चंबल नदी के किनारे रविवार को पानी भरने के दौरान घूसई गांव निवासी पशुपालक पूरण मीना (50) को एक मगरमच्छ पानी में खींच ले गया। उसकी चीख सुनकर उसके साथी प्यारेलाल मीना ने जान जोखिम में डालकर उसे मगरमच्छ के चंगुल से छुड़ाया। रविवार दोपहर करीब एक बजे पूरण मीना अपनी बकरियों को चंबल नदी पर पानी पिलाने गया था। बकरियों को पानी पिलाने के बाद वह खुद पीने के लिए बोतल में पानी भर रहा था। तभी पानी में पहले से घात लगाए बैठे करीब दस फीट लंबे मगरमच्छ ने अचानक हमला कर दिया। उसने पूरण का हाथ अपने जबड़े में जकड़ लिया और उसे करीब 20 फीट गहरे पानी में ले जाकर डुबोने के लिए उसे झटके देने लगा। पूरण संघर्ष करता रहा और मदद के लिए चिल्लाया। कुछ दूरी पर मौजूद उसका साथी प्यारेलाल मीना हाथ में लाठी लेकर पानी में कूद पड़ा। एक ओर वह पूरण का हाथ पकड़कर बाहर खींच रहा था, दूसरी ओर मगरमच्छ उसे अंदर खींच रहा था। हालात बिगड़ते देख प्यारेलाल ने सूझबूझ दिखाई और मगरमच्छ की आंख पर जोरदार लाठी मारी। चोट लगते ही मगरमच्छ ने पूरण का हाथ छोड़ दिया और गहरे पानी में चला गया। इसी तकनीक से इलाके में पहले भी कई लोग मगरमच्छ के हमले से अपनी जान बचा चुके हैं।हमले में पूरण का एक हाथ बुरी तरह जख्मी हो गया। उसे तत्काल करणपुर अस्पताल पहुंचाया गया, जहां प्राथमिक उपचार के बाद डॉक्टर रामराज मीणा ने गंभीर हालत देखते हुए जिला अस्पताल करौली रेफर कर दिया। अस्पताल में उपचार के दौरान पूरण मीना ने बताया, “मगरमच्छ ने इतनी तेजी से हाथ पकड़ा कि संभलने का मौका ही नहीं मिला। वह मुझे लगातार पानी के अंदर खींच रहा था। सांस फूलने लगी थी और लगा कि अब बच्चों का चेहरा दोबारा नहीं देख पाऊंगा। मैंने पूरी ताकत से प्यारेलाल को आवाज लगाई। अगर वह पानी में नहीं कूदता और मगरमच्छ की आंख पर लाठी नहीं मारता तो आज मैं जिंदा नहीं बचता। वह मेरे लिए भगवान बनकर आया।” पूरण पर हमले के करीब दो घंटे बाद उसी मगरमच्छ ने घूसई गांव की सरस्वती वैरवा की भैंस पर भी हमला कर दिया।