पंचायतीराज चुनाव के दूसरे चरण में 7 पंचायत समितियों में पंच-सरपंच के चुनाव शुक्रवार को संपन्न हुए। जिले की 189 ग्राम पंचायतों के सरपंच पद के लिए 549 प्रत्याशियों के बीच मुकाबला था। सुबह 7 बजे मतदान शुरू हुआ। शिव पंचायत समिति के विभिन्न मतदान केंद्रों पर आठ बजे केंद्रों पर वोटर्स की कतारें शुरू हो गई। सरपंच चुनने के लिए मतदाताओं में जबरदस्त उत्साह नजर आया। दोपहर तक 50 फीसदी मतदान हो गया। जोरानाडा केंद्र पर सुबह नौ बजे दो बूथ पर कतारें लगी थी। केंद्र से 200 मीटर की दूरी पर प्रत्याशियों के समर्थकों की रेलमपेल नजर आई। यहां पर 9.30 बजे तक 35 फीसदी वोट पड़ चुके थे। मल्लीनाथ नगर केंद्र पर 10 बजे दो बूथों पर मतदान प्रक्रिया शांतिपूर्ण जारी थी। प्रत्याशी वोटर्स को केंद्र तक पहुंचाने में जुटे नजर आए। कुछ ऐसा ही नजारा बलाई गांव में नजर आया। दो प्रत्याशियों के बीच रोचक मुकाबला था। समर्थक दूर-दराज इलाकों से वोटर्स को केंद्र तक पहुंचाने में जुटे रहे। 11 बजे बीसूकला में एक बूथ पर कतार लगी थी, लेकिन एक बूथ पर दो-तीन वोटर्स मौजूद रहे। हालांकि मतदान 40 फीसदी हो चुका था। गूंगा में चार बूथों पर लोकतंत्र के उत्सव का माहौल रहा। 15 नंबर बूथ पर 280,16 पर 190 व 17 पर 233 वोट डाले जा चुके थे। हड़वा के बूथ 19 पर 12 बजे तक 991 में से 660 व 18 पर 942 में से 500 मतदाता अपने मत का प्रयोग कर चुके थे। नेगरड़ा में बूथ 61 पर 550 व बूथ 62 पर 837 वोट पड़ चुके थे। यहां पर स्कूल परिसर में करीब डेढ़ सौ वोटर्स टीनशेड के नीचे बैठे वोटिंग का इंतजार करते नजर आए। इसी तरह मेघे का गांव में 1.30 बजे एक बूथ पर 482 व दूसरे पर 622 वोट डाले जा चुके थे। कुछ ऐसा ही माहौल झांफली में भी देखने को मिला। दोनों प्रत्याशी अपनी-अपनी जीत को लेकर आश्वस्त थे। मुद्दों को भूल गए और वादे रहे हावी, जातीय समीकरणों पर ही मिले वोट सरपंच चुनाव में मुद्दे गायब रहे। आमने-सामने खड़े प्रत्याशियों ने मतदाताओं से विकास के वादे किए। गांव की तकदीर बदलने के सपने भी दिखाए। लेकिन धरातल पर लोगों ने जातीय समीकरणों पर ही प्रत्याशियों को वोट दिए। इस बार जातीय फैक्टर पूरी तरह से हावी रहा। समर्थकों ने भी इसको लेकर लॉबिंग की। पिछले कई दिनों से प्रत्याशियों के घरों पर पार्टियां चल रही थी। वोटर्स को लुभाने के लिए मनुहारें चली। 9 बजे आने लगे नतीजे, देर रात मनाया जश्न 7 पंचायत समितियों की 189 पंचायतों के सरपंच चुने गए। रात नौ बजे से नतीजे आने लगे। परिणाम घोषित होते सरपंचों के समर्थक जीत के जश्न में डूब गए। वहीं हारने वाले प्रत्याशी व समर्थकों को निराशा हाथ लगी। मतगणना स्थल से धीरे-धीरे भीड़ कम हो गई। सरपंच चुनाव जीत पर गांवों में देर रात तक जश्न व पार्टियां चली। लोगों ने पटाखे फोड़कर खुशी का इजहार किया। सरपंचा चुनाव रि धाधु पूरी कोनी हुई, अर घरवाला थमा दी झाड़ू! गांवां में सरपंचां रा चुनावां री धाधू अभी पूरी हुई कोनी, कि घर पुगता ही घर आला सफाई अभियान चला दियो— “ले बेटा, ओ झाड़ू पकड़, अब घर री सफाई कर! पचे करजे सरपंच री बढ़ाई, दिवाळी आवण आ ळी है, मैं मन ही मन सोचूं, म्हैं तो इतरा दिन गांव री राजनीति, वोटां रा हिसाब-किताब अर सरपंचां री धांधू में उलझ्यो पड़्यो हो, पण घर में तो म्हारी ही सरकार बैठी है! इण सरकार में ना टिकट री जरूरत, ना प्रचार री, सीधो झाड़ू रो चुनाव चिह्न हाथ में थमाय देवे! हमे सफाई अभियान रो चुनाव लड़नो पड़ी मम्मी केवे— “बेटा, गांव में सरपंच सफाई करी कि कोनी, बो तो बाद में देखांला, पण आपणे घर री सफाई तो आपणै ही करनी पड़सी!” बस फेर काइ , जियां घाणी रो बल्द घाणी चलावन में लागे, बियान आज मारो नंबर लागयो ओर बिना मुहर्त शुभारंभ हो गयो घर में सफाई अभियान! ना मंत्रा रि जरूरत , ना मंत्री री जरूरत , ना फीतो काटन री जरूरत , ओ अभियान तो मने पूरी करनो पडसी फूस कचरो बारे, पुराणा सामान बारे, ओर जाळा करिया साफ, दीवारां री रंग रोगन करे पल प्लाट करती लगाई रंग-बिरंगी लाइटां , हमे घर एडो लागे जियां नवी नवेली दुल्हन सिणगार करियो है अर नई-नई चीजां री खरीददारी। बाहर निकलूं तो नगर निगम आ ळा भी सफाई में लाग्योड़ा है। लागे है, दिवाळी आवे तो नेता, अफसर अर घर आला—तीणूं ने सफाई री याद एक साथ आवे! बठिने बाजारां में भी चमक धमक लौटण लागी है। दुकानदारां ने दुकानां सजाय दी, मिठाई आला थाळ सजावै, कपड़ा आळा नई डिजाइन दिखावै, अर सजावट आळा रंग-बिरंगी लाइटां चमकावै। सबने आस है कि दिवाळी पर सबने लक्ष्मी जी बरसने रो इंतजार रेवे असली सफाई सिर्फ घरां री कोनी, मन ओर विचारां री भी होणी चाहिजे । समाज में फैलियोड़ा नशा और कुरीतियों रि सफाई भी होवणी चाहिज़े, घर साफ रहसी तो काया अच्छी रहसी, मन साफ रहसी तो रिश्तां में मिठास रहसी, अर मेहनत ईमानदारी री होसी तो लक्ष्मीजी रो वास भी सुख-समृद्धि लावेला। तो भायला-, झाड़ू हाथ में लेवो, घर सजावो, बाजारां में रौनक बढ़ावो, अर दिवाळी में प्रेम, भाईचारा अर खुशियां री दिवाळी बणावो। बाकी सरपंचां री धांधू तो फेर चालती रहसी, पण दिवाळी री सफाई में घरवाला सूं बचण रो कोई जुगाड़ कोनी! -करण देवासी जाने-माने इंफ्लुएंसर हैं। म्हारी बोली-म्हारो व्यंग्य करण देवासी, नागौर