सवाई माधोपुर जिले के चौथ का बरवाड़ा और आसपास के 18 गांवों में अक्षय तृतीया के दिन शोक परंपरा निभाई गई। 16वीं शताब्दी की एक घटना के कारण यहां इस दिन शादी विवाह नहीं होते और मंदिर में घंटियां बांध दी जाती हैं। रविवार को चौथ माता मंदिर में आरती बिना लाउडस्पीकर के हुई और पूरे क्षेत्र में सन्नाटा रहा। 18 गांवों में नहीं होते शादी विवाह चौथ का बरवाड़ा सहित आसपास के 18 गांवों में इस दिन कोई भी शादी विवाह नहीं किया जाता। पूरे कस्बे और चौथ माता मंदिर मार्ग पर सन्नाटा देखा गया। लोगों ने अपने घरों में भी सामान्य गतिविधियां सीमित रखीं। अक्षय तृतीया के दिन चौथ माता मंदिर में घंटियों को बांध दिया गया। सुबह, दोपहर और रात की आरती बिना लाउडस्पीकर के मन ही मन की गई। मंदिर परिसर में किसी प्रकार की ध्वनि नहीं रखी गई। 16वीं शताब्दी की घटना से जुड़ी परंपरा मंदिर ट्रस्ट के पुजारी शंकर लाल सैनी के अनुसार 16वीं शताब्दी में बड़ी संख्या में नवविवाहित दूल्हा दुल्हन की मृत्यु हो गई थी। उसी घटना के बाद से इस दिन शोक मनाने की परंपरा शुरू हुई, जो आज तक जारी है। घरों में सब्जी तक नहीं बनाई इस दिन लोगों ने शादी विवाह के साथ-साथ घरों में सब्जी बनाना भी बंद रखा। पूरे दिन क्षेत्र में शांति और शोक का माहौल बना रहा, जिसे ग्रामीण परंपरा के रूप में निभाते हैं।