इंद्राणी बांध की नहरों के निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर ग्रामीणों ने सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि निर्माण कार्य बिना प्रभावी मॉनिटरिंग के किया जा रहा है और कई जगह निर्धारित मानकों का पालन नहीं हो रहा। ग्रामीणों ने निर्माण सामग्री के सैंपल लेकर लैब में उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि किसानों को सिंचाई सुविधा दिलाने के लिए रेलवे क्रॉसिंग से धाकड़खेड़ी गांव तक करीब 3 से 5 किमी क्षेत्र में नहर निर्माण कराया जा रहा है। अधिकांश निर्माण कार्य पूरा हो चुका है, जबकि स्वीकृत कार्य का कुछ हिस्सा बाकी है। उनका आरोप है कि निर्माण में खाळ की रेत का उपयोग किया गया है, सीमेंट की मात्रा भी मानकों के अनुरूप नहीं रखी गई। समय पर तराई नहीं होने और पीसीसी की मोटाई कम होने से निर्माण की मजबूती प्रभावित हो सकती है। ग्रामीणों का यह भी कहना है कि निर्माण में बनास की बजरी का भी पर्याप्त उपयोग नहीं किया गया। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि जलसंसाधन विभाग के इंजीनियरों की नियमित मॉनिटरिंग नहीं होने से निर्माण की गुणवत्ता प्रभावित हो सकती है। उन्होंने पूरे निर्माण कार्य और निर्माण सामग्री के नमूनों की लैब में जांच करवाने की मांग की है। ^कार्यक्षेत्र काफी बड़ा होने के कारण प्रतिदिन प्रत्येक निर्माणस्थल का निरीक्षण करना संभव नहीं हो पाता। करीब दो किमी निर्माण कार्य अभी शेष है, जिसे भी जल्द पूरा कराया जाएगा। निर्माण की गुणवत्ता पर विशेष ध्यान रखा जाएगा। -लोकेश नागर, जेईएन, जलसंसाधन विभाग