राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी ने राष्ट्र की एकता, अखंडता और सांस्कृतिक मूल्यों की रक्षा के लिए अपना संपूर्ण जीवन समर्पित किया। उनके आदर्श, दूरदर्शी नेतृत्व और राष्ट्रहित के प्रति समर्पण आज भी युवाओं के लिए प्रेरणास्रोत हैं। विधायक बालमुकुंद आचार्य ने कहा कि डॉ. मुखर्जी का जीवन राष्ट्रसेवा, शिक्षा और राष्ट्रीय चेतना का अद्वितीय उदाहरण है। उन्होंने युवाओं का आह्वान किया कि वे उनके आदर्शों और मूल्यों को आत्मसात कर राष्ट्र निर्माण में सक्रिय भूमिका निभाएं। दोनों नेता सोमवार को जयपुर में राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के सभागार में "डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी : व्यक्तित्व एवं कृतित्व" विषय पर आयोजित हुई संगोष्ठी में बोल रहे थे। कार्यक्रम में डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन, राष्ट्र निर्माण में उनके योगदान और उनके विचारों पर विस्तार से जानकारी दी गई। यह संगोष्ठी शांति एवं अहिंसा निदेशालय, राजस्थान सरकार एवं राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान (मानद विश्वविद्यालय), जयपुर के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित की गई। मुख्य अतिथि के रूप में राजस्थान राज्य वित्त आयोग के अध्यक्ष अरुण चतुर्वेदी और विशिष्ट अतिथि विधायक बालमुकुंद आचार्य मौजद रहे। राष्ट्रभक्ति, त्याग और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणादायी उदाहरण मुखर्जी का जीवन मुख्य वक्ता प्रांत प्रचारक बाबूलाल ने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी का संपूर्ण जीवन राष्ट्रभक्ति, त्याग और सांस्कृतिक चेतना का प्रेरणादायी उदाहरण है। उन्होंने कहा कि युवाओं को उनके विचारों एवं आदर्शों से प्रेरणा लेकर राष्ट्रहित को सर्वोच्च प्राथमिकता देते हुए समाज के प्रति अपने दायित्वों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करना चाहिए। राष्ट्रीय आयुर्वेद संस्थान के कुलपति प्रो. संजीव शर्मा ने सभी अतिथियों का स्वागत करते हुए कहा कि संस्थान केवल आयुर्वेद शिक्षा एवं अनुसंधान तक ही सीमित नहीं है, बल्कि विद्यार्थियों में राष्ट्रीय मूल्यों, सामाजिक उत्तरदायित्व और चरित्र निर्माण की भावना विकसित करने के लिए भी निरंतर प्रयासरत है। राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें स्टूडेंट्स-शिक्षक उन्होंने कहा कि इस संगोष्ठी के माध्यम से विद्यार्थियों एवं शिक्षकों को डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के व्यक्तित्व, कृतित्व और राष्ट्र निर्माण में उनके अमूल्य योगदान से परिचित कराया गया, ताकि वे उनके विचारों से प्रेरणा लेकर समाज और राष्ट्र के प्रति अपने दायित्वों का प्रभावी ढंग से निर्वहन कर सकें। महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम है ऐसे आयोजन शांति एवं अहिंसा निदेशालय, राजस्थान सरकार के निदेशक अजय असवाल ने कहा कि ऐसे आयोजन महापुरुषों के विचारों को नई पीढ़ी तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम हैं। उन्होंने कहा कि डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के आदर्श युवाओं में राष्ट्रीय एकता, सामाजिक उत्तरदायित्व एवं सकारात्मक नागरिक मूल्यों को सुदृढ़ करने की प्रेरणा देते हैं। संगोष्ठी के समन्वयक एवं संस्थान के उपनिदेशक चन्द्रशेखर शर्मा ने कार्यक्रम में पधारे सभी अतिथियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में मधु रघुवंशी, कुलसचिव प्रो. अनिता शर्मा, प्रो. पी. हेमंता, संयुक्त निदेशक जे.पी. शर्मा सहित अन्य वक्ताओं ने डॉ. श्यामा प्रसाद मुखर्जी के जीवन के विभिन्न आयामों पर प्रकाश डालते हुए उनके विचारों की समकालीन प्रासंगिकता पर भी चर्चा की। संगोष्ठी में बड़ी संख्या में संस्थान के शिक्षक, चिकित्सक, शोधार्थी, विद्यार्थी और कर्मचारी उपस्थित रहे।