स्पीकर वासुदेव देवनानी ने विधानसभा की 16 समितियों (12 सामान्य और चार वित्तीय) में सभापति और सदस्य बनाए हैं। विधानसभा की नियम समिति में पूर्व सीएम वसुंधरा राजे, अशोक गहलोत और पूर्व डिप्टी सीएम सचिन पायलट एक साथ मेंबर बने हैं। 16 समितियों में से तीन के सभापति कांग्रेस विधायक हैं। 11 समितियों में बीजेपी विधायकों को सभापति बनाया है। दो समितियों में स्पीकर वासुदेव देवनानी पदेन सभापति हैं। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली जनलेखा समिति के सभापति हैं। कांग्रेस विधायक राजेंद्र पारीक को प्रश्न और संदर्भ समिति, नरेंद्र बुडानिया को पिछड़े वर्ग के कल्याण संबंधी समिति के सभापति का जिम्मा दिया है। विधानसभा की समितियों का कार्यकाल अगले साल 31 मार्च तक रहेगा। सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति में सीएम भजनलाल पहली बार सदस्य सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति में स्पीकर पदेन सभापति हैं। इस समिति में सीएम भजनलाल शर्मा को पहली बार सदस्य बनाया है। पिछली बार इस कमेटी में सीएम सदस्य नहीं थे। इस कमेटी में नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली सहित 16 मेंबर हैं। ज्यादातर वरिष्ठ विधायकों को रखा गया है। एक कमेटी में महिला सभापति केवल एक समिति में महिला विधायक को सभापति बनाया है। बीजेपी विधायक कल्पना देवी को महिलाओं और बालकों के कल्याण संबंधी समिति में मेंबर बनाया है। ये तीन समिति सबसे अहम और चर्चित विधानसभा की समितियों में जनलेखा समिति, सदाचार समिति और विशेषाधिकार समिति सबसे अहम मानी जाती हैं। हालांकि सभी समितियों का महत्व होता है। विधायकों के आचरण की जांच के लिए सदाचार कमेटी चर्चित रही है। पिछले दिनों विधायक निधि में कमिशन मांगने के मामले में तीन MLA की जांच सदाचार कमेटी कर रही है। विधानसभा की समितियों के सभापति और सदस्य… नियम समिति : विधानसभा के नियमों में समय-समय पर संशोधन करने और उनकी व्यवहारिकता के बारे में सुझाव देती है। समिति नए नियमों के बारे में भी सुझाव देती है। प्रश्न और संदर्भ समिति : विधानसभा के सवालों और उनके जवाब पर निगरानी रखने के साथ रिपोर्ट में उन्हें बेहतर करने पर सुझाव देती है। महिलाओं और बालकों के कल्याण संबंधी समिति : महिलाओं और बच्चों से जुड़ी योजनाओं, कार्यक्रमों पर निगरानी करने के साथ उन पर सुझाव देती है। महिलाओं-बच्चों के कल्याण से जुड़े नियम-कानूनों पर निगरानी रखकर समय-समय पर उनमें संशोधन या बदलाव के बारे में भी समिति सुझाव देती है। पिछड़े वर्ग के कल्याण संबंधी समिति : पिछड़े वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों पर निगरानी रखती है। समिति पिछड़े वर्गों की समस्याओं को दूर करने और उनके कल्याण पर सुझाव देती है। अनुसूचित जाति कल्याण समिति : समाज के वंचित वर्गों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं और कार्यक्रमों पर निगरानी रखती है। एससी वर्ग के खिलाफ होने वाले अत्याचारों की रोकथाम और कानूनी कार्रवाई पर भी निगरानी रखती है। समिति लगातार बैठकें कर रिपोर्ट में सुझाव देती है। अनुसूचित जनजाति कल्याण समिति : आदिवासी-जनजाति वर्ग के उत्थान की योजनाओं और कार्यक्रमों पर निगरानी रखती है। आदिवासियों के उत्थान से जुड़े सुझाव देती है। गृह, स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं संबंधी समिति : स्थानीय निकायों और पंचायतीराज संस्थाओं और उन्हें दिए जाने वाले फंड व फंक्शनरी पर निगरानी रखती है। स्थानीय निकायों और पंचायतीराज सिस्टम को मजबूत करने पर रिपोर्ट देती है। पुस्तकालय और सरकारी आश्वासनों संबंधी समिति : विधानसभा में उठाए जाने वाले मुद्दों पर मंत्रियों और सरकार की तरफ से दिए जाने वाले आश्वासनों पर समिति निगरानी रखती है। आश्वासनों पर एक्शन टेकन रिपोर्ट पर निगरानी रखती है। याचिका और सदाचार समिति : विधायकों के आचरण संबंधी शिकायतों की जांच करती है। विधायकों के खिलाफ भ्रष्टाचार सहित कोई गंभीर आरोप लगने पर उसकी जांच करती है। सदाचार समिति विधायकों के खराब आचरण का दोषी पाए जाने पर विधायकी खम करने तक की सिफारिश कर सकती है। विशेषाधिकार और अधीनस्थ विधान संबंधी समिति : सदन और विधायकों के विशेषाधिकार हनन के मामलों की जांच कर कार्रवाई की सिफारिश करती है। अल्पसंख्यकों के कल्याण और पर्यावरण संबंधी समिति : अल्पसंख्यकों के कल्याण से जुड़ी योजनाओं पर निगरानी रखती है। पर्यावरण से जुड़े मुद्दों पर भी समिति सुझाव देती है। सामान्य प्रयोजनों संबंधी समिति : यह बहुत अहम समिति है। विधानसभा सदन के कामकाज में सुधार लाने, लंबित मामलों को निपटाने और कार्यप्रणाली में सुधार पर सुझाव देती है। जो मामले विधानसभा की किसी दूसरी समितियों के अधीन नहीं आते, वे मामले भी सामान्य प्रयोजन समिति के सामने रखे जाते हैं। जनलेखा समिति : जनलेखा समिति सीएजी रिपोर्ट में उठाई गई आपत्तियों के आधार पर संबंधित विभागों के अफसरों से जवाब तलब करती है और जांच करती है। इसकी नियमित बैठकें होती हैं। इन बैठकों में सरकारी विभागों के अफसरों को बुलाकर उनसे ऑडिट की आपत्तियों पर सवाल जवाब होते हैं। जनलेखा समिति लगातार बैठकें कर रिपोर्ट तैयार करती है। सरकारी योजनाओं के भ्रष्टाचार से लेकर सरकारी ऑडिट तक पर निगरानी रखती है। जनलेखा समिति ऑडिट आपत्तियों के आधार पर कार्रवाई की सिफारिश करती है। प्राक्कलन समिति (एस्टीमेट कमेटी) : दोनों एस्टीमेट कमेटी बजट अनुमानों की जांच करती है। विभागों के बजट खर्च और अनुमानों पर निगरानी रखती है। समिति हर साल रिपोर्ट देती है। राजकीय उपक्रम समिति : यह समिति सरकारी कंपनियों, पब्लिक सेक्टर अंडरटेकिंग के कामकाज पर निगरानी रखती है। सरकारी उपक्रमों के कामकाज को सुधारने के लिए सिफारिश करती है। समिति हर साल रिपोर्ट देकर सुझाव और सिफारिश देती है।