राजस्थान में अगले विधानसभा चुनाव से पहले सीटों की संख्या 270 होने के साथ-साथ 90 सीटें महिला विधायकों के लिए रिजर्व हो सकती हैं। केंद्र सरकार राज्यों की विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं को 33% आरक्षण पर मुहर लगा सकती है। दरअसल, केंद्र सरकार 'नारी शक्ति वंदन अधिनियम' (महिला आरक्षण बिल) में संशोधन के जरिए 33% महिला आरक्षण सुनिश्चित करने की तैयारी में है। जानकारों का कहना है- मई में संसद का विशेष सत्र बुलाकर यह संशोधन पारित हो सकता है। इससे राजस्थान की सियासी तस्वीर पूरी तरह से बदली हुई नजर जाएगी। राज्य के मंत्रिमंडल में 40 विधायक मंत्री बन सकेंगे। इसी तरह लोकसभा में भी 12 सीटों पर महिलाएं चुनाव लड़ती नजर आएंगी। वहीं, सालों से एक ही सीट पर जमे नेताओं का या तो टिकट कटेगा या फिर उन्हें सीट बदलनी पड़ सकती है। राजस्थान में कैसे पॉलिटिकल पिक्चर बदलेगी? लोकसभा-विधानसभा की सीटों का गणित क्या रहेगा? भास्कर ने एक्सपर्ट के जरिए इस संशोधन से होने वाले संभावित बदलावों का एनालिसिस किया। पढ़िए ये रिपोर्ट… सबसे पहले जानते हैं क्या है महिला आरक्षण कानून और प्रस्तावित संशोधन? महिला आरक्षण का फॉर्मूला क्या रहेगा? सबसे बड़ा सवाल यह है कि महिला आरक्षण का क्या फॉर्मूला लागू होगा? कौन सी सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी? मौजूदा प्रस्तावित मसौदे में इसे लेकर कोई स्पष्टता नहीं है, लेकिन दो संभावनाएं जताई जा रही हैं... 1. लॉटरी सिस्टम : नगरीय निकायों और पंचायतों की तरह लॉटरी निकालकर सीटों का आरक्षण तय किया जा सकता है। 2. महिला वोटर्स की संख्या का आधार : जिन सीटों पर महिला मतदाताओं का अनुपात अधिक हो, उन्हें आरक्षित किया जा सकता है। हालांकि, एक्सपर्ट का कहना है कि लॉटरी सिस्टम की संभावना ज्यादा है, क्योंकि अधिकांश सीटों पर महिला-पुरुष वोटर का अनुपात लगभग बराबर ही होता है। रोटेशन सिस्टम का राजनीति पेंच, हर 5 साल में बदलेंगी सीटें महिला आरक्षण में सबसे बड़ा राजनीतिक पेंच 'रोटेशन सिस्टम' का है। आरक्षित सीटें स्थायी नहीं रहेंगी, बल्कि हर पांच साल बाद बदलती रहेंगी। इसे इस उदाहरण से समझ सकते हैं। परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या कम से कम 34 हो सकती है। ऐसे में लोकसभा चुनाव-2029 में 33% रिजर्वेशन के अनुसार 12 सीटें महिलाओं के लिए रिजर्व हो जाएंगी। ये सीटें केवल एक कार्यकाल के लिए रिजर्व रहेंगी। अगले लोकसभा चुनाव यानी 2034 में फिर से लॉटरी या महिला वोटर्स की संख्या के आधार पर नई 12 सीटें रिजर्व होंगी। यही प्रक्रिया विधानसभा चुनाव-2028 में भी अपनाई जा सकती है। अब 4 पॉइंट में समझते हैं राजस्थान की सियासी तस्वीर कैसे बदलेगी इस संशोधन का राजस्थान की राजनीति पर काफी असर पड़ेगा। विधानसभा से लेकर लोकसभा तक सीटों का गणित बदल जाएगा। साथ ही विधानसभा और लोकसभा में महिलाओं का प्रतिनिधित्व बढ़ेगा। 1. राजस्थान विधानसभा : बहुमत का आंकड़ा बदलेगा, 4 गुना तक बढ़ेंगी महिलाएं 2023 के विधानसभा चुनाव में कुल 21 महिलाएं विधायक बनीं। यह संख्या विधानसभा के कुल 200 सदस्यों का लगभग 10.5% ही है। भविष्य में परिसीमन के बाद विधानसभा सीटों की संख्या 270 हो सकती है और महिला आरक्षण 33 फीसदी लागू हो जाएगा। तब 90 सीटें महिला उम्मीदवारों के लिए आरक्षित हो जाएंगी। इसके बाद विधानसभा में महिलाओं की भागीदारी वर्तमान की तुलना में 4 गुना से भी अधिक बढ़ जाएगी। वहीं, विधानसभा में सीटों का आंकड़ा बढ़ने से सरकार बनाने के लिए जादुई आंकड़ा भी बदल जाएगा। वर्तमान में राजस्थान की 200 विधानसभा सीटों में से किसी भी पार्टी को सरकार बनानी है तो बहुमत का आंकड़ा 101 को छूना जरूरी है। अगला विधानसभा चुनाव यदि 270 सीटों पर हुआ तो किसी भी पार्टी को बहुमत के लिए 136 सीटें जीतनी होंगी। 2. एक तिहाई विधायक-सांसद के टिकट कटना तय, बदलनी पड़ सकती है सीट आरक्षण लागू होने के बाद 2028 के विधानसभा और 2029 के लोकसभा चुनाव के बाद हर विधानसभा-लोकसभा चुनाव में एक-तिहाई सीटों पर मौजूदा विधायकों-सांसदों का टिकट कटना लगभग तय हो जाएगा या उन्हें अपनी सीट बदलनी पड़ेगी। क्योंकि आरक्षण फॉर्मूले के अनुसार हर पांच साल बाद आरक्षित सीटों को नई प्रक्रिया अपनाकर बदला जाएगा। प्रदेश में कई नेता ऐसे हैं जो एक ही सीट पर दशकों से प्रभाव जमाए हुए हैं। यह स्थिति राजनीतिक दलों और दशकों से एक ही सीट पर राजनीति कर रहे नेताओं के लिए एक बड़ी चुनौती पैदा करेगी। 3. बढ़ेगा कैबिनेट साइज, 40 बन सकेंगे मंत्री फिलहाल विधानसभा सीटों की संख्या को देखते हुए राजस्थान में 30 विधायक तक ही मंत्री बन सकते हैं। 2028 के विधानसभा चुनाव के बाद विधायकों की संख्या बढ़ने का सीधा असर मंत्रिमंडल के आकार पर भी पड़ेगा। नियमानुसार, कुल विधायकों की संख्या के 15% को मंत्री बनाया जा सकता है। इस हिसाब से राजस्थान में मंत्रियों की संख्या 40 तक पहुंच सकती है। वर्तमान में भजनलाल सरकार में सीएम के अलावा 2 डिप्टी सीएम, 12 कैबिनेट मंत्री, 4 स्वतंत्र प्रभार वाले राज्य मंत्री और 5 राज्य मंत्री हैं। विधायकों की 15 प्रतिशत संख्या के हिसाब से अभी 6 मंत्री और बनाए जा सकते हैं। जानकारी के अनुसार, अभी राजस्थान विधानसभा में 246 विधायकों के बैठने की व्यवस्था है। सदन में करीब 50 सीटें और बढ़ाई जा सकती हैं। फिलहाल 200 विधायक सदन में बैठ रहे हैं। सिटिंग कैपेसिटी 300 तक भी बढ़ जाए, तो भी कोई खास परेशानी नहीं आने वाली। ऐसे में परिसीमन के बाद विधायकों की संख्या बढ़ती है तो भी सदन में विधायकों को बैठाने में कोई परेशानी नहीं आएगी। 4. लोकसभा: महिला सांसदों की संख्या हो जाएगी 4 गुना लोकसभा में सीटें बढ़ने से राजस्थान का देश की राजनीति में थोड़ा दबदबा और बढ़ जाएगा। केंद्र की राजनीति में राजस्थान के प्रतिनिधियों की भागीदारी बढ़ेगी और वे अपने क्षेत्र के लिए मांग और मुद्दे, दोनों उठाएंगे। इससे प्रदेश में विकास की रफ्तार भी बढ़ेगी। राजस्थान में लोकसभा की 25 सीटें हैं, जिनमें फिलहाल 3 महिला सांसद हैं। इन 25 सीटों में 18 अनारक्षित, 4 एससी और 3 एसटी के लिए आरक्षित हैं। जनगणना और नए सिरे से होने वाले परिसीमन के बाद लोकसभा सीटों की संख्या 34 तक हो सकती है। कुल सीटों पर 33 फीसदी महिला आरक्षण के तहत कम से कम 12 सीटें महिला उम्मीदवारों के नाम आरक्षित हो जाएंगी। गौरतलब है कि वर्ष 2002 में भारत के परिसीमन आयोग ने प्रक्रिया शुरू की और 2008 में नई सीमाएं लागू कीं, लेकिन सीटों की कुल संख्या में बदलाव नहीं किया गया था। एक्सपर्ट बोले- बहू-बेटी को टिकट के लिए होगी लॉबिंग वरिष्ठ पत्रकार और पॉलिटिकल मामलों के एक्सपर्ट महेश शर्मा कहते हैं- बिल पारित होने से निश्चित ही महिलाओं की भागीदारी बढ़ेगी। देश की संसद और विधानसभा में महिलाओं की आवाज बुलंद होगी। लेकिन इसके साथ ही संबंधित सीट पर पत्नी, बहन या बहू-बेटी को टिकट दिलवाने से वंशवाद भी पनप सकता है।