अंतरराष्ट्रीय किडनी ट्रांसप्लांट मामले में जिन 4 बांग्लादेशियों को पुलिस ने आरोपी बनाया, चार्जशीट में नामजद किया और जो 17 महीने से जेल में हैं, अब उन्हें ही सरकारी गवाह बनाकर क्लीन चिट देने की कवायद शुरू हो गई है। मामला मई 2024 में जवाहर सर्किल थाने में दर्ज हुआ था। इसमें बांग्लादेश के आजाद हुसैन और मेहंदी हसन शमीम (डोनर) और अहसान-उल-कोबिर और नूरुल इस्लाम (रिसीवर) को मुख्य आरोपी बनाया गया था। अब इन्हें वादा माफ गवाह बना दिया गया है। सबसे बड़ा सवाल यह है कि पुलिस ने कोर्ट से इन चारों पर ऐसी कोई स्पष्ट शर्त नहीं लगवाई कि वे अपराध के हर तथ्य का पूरा और सच्चा खुलासा करेंगे। नियमानुसार, धारा 306(1) सीआरपीसी के तहत माफी तब दी जाती है, जब आरोपी अपराध से जुड़े सभी तथ्य पूरी तरह उजागर करने का वादा करे। धारा 306(4) में अदालत में बयान दर्ज होना भी जरूरी होता है, लेकिन ऐसा नहीं किया। इसी आधार पर जांच की निष्पक्षता पर सवाल उठ रहे हैं। मामले की जांच एडीसीपी क्राइम श्रीमन लाल मीणा कर रहे हैं। इनका कहना है कि डोनर और रिसीवर को सरकारी गवाह बनाया है। बता दें कि दैनिक भास्कर ने 2024 में सिलसिलेवार इस मामले का खुलासा किया था। भास्कर एक्सपर्ट- केस आगे बढ़ाने को पुलिस बनाती है सरकारी गवाह हाईकोर्ट के एडवोकेट कपिल गुप्ता का कहना है कि गंभीर अपराधों में पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिलते हैं, तो आरोपियों में से ही किसी को सरकारी गवाह बनाकर नेटवर्क का खुलासा कराया जाता है। इससे केस की ट्रायल साक्ष्यों के आधार पर आगे बढ़ती और आरोपियों को सजा में राहत मिल सकती है। मास्टरमाइंड अब भी फरार मामले का मास्टरमाइंड बताया जा रहा झारखंड का मुख्य दलाल मो. मुर्तजा अंसारी अब भी गिरफ्त से बाहर है। कुल 6 आरोपी बचे हैं। फोर्टिस अस्पताल के डॉ. संदीप गुप्ता, डॉ. जितेंद्र गोस्वामी, नर्सिंग स्टाफ भानू लववंशी, ऑर्गन को-ऑर्डिनेटर विनोद सिंह, ईएचसीसी अस्पताल के ऑर्गन को-ऑर्डिनेटर अनिल जोशी और एसएमएस के सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह। 3 डॉक्टरों को क्लीन चिट डॉ. सुधीर भंडारी, डॉ. राजीव बगरहट्टा और डॉ. अचल शर्मा को सरकार क्लीन चिट दे चुकी है। डॉ. भंडारी उस समय स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट ऑर्गेनाइजेशन के चेयरमैन, डॉ. बगरहट्टा स्टेट ऑथराइजेशन कमेटी के चेयरमैन और डॉ. अचल शर्मा एसएमएस के अधीक्षक थे। सरकार ने स्टेट ऑथराइजेशन कमेटी के तत्कालीन को-ऑर्डिनेटर डॉ. राजेंद्र बागड़ी और सहायक प्रशासनिक अधिकारी गौरव सिंह को दोषी माना। टोहो एक्ट निरस्त, आईपीसी में चल रही ट्रायल मानव अंग प्रत्यारोपण निदेशालय की डॉ. रश्मि गुप्ता की शिकायत पर 17 मई 2024 को जवाहर सर्किल थाने में केस दर्ज किया गया था। एडीसीपी क्राइम को टोहो एक्ट में प्राधिकृत अधिकारी बनाया गया। उन्होंने आईपीसी व टोहो एक्ट में संयुक्त चार्जशीट पेश की, जिसमें चारों बांग्लादेशियों को आरोपी बताया था। कोर्ट ने प्रसंज्ञान आदेश में चारों को आरोपी माना और केस सेशन कोर्ट को कमिट किया गया। बाद में टोहो एक्ट में प्रसंज्ञान आदेश निरस्त हो गया। अब आईपीसी की ट्रायल चल रही है।