर्व महापौर जीएस टांक, गीता पटेल भी पहुंचे। वहीं, देहात जिलाध्यक्ष पुष्कर तेली, पूर्व शहर जिलाध्यक्ष जिलाध्यक्ष रवीन्द्र श्रीमाली, पूर्व देहात जिलाध्यक्ष चन्द्रगुप्त सिंह चौहान और प्रदेश कार्यसमिति सदस्य अतुल चंडालिया भी पहुंचे। अन्य नेताओं में पूर्व उपमहापौर महेंद्र सिंह शेखावत, अनिल सिंघल, रामकृपा शर्मा भी कटारिया के स्वागत के लिए आए थे। वहीं शहर जिला कार्यकारिणी के करीब 7 से ज्यादा मंडलों के अध्यक्ष और पदाधिकारी अपने कार्यकर्ताओं के साथ एयरपोर्ट पहुंचे। संगठन की कुर्सी की चाहत और दांव पर साख! दरअसल, उदयपुंर एयरपोर्ट पर हुआ भव्य स्वागत एक ‘मूक शक्ति प्रदर्शन’ था। सूत्रों के अनुसार इस प्रदर्शन का सबसे दिलचस्प मोड़ शहर जिलाध्यक्ष पद की दावेदारी है। बीजेपी के 8-10 संभावित दावेदार महज स्वागत करने नहीं पहुंचे थे, बल्कि वे अपनी उपस्थिति दर्ज कराकर शक्ति प्रदर्शन भी पहुंचे। असल में बीजेपी नेत्री के वीडियोकांड "उदयपुर फाइल्स" के बहाने संगठन के वर्तमान पदाधिकारियों की कमज़ोर होती स्थिति ने नए चेहरों के लिए रास्ता खोल दिया है। कटारिया गुट के ये दावेदार जानते हैं कि भले ही वे राज्यपाल की संवैधानिक भूमिका में हों लेकिन उदयपुर भाजपा की चाबी आज भी उन्हीं के ‘आशीर्वाद’ से घूमती है। उदयपुर में आज बीजेपी के बने दो गुट! हाल ही में हुए कथित ‘वीडियोकांड’ ने पार्टी के अंदर हल्की दरार को एक गहरी खाई में बदल दिया है। एक महिला भाजपा नेता की ओर से दर्ज मुकदमे ने न केवल संगठन की छवि पर सवाल उठाए, बल्कि पार्टी को दो स्पष्ट धड़ों में खुलकर बांट दिया है। संगठन में पदस्थ एक धड़ा- मौजूदा पदाधिकारी जो आरोपों के घेरे में हैं और खुद को राजनीतिक साज़िश का शिकार बता रहे हैं। दूसरा धड़ा- वे जो शुचिता की दुहाई देकर मौजूदा नेतृत्व को बदलने की ताक में हैं।